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योगी सरकार में गुंडाराज, हत्याओं से दहला उत्तर प्रदेश

Published On :    4 Jul 2020   By : MN Staff
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योगी राज में लॉकडाउन में भी अपराध नहीं रहा लॉक



लखनऊ : सत्ता के चेहरे बदल गए, सत्ता के गलियारों के मोहरे बदल गए. करीब-करीब हर शहर, जिला और कस्बा के पुलिस अफसर बदल दिए गए. चौकी बदली, थाने बदले, जिले बदले, अफसर बदले अफसरों के अफसर बदल गए. बस नहीं बदली तो सिर्फ यूपी में जुर्म की तस्वीर और यूपी की तकदीर. हर दिन बलात्कार और हत्या की घटनाएं यूपी में जंगलराज की गवाही दे रही हैं. यहां तक की लॉकडाउन में भी अपराध लॉक नहीं रहा. 


योगी ने दो महीने में ही यूपी से अपराध और अफराधियों के सफाए का दम भर रहे थे. जबकि उनके ही राज में जुर्म ने पिछले कई सालों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं. खुद योगी जी ने अलग-अलग मंच से गुंडों को सीधे ललकारा. कभी दो महीने तो कभी चार महीने में यूपी से जुर्म और मुजरिमों का सफाया कर देने के दावे किए. पर नतीजा क्या निकला? कभी मुजफ्फरनगर, तो कभी सहारनपुर, कभी बरेली तो कभी मथुरा, कभी लखनऊ तो कभी इलाहाबाद, कभी प्रतापगढ़ तो कभी बागपत और अब कानपुर. 


आए दिन हत्या, बलात्कार और अन्य घटनाओं से समूचा उत्तर प्रदेश दहल उठा है. अभी तक तो यूपी में केवल महिलाएं व बच्चियां ही असुरक्षित थीं. लेकिन, अब पुसिल प्रशासन भी असुरक्षित दिखाई देने लगा है. इस बात का ताजा उदाहरण यूपी के कानपुर में उस वक्त देखने को मिला जब आतंकी विकास दुबे ने सीओ सहित 8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया.



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खतरे में कानून के रखवाले
जहां खुद कानून के रखवालों की जान खतरे में हो, वहां भला कानून के रखवाले लोगों की हिफ़ाजत कैसे कर सकते हैं? यूपी की हालत इन दिनों कुछ ऐसी ही है. हाल के दिनों में यहां पुलिसवालों की पिटाई, उनपर जान लेवा हमलों की वारदातें इतनी ज्यादा बढ़ गई हैं कि बस पूछिए मत. अब तो बेखौफ अपराधी पुलिस की हत्याएं भी करने लगे हैं. सूबे में कानून बेचारगी की आबो-हवा के बीच उखड़ती सांसों को संभाल कर किसी तरह ज़िंदा रहने की जद्दोजेहद करता दिखता है. सरकार सत्ता के बोलवचन में सस्ती हरकतें करती नजर आती है और विपक्षी नेता सत्ता से दूर रहने की छटपटाहट के बीच मुद्दों को भी व्यापार बनाने पर तुले हैं. और इन सबके बीच फंसे हैं यूपी की आम जनता.

योगी राज में बढ़ा जुर्म का ग्राफ
यूपी में जब से संघ समर्थित योगी की सरकार बनी है तब से यूपी में मानों अपराध की बाढ़ आ गई है. और तो और केन्द्र से लेकर बीजेपी शासित राज्य सरकारें ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’’ का नारा देकर सत्ता में कदम रखी थी. लेकिन, बीजेपी के सत्ता में आते ही यूपी में हर दिन 8 बेटियों को हवस का शिकार बनाया जा रहा है. पिछले साल का आंकड़ा कहता है कि भारत ही भारतीय महिलाओं के लिए सबसे असुरिक्षत देश बन गया है. 2018 में जारी नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 15 मिनट में एक महिला के साथ बलात्कार होता है, हर 22 मिनट पर एक सामुहिक बलात्कार होता है और हर 35 मिनट पर एक बच्ची को हवस का शिकार बनाया जाता है. बलात्कार होने वाली महिलाओं में छोटी जातियां और कमजोर वर्ग की महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है.



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अगर यूपी में हत्या की बात करें तो 03 जुलाई 2020 को कानपुर में आतंकी विकास दुबे ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए. जबकि, 3 जुलाई को ही महज एक दिन में 15 हत्याएं हुई, जिसमें कानपुर में 8, प्रयागराज में 4, हमीरपुर में 1 और गाजियाबाद में 2 हत्याएं की गई. 


यही नहीं ठीक इसी तरह से महज दो दिन में यानी 13 और 14 मई के बीच बागपत में युवक की गोली मारकर हत्या, नोएडा के एक फ्लैट में महिला शव मिला, अमरोहा में छात्रा से रेप हुआ, बुलंदशहर में एक जगह एसएसबी जवान और दूसरी जगह महिला की संदिग्ध मौत, आगरा में नाबालिक का रेप फिर हत्या, शाहजहांपुर में भाले से महिला की हत्या, हरदोई में युवक की हत्या, झांसी में महिला की हत्या, बांदा में चौकीदार के बेटे की हत्या, सुल्तानपुर में युवक की हत्या, प्रतापगढ़ में युवक की गोली मारकर हत्या, कौशांबी में नाबालिक से दुष्कर्म, प्रयागराज में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या, मिर्जापुर में महिला की हत्या, गाजीपुर में बुजुर्ग की हत्या, बलिया में युवक की चाकू से हत्या और कुशीनगर में एक किशोरी की हत्या और जमीन के विवाद में बुजुर्ग की हत्या कर दी गई. 


इस तरह से कुल मिलाकर दो दिन में 19 हत्या की घटनाओं को अंजाम दिया गया. इसके अलावा 17 से 28 मई यानी 12 दिन में अलग-अलग जगहों पर ताबड़तोड़ 7 कत्लेआम भी हो चुके हैं. यह घटनाएं यही नहीं रूकी है, बल्कि जून में भी चरम पर रही. 1 जून से 27 जून तक यानी 27 दिन में अलग-अलग जगहों पर 39 मर्डर की घटनाएं सामने आई थी, जिसमें आगरा, मथुरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा और कासगंज जिला शामिल है.

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