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दादा लड़े थे गोरों से, हम लड़ेंगे चोरों से!

Published On :    16 Feb 2020   By : MN Staff
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लखनऊ के घंटाघर पर सीएए की खिलाफत का एक महीना पूरा



लखनऊ: सूबे की राजधानी लखनऊ के घंटाघर पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ शुरु हुए प्रदर्शन रविवार को एक महीना पूरा हो गया. जनवरी महीने की 17 तारीख को चंद घरेलू महिलाओं ने इसे शुरु किया था. 15-20 की संख्या में घरेलू महिलाएं लखनऊ में हुई तीन दिनों की बरसात के बाद अचानक घंटाघर पहुंचकर वहां विरोध प्रदर्शन करने बैठ गई थीं. तब शायद ही किसी को मालूम था कि आन्दोलन का आकार इतना बड़ा हो जायेगा. इस आन्दोलन के एक महीना पूरा होने पर दिनभर घंटाघर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है.


हालंकि किसी भी आंदोलन के विस्तार के लिए जरूरी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों का उत्साह बना रहे. इसलिए लोग नारे देते हैं. ‘‘ये देश हमारा आपका, नहीं किसी के बाप का, घंटाघर से उठी आवाज, नहीं चलेगा गुण्डाराज, दादा लड़े थे गोरों से, हम लड़ेंगे चोरों से, घण्टाघर ने ललकारा है कागज नहीं दिखाना है’’ आदि नारे पूरे दिन घंटाघर पर गूंजते रहते हैं.


बताया जा रहा है कि दिल्ली के शाहीनबाग में सीएए के खिलाफ शुरु हुए प्रदर्शन को लेकर लखनऊ के कैसरबाग में प्रदर्शन होना था. मशहूर शायर मुन्नौवर राणा की बेटी सुमैया दावा करती हैं कि उन लोगों ने सीएए के विरोध के लिए 14 जनवरी से लखनऊ के कैसरबाग में आन्दोलन पर सभी बैठने वाले थे. कैसरबाग इसलिए क्योंकि तब ये आन्दोलन फेमस हो चुके शाहीनबाग जैसा ही लगता. क्योंकि  दोनों इलाके में ‘बाग’ शब्द जो जुड़ा है. लेकिन, तभी बरसात शुरु हो गयी. 16 तक बरसात चली और 17 की सुबह उनके दल से पहले ही कुछ महिलाओं ने घंटाघर पर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया.


किसने जलाई घंटाघर पर सीएए के खिलाफ प्रदर्शन की चिंगारी

बता दें कि घंटाघर पर चल रहे जिस आंदोलन में अब सैकड़ों की भीड़ रहती है उसे महज चार-पांच महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ 17 जनवरी को शुरु किया था. इसमें मुख्य किरदार कौसर का हैं जो अपने तीन बच्चों और कुछ भतीजे-भतीजियों के साथ घंटाघर दोपहर 2 बजे पहुंच गयी थी. 16 जनवरी की रात उन्होंने अपने बच्चों से सीएए की खिलाफत के बैनर बनवाये. अगली सुबह कुछ परिचित महिलाओं रूखसाना ज़िया और नसरीन जावेद को भी साथ बुला लिया. इस तरह लगभग 20 महिलाओं और बच्चों के साथ ये प्रदर्शन शुरु हुआ. कौसर ने बताया कि उन्हें देशभर में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन को देखकर ये पीड़ा हुई कि अपने लखनऊ में ऐसा प्रदर्शन क्यों नहीं हो रहा है. इसीलिए उन्होंने बिना किसी बड़ी तैयारी अपने बच्चों के साथ घंटाघर पर आ बैठीं.


इस आंदोलन को लेकर आंदोलनकारियों पर तीन अलग-अलग मुकदमें दर्ज हो चुके हैं. जिसमें शायर मुन्नवर राणा की दोनों बेटियों शुमैया और फौजिया भी नामजद हैं. इनके साथ पूजा, शबी फातिमा, रूखसाना जिया और नसरीन जावेद समेत 25 महिलाओं पर मुकदमा दर्ज हुआ. दूसरी एफआईआर सरकारी कार्य में बाधा डालने की हुई जिसमें सुमैया, शबी फातिमा और रूखसाना जिया को नामजद किया गया है. तीसरी एफआईआर रिहाई मंच के कई पदाधिकारियों पर हुई. इसमें मो. शुएब, राजीव यादव, उज्मा, समेत 25 लोग नामजद हैं.

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