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संकट के कटघरे में सरकार

Published On :    17 Feb 2020   By : MN Staff
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बजट-2020-21 को लेकर एक तरफ जहां बीजेपी सरकार उछल-कूद मचा रही है तो वहीं दूसरी तरफ मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य ने ‘बजट’ को निराशाजनक बताकर सरकार को संकट के कटघरे में खड़ा कर दिया है.



नई दिल्ली : बजट-2020-21 को लेकर एक तरफ जहां बीजेपी सरकार उछल-कूद मचा रही है तो वहीं दूसरी तरफ मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य ने ‘बजट’ को निराशाजनक बताकर सरकार को संकट के कटघरे में खड़ा कर दिया है. हालांकि, यह दावा कोई और करता तो माना जा सकता है कि ये सब विपक्ष की चाल है. लेकिन, खुद पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य ने सरकार पर निशाना साधा है.


गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की सदस्य आशिमा गोयल ने इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट फॉर डेवलपमेंट रिसर्च के एक कार्यक्रम के दौरान इस बार के 1 फरवरी 2020 को पेश किए गए बजट को निराशाजनक बताकर सरकार पर मुसिबत खड़ा कर दिया है. 


आशिमा ने दावा करते हुए यह भी कहा है कि अबकी बार के इस बजट में दूरदर्शिता की कमी झलक रही है. ईएसी-पीएम की अंशकालिक सदस्य आशिमा गोयल ने कहा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट भाषण में ‘स्लोडाउन’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना बहुत चौंकाने वाला है.


उन्होंने कहा कि यह विकास के लिए राजस्व प्रोत्साहन और खर्च के लिए जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने वाला दस्तावेज है. लोग आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंतित हैं, भारत कि वृद्धि दर पांच फीसदी के निचले स्तर पर है. तब भी बजट 2020 के दौरान आर्थिक सुस्ती से निपटने के उपायों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई.


आशिमा के अनुसार, राजकोषीय घाटे को लेकर ढील और आयकर को सरल बनाने संबंधी सुधार बेहतर हैं. लेकिन, तब भी दूरदर्शिता के अभाव के कारण बजट निराशाजनक है. गोयल ने कहा कि बजट पेश करते वक्त वित्त मंत्री ऐसी विरोधाभासी स्थिति में थीं जहां किसी न किसी को तो नाखुश होना ही था. बजट के सकारात्मक पक्ष पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री अपने फैसलों की वजह से संतुलन स्थापित करने में कामयाब रही हैं. राजकोषीय घाटे के मामले में 0.5 फीसदी की ढील वाले प्रावधान की वजह से संसाधनों में महत्वपूर्ण वृद्धि की संभावना है.



यह भी पढ़े : सरकार ने 53 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का लिया फैसला




साथ ही उन्होंने साल 2008-09 की मंदी के दौरान अर्थव्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों को इस बार के बजट में शामिल नहीं किए जाने के फैसले की भी तारीफ की. 2008-09 में राजकोषीय घाटा चार फीसदी से ऊपर था और वृद्धि दर के लिए ब्याज दरें निचले स्तर तक कम कर दी गईं थी. कार्यक्रम के दौरान आशिमा गोयल ने बजट के लक्ष्यों का मुद्दा उठाया और कहा कि सब्सिडी के मॉडल पर फिर से विचार करने की जरूरत है. खाद्य सब्सिडी पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि लोगों के उपभोग की आदतें अब काफी बदल चुकी हैं. यह इस बात का पूख्ता सबूत है कि बजट 2020 में केवल ‘अच्छे दिन का सपना’ दिखाया गया है.

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