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चुनाव आयोग ने फिर अलापा पुराना राग

Published On :    13 Feb 2020   By : MN Staff
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इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ संभव नहींः मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा



नई दिल्ली : सभी तथ्य और सबूतों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के ईवीएम विरोधी फैसले के बाद भी चुनाव आयोग वहीं पुराना राग अलापे आ रहा है कि ईवीएम से छड़ेछाड़ संभव नहीं है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ की गुंजाइश से इनकार करते हुए कहा है कि मतदान के लिए मतपत्र की ओर लौटने की अब कोई गुंजाइश नहीं है. 


अरोड़ा ने बुधवार को एक सम्मेलन में कहा कि जिस प्रकार से किसी कार या पेन का दुरुपयोग किया जा सकता है उसी तरह ईवीएम का भी दुरुपयोग किया जाना तो संभव है. लेकिन, इसमें छेड़छाड़ कर कोई गड़बड़ी नहीं की जा सकती है.


यदि अरोड़ा के बयानों पर गौर किया जाय तो अरोड़ा एक तरफ कह रहे हैं कि कार या पेन की तरह ईवीएम का दुरूपयोग तो किया जा सकता है. लेकिन, वहीं दूसरी तरफ यह भी कह रहे हैं कि ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है. अब यह कैसे संभव है कि जिसका दुरूपयोग हो सकता है और उसमें छेड़छाड़ संभव नहीं है? जबकि, असल में जिसका दुरूपयोग हो सकता है तो निश्चित तौर पर उसमें छेड़डछाड़ भी किया जा सकता है. यह बात खुद ईवीएम बनाने वाली कंपनियों ने स्वीकार किया है.


अरोड़ा ने आगे कहा कि ईवीएम का इस्तेमाल पिछले 20 सालों से किया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य अदालतें ईवीएम को मतदान के लिए सही ठहरा चुकी हैं. ऐसे में ईवीएम के बजाय मतपत्र की ओर लौटने का सवाल ही नहीं उठता है. जबकि, अरोड़ा सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर सफेद झूठ बोल रहे हैं. क्योंकि, 08 अक्टूबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश जारी करते हुए कहा सख्ती से कहा था कि ईवीएम में बगैर वीवीपीएटी मशीन लगाए निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से चुनाव नहीं हो सकता है. 


इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि वीवीपीएटी से निकलने वाली कगजी मतपत्रों की 100 प्रतिशत गिनती होनी चाहिए. अब सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा आदेश क्यों दिया था? क्योंकि, जब तक वीवीपीएटी से निकलने वाली कागजी मतपत्रों की गिनती होगी तब तक ईवीएम में घोटाला होता रहेगा. सुप्रीम कोर्ट का ईवीएम पर रत्तीभर भी विश्वास नहीं है. लेकिन, चुनाव आयोग बार-बार ईवीएम की वकालत करते आ रहा है. जबकि, चुनाव आयोग को बीजेपी, कांग्रेस और मीडिया भरपूर साथ दे रही है.


लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने से जुड़े एक सवाल के जवाब में अरोड़ा ने कहा कि इस बारे में राजनीतिक दलों की सहमति से सरकार को फैसला करना है. फैसले को आयोग लागू कर सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि आयोग किसी स्थान के मतदाता को किसी अन्य स्थान से मतदान करने की सुविधा को भी मुहैया कराए जाने की परियोजना पर काम कर रहा है. 



यह भी पढ़े : 2015 में हनीमून पीरियड में थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : सुब्रमण्यम स्वामी 



अरोड़ा ने उदाहरण देकर बताया कि इस व्यवस्था के तहत अगर राजस्थान का कोई मतदाता चेन्नई में कार्यरत है तो वह राजस्थान में चुनाव होने पर चेन्नई से ही मतदान कर सकेगा. इस परियोजना पर आयोग के विशेषज्ञ आइआइटी मद्रास के साथ मिल कर काम कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं होगा कि लोग घर बैठे ही मतदान कर सकेंगे, बल्कि दूरस्थ मतदान के लिए मतदाता को मतदान केंद्र पर जाना होगा. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मौजूदा कानून में बदलाव की जरूरत होगी.

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