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अब यूपी में सरकारी कर्मचारी नहीं कर पाएंगे हड़ताल

Published On :    23 May 2020   By : MN Staff
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योगी सरकार ने लगाया एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट



लखनऊ : लॉकडाउन के बीच यूपी की योगी सरकार ने सूबे में एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट (ईएसएमए) कानून लागू कर सरकारी कर्मचारियों के ऊपर होने वाले अन्याय के खिलाफ उठने वाली आवाज को पूर्णतया दबा दिया है. अब सरकार आसानी से सरकारी कर्मचारियों के ऊपर अन्याय या उनके खिलाफ कोई भी कानून पास कर सकती है. इस कानून के लागू होते ही सरकारी कर्मचारी न तो सरकार विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं और न ही आंदोलन कर सकते हैं. लेकिन, सरकार बता रही है कि सरकारी कामों को सुचारू तरीके से चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट (ईएसएमए) कानून लागू किया है.


सूत्रों के अनुसार, सरकार ने 6 महीने तक सभी विभागों और निगमों में हड़ताल पर रोक लगाने के लिए ईएसएमए कानून लागू किया है. वरिष्ठ अधिकारी मुकुल सिंघल ने 22 मई को जानकारी दी कि, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से अनुमति लेने के बाद ईएसएमए कानून लागू किया गया है और इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई है. वहीं, यूपी सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के डीए किस्त को भी रोक दिया है. यही नहीं, केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, यूपी सरकार ने पिछले महीने अपने 16 लाख कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाने का फैसला किया था. ये 1 जनवरी 2020 से लागू हुआ था. लेकिन अब राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2020 से 1 जनवरी 2021 तक दिये जाने वाले डीए की किस्तों का भुगतान नहीं करने का फैसला लिया है.



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बता दें कि ईएसएमए कानून के तहत पुलिस को अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ्तार करने का अधिकार देता है. ईएसएमए के तहत, पोस्ट और टेलीग्राफ, रेलवे, हवाई अड्डे और बंदरगाह जैसे आवश्यक सेवाओं के कर्मचारियों को हड़ताल और छुट्टी पर जाने से रोक दिया जाता है. 


मालूम हो कि राज्यपाल के राजपत्र में जारी अधिसूचना की तरीख से 6 महीने तक के लिए ईएसएमए लागू किया जा सकता है. इस कानून का उल्लंघन करने पर एक वर्ष तक जेल का प्रावधान है या एक हजार का जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों ही सजा दी जा सकती है. अगर कोई एक व्यक्ति भी हड़ताल के लिए उकसाता है तो इस कानून के तहत अवैध माना जाता है. असल में ईएसएमए, भारतीय संसद से पारित अधिनियम है, जिसे 1968 में लागू किया गया था. संकट की घड़ी में कर्मचारियों के हड़ताल को रोकने के लिए यह कानून बनाया गया था.



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इसी तरह से योगी सरकार ने श्रम कानून संशोधन बिल पास कर उसे तीन साल तक स्थगित कर दिया था. श्रम कानून स्थगित होने से श्रमिकों को कंपनियों का बंधुआ मजदूर बनाया जा सकता है और श्रमिक इसके खिलाफ आवाज भी नहीं उठा सकते हैं. इसलिए योगी सरकार ने श्रम कानून को स्थगित किया था.

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