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मतों की संख्या में विसंगतियों पर चुनाव आयोग को नोटिस लोक सभा चुनाव 2019

Published On :    14 Dec 2019   By : MN Staff
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याचिका में दावा किया गया है कि उनके शोध के दौरान अनेक विसंगतियों का पता चला. याचिका में कहा गया है कि ये विसंगतियां एक मत से लेकर 1,01,323 मतों की हैं. जो कुल मतों का 10.49 फीसद है.



नई दिल्ली : 2019 के लोकसभा चुनावों में 347 निर्वाचन क्षेत्रों में वोट और गणना में मतों की संख्या में आए कथित अंतर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आायोग को नोटीस जारी किया है. कोर्ट ने दो गैर सरकारी संगठनों की जनहित याचिका पर शुकवार को यह नोटिस जारी किया. 


प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाले पीठ ने इसके साथ ही इन याचिकाओं को पहले से लंबित मामले के साथ संलग्न करते हुए कहा कि इन पर फरवरी, 2020 में सुनवाई होगी.


गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) और कॉमन कॉज ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग को भविष्य के सभी चुनावों में आंकड़ों की विसंगतियों की जांच के लिए पुख्ता प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.


 एडीआर ने अपने विशेषज्ञों की टीम के शोध आंकड़ों को हवाला देते हुए कहा है कि 2019 में संपन्न हुए चुनावों में विभिन्न सीटों पर मतदाताओं की संख्या और मत फीसद और गिनती किए गए मतों की संख्या के बारे में आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों मे गंभीर विसंगतियां हैं.



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याचिका में दावा किया गया है कि उनके शोध के दौरान अनेक विसंगतियों का पता चला. याचिका में कहा गया है कि ये विसंगतियां एक मत से लेकर 1,01,323 मतों की हैं. जो कुल मतों का 10.49 फीसद है. याचिका के अनुसार छह सीटों पर मतों की विसंगतियां चुनाव में जीत के अंतर से ज्यादा थी. 


याचिका में किसी भी चुनाव के नतीजों की घोषणा से पहले आंकड़ों का सही तरीके से मिलान करने और इस साल के लोकसभा चुनावों के फार्म 17सी, 20, 21सी, 21डी और 21ई की सूचना के साथ ही सारे भावी चुनावों की ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्वाचन आयोग को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.


याचिकाओं में कहा गया है कि चुनावों की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि चुनाव के नतीजे एकदम सही हों क्योंकि संसदीय चुनावों में किसी प्रकार की विसंगतियों को संतोषजनक तरीके से सुलझाए बगैर दरकिनार नहीं किया जा सकता. याचिका के अनुसार निर्वाचन आयोग ने मतों के मिलान और चुनावी आंकड़ों के प्रकाशन के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनाई है.

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