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नोटबंदी के 3 साल

Published On :    8 Nov 2019   By : MN Staff
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नोटबंदी की बरसी पर मोदी सरकार के लिए बुरी खबर मूडीज ने घटाई भारत की रेटिंग, लंबे समय तक चलने वाली मंदी के संकेत



‘‘मूडीज के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में वित्तीय संकट, नौकरियाँ पैदा करने में नाकामी और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के तंग हाथ के संकेत हैं कि आने वाले दिनों में मंदी लंबे दौर तक चलने वाली है’’

नई दिल्ली  :   नोटबंदी के तीन साल पूरे होने के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ. बल्कि, आज देश की अर्थव्यवस्था और ज्यादा बुरे दौर से गुजर रही है. यह भी नहीं है कि यह बुरा दौर कुछ दिनों में खत्म हो जायेंगे. 


बल्कि संकेत मिल रहे हैं कि हालात और ज्यादा गंभीर होने वाले हैं. इस बात का अंदाजा नोटबंदी के बरसी पर मोदी सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक और बुरी खबर आई है. दुनिया की सबसे क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से एक मूडीज ने कम आर्थिक विकास दर का हवाला देते हुए भारत की रेटिंग को ‘स्थिर’ से घटाकर ‘नकारात्मक’ कर दिया है. 



मूडीज ने भारत के बजट घाटा को मार्च 2020 तक 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो सरकार के 3.3 फीसदी के लक्ष्य से नीचे है.



मूडीज ने दावा किया है कि पहले के मुकाबले भारत की आर्थिक वृद्धि बहुत कम रहने के अनुमान हैं. जबकि, इससे पहले मूडीज ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की जीडीपी अनुमान को 6.2 प्रतिशत से घटाकर 5.8 प्रतिशत कर दिया था. एजेंसी ने कहा, परिदृश्य को नकारात्मक करने का फैसला आर्थिक वृद्धि के पहले के मुकाबले काफी कम रहने के बढ़ते जोखिम को दर्शाता है.



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मूडीज के पूर्व अनुमान के मुकाबले वर्तमान की रेटिंग लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और संस्थागत कमजोरी से निपटने में सरकार और नीति के प्रभाव को कम होते हुए दिखाती है. यही वजह है कि पहले ही उच्च स्तर पर पहुंचा कर्ज का बोझ धीरे-धीरे और बढ़ सकता है.


रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में एक और बड़ी बात की है जो मोदी सरकार की मुश्किलें और पैदा कर सकता है. मूडीज के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में वित्तीय संकट, नौकरियाँ पैदा करने में नाकामी और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के तंग हाथ के संकेत हैं कि आने वाले दिनों में मंदी लंबे दौर तक चलने वाली है. वहीं, वित्त मंत्रालय ने मूडीज के रेटिंग के बाद ब्यान जारी किया है. मजेदार बात तो यह है कि सरकार ने कहा है कि भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है.



बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 साल पहले 8 नवंबर 2016 की रात आठ बजे नोटबंदी की घोषणा की थी. नोटबंदी के पीछे सरकार का मानना था कि इससे भ्रष्टाचार में कमी होगी, कालाधन बाहर आ जायेगा और आतंकवादी फंड पर रोक लगेगी और जाली नोटों का कारोबार बंद हो जायेगा. 


लेकिन, ठीक इसके उलटा हुआ. भ्रष्टाचार खत्म होने के बजाय बढ़ गया, कालाधन बाहर आने के बजाए पूंजीपतियों से लेकर भ्रष्ट नेताओं के कालेधन सफेद हो गये, जाली नोटों का कारोबार और ज्यादा बढ़ गया और आतंकी फंडिंग में बढ़ोत्तरी हो गयी


यही नहीं नोटबंदी ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर ही तोड़ दी और तो और सरकार के इस फैसले से लाखों नौकरियाँ एक ही झटके में खत्म हो गई. इसके अलावा नोटबंदी में सैकड़ों लोगों को जानें भी गवांनी पड़ी.

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