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चंदे को लेकर संकट में राम भक्त

Published On :    23 Feb 2020   By : MN Staff
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राम भक्तों की परेशानी मंदिर के पक्ष में फैसला हो जाने के बाद भी कम होने का नाम नहीं ले रही है. बल्कि फैसले के बाद भक्तां की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है. भक्तों के परेशान होने के कई करण है. इसमें सबसे अहम कारण यह है कि रामलला नाबालिग हैं, उनका आधार नंबर भी नहीं है.



अयोध्या (साकेत) । राम भक्तों की परेशानी मंदिर के पक्ष में फैसला हो जाने के बाद भी कम होने का नाम नहीं ले रही है. बल्कि फैसले के बाद भक्तां की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है. भक्तों के परेशान होने के कई करण है. इसमें सबसे अहम कारण यह है कि रामलला नाबालिग हैं, उनका आधार नंबर भी नहीं है. इसलिए उनका बैंक में खाता भी नहीं खुल रहा है. ऐसे में अयोध्या (साकेत नगर) राम मंदिर निर्माण के लिए चंदे के रूप में मिले 70 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को कहां रखा जाय? इस बात को लेकर भक्त ज्यादा परेशान होते नजर आ रहे हैं.


भक्तों का दावा है कि ट्रस्ट राम मंदिर निर्माण के लिए न तो किसी से चंदा मांगेगा न ही कोई सरकारी मदद लेगा. मंहत के इस बयान के बाद बहस छिड़ गयी है कि चंदा भले न लिया जाए, लेकिन दान भी तो चंदे का ही रूप हुआ. जबकि, हकीकत ठीक उसके उलट है. क्योकि सिर्फ रामलला के नाम पर ही चेक आ रहे हैं. 


रामलला के नाम पर ही गुप्तदान भी मिल रहा है. लेकिन, रामलला के नाम का कोई बैंक एकाउंट न होने की वजह से चेक या प्राप्त राशि का उपयोग कैसे किया जाए यह तय नहीं हो पा रहा है. दूसरे चंदे या दान की रसीद न मिलने पर आयकर में भी छूट का लाभ भी नहीं मिल पाएगा. 


दान के लिए जब रसीद नहीं मिलेगी तो कोई भी व्यक्ति सही या गलत तरीके से कमाई गयी राशि दान कर सकता है. अब सवाल यह है कि ट्रस्ट ने दावा किया है कि वह किसी से चंदा या सरकारी धन नहीं लेगा. लेकिन, गुप्त दान भी तो चंदा का ही रूप है, फिर ट्रस्ट गुप्त दान, चेक क्यों अपने पास रख रहा है?


बता दें कि रामलला के पास आधार कार्ड नहीं है, इस वजह से उन्हें नुकसान हो रहा है. रामलला के मंदिर मे जमा पैसे की एफडी नहीं हो पा रही. क्योंकि, कुछ चेक भी ऐसे हैं जिनपर सिर्फ रामलला लिखा है. अब इन्हें किस बैंक में जमा किया जाए इसको लेकर भक्तों पर संकट खड़ा हो गया है. दरअसल, फिक्स डिपॉजिट करने के नए नियम के मुताबिक फिक्स डिपोजिट कराने वाले का आधार कार्ड होना चाहिए और रामलला के पास आधार कार्ड नहीं है. जब तक आधार कार्ड नहीं होगा तब तक बैंक में खाता भी नहीं खुल सकता है.


यह भी बता दें कि ट्रस्ट के नाम से तकरीबन 70 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है. जिसमें अकेले राम जन्मभूमि न्यास की संपत्ति की कीमत ही 55 करोड़ से ज्यादा है. राम जन्मभूमि की चढ़ावे की रकम के रिसीवर अयोध्या के जिलाधिकारी (डीएम) हैं. न्यास के खाते में 11.5 करोड़ रुपये बैंक में जमा हैं. जिसमें आठ करोड़ रुपये से अधिक की रकम एफडी में जमा है. 



यह भी पढे : नमस्ते ट्रम्प : ट्रम्प पर 100 करोड़ खर्च, किसके खाते में? 



न्यास के पास राम जन्मभूमि क्षेत्र में 5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीन है. अनधिकृत सूचना के मुताबिक राम जन्मभूमि न्यास के पास अपने कॉर्पस फंड में करीब 8.5 करोड़ रुपए हैं और नॉन कॉर्पस फंड में लगभग 4.5 करोड़ रुपए है. न्यास को वित्त वर्ष 2018-19 में तकरीबन 45 लाख रुपए का चंदा मिला था वहीं इससे पिछले वर्ष इस संस्था को चंदे में लगभग 1.5 करोड़ रुपए मिले थे.

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