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कर्ज के दलदल में बिहार

Published On :    3 Dec 2019   By : MN Staff
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पटना मैट्रो के लिए जापान दे रहा 5400 करोड़ रुपए का कर्ज



पटना : निर्माण और आधारभूत संरचना समेत अन्य विकासात्मक कार्यों के नाम पर राज्य सरकार के कर्ज लेने की रफ्तार भी तेज हो गयी है. जहाँ बीते नौ सालों में राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर ढाई गुना हो गया है तो वहीं पटना सरकार जापान से 5400 करोड़ रूपये लेकर राज्य को कर्ज के बोझ नीचे पूरी तरह से डूबाने की भी तैयारी कर रही है.


सूत्रों के मुताबिक, जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन (जाइका) ने पटना मेट्रो रेल परियोजना के लिए 5400 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है. यह जानकारी बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी है. मोदी ने कहा कि केन्द्रीय शहरी और आवास मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पटना मेट्रो परियोजना के लिए जापान की जाइका से सस्ती दर पर 5,400 करोड़ रुपये का ऋण शीघ्र उपलब्ध कराने का उन्हें आश्वासन दिया है. 


मोदी ने कहा कि सोमवार को पुरी के दिल्ली स्थित कार्यालय में मिल कर आग्रह किया कि जापान सरकार के साथ इस माह होने वाली बैठक में प्राथमिकता के आधार पर परियोजनाओं का चयन कर पटना मेट्रो के लिए जाइका ऋण दिलाने की पहल की जाए.


मोदी के अनुसार, पुरी ने कहा पटना मेट्रो से उनका भावनात्मक लगाव है. भारत सरकार इस परियोजना के लिए हर तरह से मदद करेगी. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों 13,365 करोड़ रुपये लागत से बनने वाली पटना मेट्रो परियोजना का शिलान्यास किया था. इसके लिए जापान की जाइका से 5,400 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज लिया जाना है. इस योजना में भारत सरकार दो हजार करोड़ रुपये और बिहार सरकार अपनी हिस्सेदारी का 5,390 करोड़ रुपये खर्च करेगी.



यह भी पढ़िए : गुजरात की कंपनी को दिया 321 करोड़ का ठेका रद्द सीएम उद्धव ठाकरे ने पलटा फडणवीस सरकार का फैसला



बताते चलें कि बिहार में विकास की गति जिस तेजी से बढ़ी है, उसी तेजी से राज्य सरकार के कर्ज लेने की रफ्तार भी तेज हो गयी है. बढ़ते विकास के साथ ही राज्य पर कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2011-12 में राज्य पर 50 हजार 990 करोड़ का कर्ज था, जो वित्तीय वर्ष 2018-19 में बढ़ कर एक लाख 30 हजार करोड़ तक पहुंच गया है. 


यानी पिछले नौ साल में राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ कर ढाई गुना हो गया है. इसकी वजह से राज्य पर ब्याज देने की देनदारी भी बढ़ती जा रही है. गौरतलब है कि नौ साल पहले राज्य सरकार दो हजार 922 करोड़ रुपये ब्याज की अदायगी पर खर्च करती थी. 


अब यह राशि बढ़कर सात हजार 326 करोड़ हो गयी है. कर्ज का बोझ ढाई गुना बढ़ने के साथ ही लोन अदायगी का बोझ भी इसी औसत में बढ़कर करीब तीन गुना हो गया है. राज्य सरकार ने सबसे ज्यादा नाबार्ड से दो हजार 100 करोड़ रुपये का लोन ले रखा है. 


इसके अलावा बाजार की विभिन्न एजेंसियों से 18 हजार 344 करोड़ रुपये का लोन लिया गया है. कुछ अन्य माध्यमों से भी राज्य सरकार ने अच्छी मात्रा में लोन लिया है. अब राज्य सरकार जापान से और कर्ज लेकर बिहार को कर्ज के दलदल में डूबाना चाहती है.

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