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बर्बादी के कगार पर देश

Published On :    2 Dec 2019   By : MN Staff
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साल 2014 से 2019 के बीच 114 कंपनियां बंद, करीब 16,000 लोग प्रभावित



नई दिल्ली : तकरीबन 6 साल से देश को बिल्कुल बर्बादी के कगार पर पहुँचा दिया गया है. इन बीते सालों में न तो देश की आर्थिक व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही रोजगार सृजन में कोई बढ़ोत्तरी हुई. बल्कि, बीते सालों में जहाँ देश की आर्थिक स्थिति लगातार नीचले गिरती रही तो वहीं बेरोजगारी ऊंचे स्तर पर बढ़ता गया. 


इस बात का सबूत खुद केन्द्र सरकार के श्रम और रोजगार मंत्री ने लोकसभा में अपने बयानों से दे दिया है. श्रम और रोजगार राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने बीते 25 नवंबर 2019 को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया था कि 2014 से लेकर 2019 के बीच देश भर में कंपनियों की कुल 114 इकाइयाँ बंद हो गई हैं. जिसकी वजह से करीब 16,000 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं.


गौरतलब है कि बसपा सांसद दानिश अली ने सदन में पूछा था कि क्या ये सच है कि बीते पाँच साल में बड़ी संख्या में कंपनियाँ बंद हुई हैं और अगर ऐसा हुआ है तो इसका कारण और ब्यौरा दिया जाए. उन्होंने यह भी पूछा था कि इन कंपनियों के बंद होने की वजह से कुल कितने लोग बेरोजगार हुए और सरकार की ओर से उनकी अजीविका के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? 


दानिश अली के सवाल के जवाब में संतोष गंगवार ने साल 2014 से 2019 के बीच का ब्यौरा दिया, जिसमें बंद हुई इकाइयों की संख्या, बंद होने का कारण और प्रभावित हुए लोगों की संख्या के बारे में जानकारी शामिल है.



यह भी पढ़िए : बीजेपी सरकार में किसानों का बुरा हाल



बता दें कि केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 में 34, साल 2015 में 22, साल 2016 में 27, साल 2017 में 22, साल 2018 में आठ और साल 2019 में सितंबर तक में कुल 114 इकाइयां बंद हो चुकी हैं. इन इकाइयों के बंद होने की वजह से साल 2014 में 4,726, साल 2015 में 1,852, साल 2016 में 6,037, साल 2017 में 2,740, साल 2018 में 537 और साल 2019 में सितंबर तक में कुल 45 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. हालांकि, अभी ये आंकड़ें अनंतिम यानी कि प्रोविजिनल हैं.


गंगवार ने कहा कि ऐसे प्रभावित मजदूरों के हितों की रक्षा औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत मुआवजा देकर की जाती है. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के तहत काउंसलिंग, रिटेनिंग एंड रिडिप्लॉयमेंट (सीआरआर) नाम की एक योजना लागू की जा रही है. 


इसका उद्देश्य कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से वीआरएस, वीएसएस लेने वालों को नए वातावरण में समायोजित करना और उन्हें सक्षम बनाना है. यानी सरकार ने राष्ट्रीय कौशल विकाश योजना चलाकर भी कुछ नहीं कर पाई. 


इन तथ्यों को मद्देनजर रखते हुए ऐसा कहा जा सकता कि नरेन्द्र मोदी की सरकार ने न तो बीते पाँच सालों में देश के लिए कुछ और न ही दूसरे कार्यकाल में कुछ कर रही है. यही नहीं ऐसा लगता है कि आने वाले सालों में भी सरकार कुछ करने वाली नहीं है. कुल मिलाकर मोदी सरकार ने देश ‘‘अच्छे दिन’’ का सपना दिखाकर देश को बर्बादी के कगार पर

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