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हिंसा से पहले नरौदा पाटिया, गुलबर्ग सोसायटी में पुलिस बल हटा लिया नानावती आयोग ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की कार्रवाई की सिफारिश

Published On :    12 Dec 2019   By : MN Staff
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इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हिंसा के ठीक पहले नरोदा पाटिया और गुलबर्ग सोसाइटी क्षेत्रों से पुलिस बल हटा लिया जो उसके अधिकार क्षेत्र में थे और हत्याओं के बाद वापस लौटे.



नई दिल्ली : गुजरात में वर्ष 2002 के दंगों की जांच करने वाले नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के कुछ धड़ों के बीच पनपी नफरत की गहरी जड़ों की वजह से गुजरात में दंगे हुए. आयोग ने ऐसी भावनाओं को खत्म करने के लिए लोगों को बड़े पैमाने पर जागरूक करने की सिफारिश की है. 


दंगों के दौरान अहमदाबाद में हुई घटनाओं पर अपनी रिपोर्ट में न्या.जीटी नानावती आयोग ने तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों द्वारा प्रदान किए गए सबूतों का मजाक उड़ाया. खासकर जो रिपोर्ट गुलबर्ग सोसाइटी और नरोदा पाटिया नरसंहारों से संबंधित थी.


यह रिपोर्ट तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त एम के टंडन की भूमिका की ओर इशारा करती है. इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हिंसा के ठीक पहले नरोदा पाटिया और गुलबर्ग सोसाइटी क्षेत्रों से पुलिस बल हटा लिया जो उसके अधिकार क्षेत्र में थे और हत्याओं के बाद वापस लौटे. 



यह भी पढ़िए : नहीं दूंगा एनआरसी के लिए दस्तावेज, बना लें बंदी पूर्व आईएएस की अमित शाह दो टूक



रिपोर्ट में कहा गया है कि नरौदा पाटिया और गुलबर्ग सोसायटी में पुलिस ने 138 मुसलमानों मरने के लिए छोड दिया. 28 फरवरी, 2002 को नरोदा पाटिया में कुल 97 लोग मारे गए थे. जिसमें मरने वाला एक हिंदू था. जबकि गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी सहित 44 व्यक्ति मारे गए थे. जिसमें 39 मुस्लिम और 4 हिंदू थे.


आयोग ने तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों संजीव भट्ट, राहुल शर्मा और आर बी श्रीकुमार की विश्वासनीयता पर भी सवाल उठाए जिन्होंने आरोप लगाया था कि दंगों में राज्य सरकार की भूमिका थी. आयोग ने कहा कि सबूतों को बारीकी से खंगालने के बाद यह कहना संभव नहीं है कि पुलिस की ओर से कोई लापरवाही बरती गई थी. हालांकि यह काफी जरूरी था कि राज्य के पास अनुशासित पुलिस बल होना चाहिए था जो यह सुनिश्चित करता कि समाज की शांति भंग न हो.



रिपोर्ट में कहा गया है, साम्प्रदायिक दंगों के दौरान हुई घटनाओं के संबंध में सबूतों पर विचार करते हुए हमने पाया कि पुलिस की गैर मौजूदगी तथा उनके पर्याप्त संख्या में न होने से भीड़ का हिंसा करने के लिए हौसला बढ़ा. आयोग ने अहमदाबाद शहर में साम्प्रदायिक दंगों की कुछ घटनाओं पर कहा, पुलिस ने दंगों को नियंत्रित करने में सामर्थ्य, तत्परता नहीं दिखाई जो आवश्यक था. नानावती आयोग ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच या कार्रवाई करने की सिफारिश की है.
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