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चीन से होने वाले आयात-निर्यात में भारतीय कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें

Published On :    28 Jun 2020   By : MN Staff
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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण चीनी सामानों को भारतीय बंदरगाहों पर गहन जांच का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इस बीच भारतीय निर्यातकों ने भी वहां जाने वाले शिपमेंट को लेकर ऐसी ही शिकायतें करनी शुरू कर दी हैं.



नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण चीनी सामानों को भारतीय बंदरगाहों पर गहन जांच का सामना करना पड़ रहा है लेकिन इस बीच भारतीय निर्यातकों ने भी वहां जाने वाले शिपमेंट को लेकर ऐसी ही शिकायतें करनी शुरू कर दी हैं. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को लिखे एक हालिया पत्र में भारतीय निर्यात संगठनों के संघ (एफआईईओ- फिओ) ने कहा है कि हांगकांग और चीनी सीमा शुल्क विभाग पिछले कुछ दिनों से भारत से निर्यात किए गए शिपमेंट रोक ले रहे हैं.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फिओ के अनुसार, चीन माल भेजने वाले कुछ निर्यातकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मामले की जानकारी रखने वाले एक निर्यातक ने कहा कि चीन और हांगकांग में अधिकतर शिपमेंट को मंजूरी नहीं मिल पा रही है जिसमें जैविक रसायन भी शामिल हैं. भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी गतिरोध के बीच यह सूचना आई है. 


संघ ने कहा, सीमा शुल्क विभाग चीन से सभी आयातों की भौतिक रूप से जांच कर रहा है, जिससे निकासी में देरी हो रही है और इससे आयात की लागत में बढ़ोतरी हो रही है. हमें बताया गया है कि ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है, लेकिन कई अखबारों की खबरों में जांच की बात सामने आई है. पत्र में कहा गया, कुछ विशेषज्ञों ने बताया है कि इस कार्रवाइयों के जवाब में हांगकांग और चीन के सीमा शुल्क विभाग भारत से जाने वाले माल को रोक रहे हैं.



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संघ ने मंत्रालय ने अनुरोध किया है कि भारत के बंदरगाहों पर देरी से दी जा रही मंजूरी के मामले को वह केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के साथ उठाए और अगर यहां के सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है तो उसका खंडन जारी करे. इस मामले से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े सरकारी सूत्रों ने बताया कि इसे लेकर कोई औपचारिक आदेश नहीं है, लेकिन भारतीय सीमा शुल्क प्राधिकरण चीन से आने वाली हर उस शिपमेंट का विशेष निरीक्षण कर रहा है, जो किसी भी हवाईअड्डे या बंदरगाह पर पहुंच रहे हैं. 


उन्होंने कहा कि अधिकारी दस्तावेज, माल और मूल्यांकन की जांच कर रहे हैं. उन्होंने कहा, चीन से कंटेनरों को स्वीकार करने या न करने के बारे में कोई आदेश (मौखिक या लिखित) सीमा शुल्क या सीबीआईसी द्वारा किसी भी बंदरगाह को जारी नहीं किए गए हैं. यदि कुछ मामलों में कंटेनरों को रोका जाता है, तो वह खुफिया जानकारी के कारण होता है. यह जोखिम के आकलन के आधार पर होने वाला नियमित कदम है.



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सूत्रों ने आगे कहा कि हालांकि माल के वास्तविक तौर पर निरीक्षण के कारण निकासी में देरी होती है, लेकिन मौजूदा स्थिति में सीमा शुल्क अधिकारियों को अन्य खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय में काम करना होगा. इससे अलग भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक ई-कॉन्फ्रेंस में सीबीआईसी चेयरमैन एम. अजीत कुमार ने कहा कि विभाग मंजूरी देने में लगने वाले समय को कम करने का प्रयास कर रहा है ताकि दामों में कमी आ सके और अंतरराष्ट्रीय बाजार में माल प्रतिस्पर्धा कर सकें. 


इस मामले की जानकारी रखने वाले एक निर्यातक ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, इसे प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी, लेकिन यहां के निर्यातकों कुछ शिपमेंट को वहां के बंदरगाहों पर रोका जा रहा है. वहीं, इस बारे में कपड़ा निर्यातकों के संगठन एईपीसी ने सरकार से चीन से आयातित शिपमेंट को शीघ्रता से मंजूरी दिलाने के मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.



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बता दें कि भारत के कुल आयात का लगभग 14 प्रतिशत चीन से आता है. अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 के बीच, भारत ने चीन से 62.4 डॉलर का माल आयात किया, जबकि पड़ोसी देश को इस दौरान 15.5 अरब डॉलर का ही निर्यात किया गया. चीन से आयात किए जाने वाले मुख्य सामानों में घड़ियां, संगीत वाद्ययंत्र, खिलौने, खेल के सामान, फर्नीचर, गद्दे, प्लास्टिक, विद्युत उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रसायन, लोहा और इस्पात की वस्तुएं, उर्वरक, खनिज ईंधन व धातुएं शामिल हैं.

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