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हिंदू महासभा ने केन्द्र सरकार से किया आग्रह

Published On :    17 Feb 2020   By : MN Staff
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कहा-सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को गोली मार दो



नई दिल्ली :  आज देश में संविधान लागू नहीं होता तो शायद विदेशी ब्राह्मण देश में आग लगा देते और सभी भारतीयों को एक साथ आग में झोंककर उनकी नृसंह हत्या कर देते. हालांकि, शासक जाति के लोग संविधान लागू होने के बाद भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. 


यही कारण विदेशी ब्राह्मण संविधान को खत्म कर मनुस्मृति लागू करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. ताकि, शासक जाति के लोग भारत के मूलनिवासियों का सामुहिक नरसंहार कर सकें. इसलिए ब्राह्मणों ने पहले से ही संघ परिवार के लोगों से मूलनिवासी बहुजनों के ऊपर जानलेवा हमला करवा रहे हैं.


हैरान करने वाली बात यह भी है किसी भी लोकतांत्रिक देश की सरकारें जनता की रक्षा करती है. मगर दुर्भाग्य है कि भारत की सरकार खुद जनता को मार रही है. 


इसलिए संघ परिवार के लोग सरकार से अपील कर रही है कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को गोली मार दे. गौरतलब है कि हिंदू महासभा ने सरकार से आग्रह किया है कि सीएए का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी जाए. साथ ही महासभा ने यह भी कहा कि राजद्रोह के लिए नसीरुद्दीन शाह और काफील खान जैसे लोगों को फांसी पर लटका दिया जाए.


टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू महासभा ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह आतंकवादियों से प्रभावित हैं. हिंदू महासभा के प्रवक्ता अशोक पांडेय ने ये बातें कही है. 



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हिंदू महसभा शुरू से ही सीएए, एनपीआर और एनआरसी का विरोध करने वालों के खिलाफ आक्रामक रूख अपनाए हुए है. हिंदू महासभा ने सरकार से यह भी मांग की थी कि सीएए का विरोध करने वालों को पुलिस गोली मार दे ताकि इन लोगों (सीएए विरोधियों) की सुरक्षा और इनके प्रदर्शन स्थल की सुरक्षा पर टैक्सपेयर्स का पैसा न खर्च हो.


बता दें कि सीएए और एनआरसी को लेकर देश में कहीं विरोध-प्रदर्शन हो रहा है तो कहीं इसके समर्थन में रैलियां निकाली जा रही है. दिल्ली के शाहीनबाग, लखनऊ के घंटाघर, पटना के सब्जीबाग, मुंबई में मुंबई बाग जैसी जगहों पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. वहीं हिंदूवादी संगठनों ने इसके समर्थन में रैलियां निकाली है.


पिछले महीने हिंदू महासभा के प्रमुख चक्रपाणी ने कहा था, अंग्रेजों के अविभाजित भारत से चले जाने के बाद पाकिस्तान ने एक इस्लामिक राष्ट्र बनाना चुना, लेकिन भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना. इस वजह से सीएए आवश्यक हो गया. अगर, धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र नहीं बनने की जगह हिंदू राष्ट्र चुना होता तो आज सीएए की जरूरत नहीं होती. 


असल में देश में चंद मुट्ठि भर शासक जाति के लोग मूलनिवासी बहुजनां पर इसलिए राज कर रहे हैं क्योंकि मूलनिवासी बहुजन समाज एकजुट नहीं है. जिस दिन एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्य समुदाय के मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन एकजुट हो जायेंगे उसी दिन भारत से ब्राह्मणों का पतन हो जायेगा. हालांकि, बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा इसमें काफी हद तक कामयाब हो रहा है. जैसे-जैसे लोगों में जागृति आ रही है वैसे-वैसे लोग बामसेफ के आंदोलन में शामिल हो रहे हैं. 

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