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वामन मेश्राम ने जलाया भारतीय पुरात्व विभाग का कानून

Published On :    1 Jul 2020   By : MN Staff
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भारतीय पुरातत्व विभाग का ध्यान आकर्षित करने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए कानून को जला रहे हैं : वामन मेश्राम



पुणे : साकेत (आयोध्या) में समतलीकरण के दौरान मिले बौद्ध अवशेषों से यह साफ पता चलता है कि वहां पर बौद्ध विहार था, जिसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को उस जगह को अपने संज्ञान में लेकर समतलीकरण का काम रोकना चाहिए था. उसके बाद उसकी पूरी जांच करनी चाहिए थी, पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तरफ से ऐसा नही किया गया. 


इसके विरोध में भारत में कई दिनों से आंदोलन हो रहा है. लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा उसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाया गया. इससे साफ पता चलता है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग केन्द्र और राज्य सरकार के इशारे पर काम कर रहा है. यह बात बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने भारतीय पुरातत्व विभाग का ध्यान आकर्षित करने और देश में कानून राज स्थापित करने के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग के कानून को जलाते हुए कही.


वामन मेश्राम ने कहा कि साकेत आंदोलन के दृष्टिकोण से 1 जुलाई 2020 को देशभर में प्रदर्शन रैलियों का आयोजन करना था. लेकिन, लॉकडाउन की वजह से यह हो नहीं पा रहा है. इसलिए हम लोगों ने दूसरा कार्यक्रम करने का निश्चय किया है. उसकी घोषणा करने के पहले मैं कुछ बातें आप सभी लोगों के सामने रखना चाहता हूं. 



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उन्होंने कहा 21 मई 2020 को अयोध्या में समतलीकरण के दौरान मिले  बौद्ध स्तूप को लॉकडाउन के बीच जेसीबी द्वारा नष्ट कर दिया गया. समतलीकरण के दौरान जो अवशेष मिले थे वे बुद्ध स्तूप थे, यह प्रथम दृष्टया में दिखाई देता है. इसमें पुरातत्व विभाग का कानून भारत में होने के बावजूद भी इस पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही पुरातत्व विभाग के द्वारा नहीं की गई, यह बहुत दुखद बात है.


वामन मेश्राम ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र में बीजेपी की सरकार होने की वजह से पुरातत्व विभाग के लोगों द्वारा ऐसी कार्रवाई नहीं हो रही है. कानून का राज पुरातत्व विभाग ने निष्क्रिय रहकर खत्म कर दिया है. ऐसी स्थिति में कानून होने के बावजूद भी अगर कानून अमल नहीं होता है तो ऐसे कानून का हम लोगों ने तीव्र निषेध करने का निर्णय लिया है. 



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तीव्र निषेध करने के लिए पुरातत्व विभाग का जो कानून है, जिसका नाम The Ancient Monuments Archaeological Aites and Remains Act 1958 (24 of 1958) as amended by the Ancient Monument and Archaeological Sites and Remains (Amendment and Validation) act. 2010( 10 of 2010) हैं. हम इस कानून को जला रहे हैं, ताकि अमल करने के लिए पुरातत्व विभाग का ध्यान आकर्षित कर सकें और कानून का राज स्थापित किया जा सके. 

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