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मार्च महीने से शिक्षकों को वेतन न देने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नॉर्थ एमसीडी को फटकारा

Published On :    2 Jul 2020   By : MN Staff
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च महीने से उत्तरी दिल्ली नगर निगम के स्कूलों के लगभग 9,000 शिक्षकों को वेतन नहीं देने के लिए नगर निगम को फटकार लगाई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि इसके लिए अकेले दिल्ली सरकार को निशाना नहीं बनाया जा सकता.



नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च महीने से उत्तरी दिल्ली नगर निगम के स्कूलों के लगभग 9,000 शिक्षकों को वेतन नहीं देने के लिए  नगर निगम को फटकार लगाई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि इसके लिए अकेले दिल्ली सरकार को निशाना नहीं बनाया जा सकता. इसमें नगर निगम को भी अपनी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी.

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमनियम प्रसाद की पीठ ने कहा, आप हमेशा दिल्ली सरकार को दोष नहीं दे सकते. आप (नॉर्थ एमसीडी) नियोक्ता हैं और दिल्ली सरकार सिर्फ प्राथमिक शिक्षा की योजना को लागू करने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है. अदालत ने नॉर्थ एमसीडी के वकील एचएस फुल्का के जवाब पर नाराजगी जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि नॉर्थ एमसीडी ने अपने सभी 9,000 शिक्षकों का वेतन फरवरी 2020 में जारी कर दिया था, लेकिन मार्च महीने का वेतन सिर्फ उन्हीं 5,400 शिक्षकों को दिया गया, जिनकी कोरोना ड्यूटी लगी थी.

फुल्का ने अदालत के समक्ष यह स्वीकार किया कि बाकी बचे 3,600 शिक्षकों का मार्च महीने का वेतन जारी नहीं किया गया और अप्रैल से जून 2020 इन तीन महीनों में नॉर्थ एमसीडी के किसी भी शिक्षक को वेतन नहीं दिया गया है. इस पर पीठ ने कहा, यह बहुत दुखद स्थिति है. शिक्षकों की दुर्दशा देखिए. आप 3,600 शिक्षकों के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं. वहीं दिल्ली सरकार के वकील अवनीश अहलावत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने साल 2020-2021 के लिए प्राथमिक शिक्षा योजना के तहत नगर निगम के शिक्षकों के वेतन आवंटन के लिए अप्रैल, मई और जून महीने के लिए 49-49 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृत धनराशि जारी की थी.



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अदालत ने कहा कि नॉर्थ एमसीडी के लिए दिल्ली सरकार ने 49.16 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है. ऐसे में शिक्षकों के मार्च 2020 महीने का वेतन जारी किया जाए. नॉर्थ एमसीडी द्वारा संचालित स्कूलों में शिक्षकों को वेतन नहीं दिए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला दिया. पीठ ने कहा कि स्पष्टता के उद्देश्य से शिक्षा विभाग और दिल्ली सरकार का शहरी विकास विभाग अलग-अलग स्टेटस रिपोर्ट दर्ज करें, जिसमें स्पष्ट हो कि वित्त वर्ष 2020-2021 के लिए नॉर्थ एमसीडी के शिक्षकों के वेतन हेतु कितनी धनराशि का भुगतान किया गया और कितना अभी बाकी है.



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अदालत ने नॉर्थ एमसीडी को भी निर्देश दिया कि वह भी एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें, जिसमें बताया गया हो कि 2020-2021 के लिए उनकी ओर से शिक्षकों के वेतन के लिए कितनी धनराशि का भुगतान करने की जरूरत है, जून 2020 की तिमाही तक कितनी धनराशि जारी की जा चुकी है और कितनी बकाया धनराशि है. मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी. बता दें कि यह याचिका नॉर्थ एमसीडी के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के संगठन अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षक संघ ने दायर की थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया.
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