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जनता के साथ विश्वासघात, निजीकरण का नतीजा...

Published On :    1 Aug 2020   By : MN Staff
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निजी ट्रेनों का किराया जितना चाहें उतना रख सकते हैं ऑपरेटर्स, सरकार का कोई दखल नहीं, रेलवे ने किया साफ



नई दिल्ली : ईवीएम घोटाले से चुनकर आने वाली नाजायज सरकार, नाजायज फैसले करने से कोई परहेज नहीं कर रही है. ईवीएम मशीन से चुनाव कराने का ही नतीजा है कि सरकार देश का सौदेबाजी कर रही है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि केन्द्र की संघ संचालित बीजेपी सरकार ने पहले रेलवे को घाटे का सौदा बनाया फिर सुधार के नाम पर रेलवे को निजी हाथों में बेच दिया और अब निजी कंपनियों को मनमाना किराया बढ़ाने की छूट दे रही है.


इस तरह से बीजेपी सरकार जनता के साथ विश्वासघात कर रही है. असल में सरकार अच्छी तरह से जानती है कि जनता के द्वारा चुनी गई सरकार नहीं है, ईवीएम में घोटाला करके सरकार बनाई गई है. इसलिए सरकार को न तो जनता की चिंता है और न ही जनता का डर ही है. इसलिए सरकार धीरे-धीरे राष्ट्रीय संपत्ति बेचकर देश को खोखला बना रही है.


गौरतलब है कि भारतीय रेलवे ने साफ कर दिया है कि प्राइवेट ऑपरेटर्स के लिए यात्री ट्रेनों का अधिकतम किराया तय करने की सीमा नहीं रखी गई है, वे चाहे जितना किराया बढ़ा सकते हैं. इसके साथ ही प्राइवेट ऑपरेटर्स को किराया तय करने के लिए किसी भी न तो अथॉरिटी की मंजूरी की जरुरत है और न ही इसमें सरकार का को कोई दखल ही है. 


इसका मतलब ये है कि प्राइवेट ऑपरेटर्स जो ट्रेन चलाएँगे, वो उनका किराया अपनी मर्जी से बाजार के हिसाब से तय कर सकेंगे. जबकि किसानों के फसल की कीमत तय करने का अधिकार किसान को नहीं है सरकार के पास है. वहीं दूसरी ओर कंपनियों के प्रोडक्ट की कीमत तय करने अधिकार सरकार के पास नहीं है, निजी कंपनियों के पास है. इस तरह से किसानों के फसल की कीमत तय करने का अधिकार सरकार को किसानों को दे देनी चाहिए. क्या सरकार ऐसा करेगी? सरकार कभी भी ऐसा नहीं करेगी, क्योंकि सभी पार्टियाँ पूँजीपतियों के पैसों से चुनाव लड़ती हैं और सरकार में आने के बाद  निजी कंपनियों को पूरी तरह से छूट दे देती हैं.



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बता दें कि रेलवे 109 रूट्स पर 151 निजी ट्रेनों का संचालन 35 साल के लिए निजी ऑपरेटर्स को देने की योजना बना चुकी है. यही नहीं रेलवे ट्रैक जनता के पैसों (टैक्स) से सरकार बनायेगी और रखरखाव भी सरकार ही करेगी. निजी कंपनियां बने बनाए ट्रैकों पर केवल अपना ट्रेनें चलाएंगी. हाल ही में प्राइवेट ऑपरेटर्स के भावी बोलीदाताओं ने कुछ सवाल उठाए थे, जिन पर रेलवे ने शुक्रवार को जवाब देते हुए कहा कि प्राइवेट ऑपरेटर्स बाजार मूल्य के हिसाब से किराया वसूल सकेंग, इसके लिए उनको पूरी आजादी है. इसके लिए किसी अप्रूवल की जरुरत नहीं है और न ही इसमें सरकार किसी प्रकार का दखल दे सकती है.


इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात है कि इस प्रावधान को कोर्ट में चुनौती ना दी जा सके इसके लिए सरकार जल्द ही इसे कैबिनेट से मंजूरी दिला सकती है. हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि रेलवे एक्ट के तहत सिर्फ केन्द्र सरकार या विभिन्न मंत्रालय मिलकर रेलवे के किराए का निर्धारण करेंगे. असल में ये केवल कहने की बात है कि सिर्फ केन्द्र सरकार या विभिन्न मंत्रालय मिलकर रेलवे के किराए का निर्धारण करेंगे. असलियत ये है कि जनता इसका विरोध ना कर सके, इसलिए जनता को भ्रमित करने के लिए ऐसा कहा जा रहा है. अगर केन्द्र सरकार या विभिन्न मंत्रालयों को मिलकर रेलवे के किराए का निर्धारण करना होता तो निजी ऑपरेटर को किराया बढ़ाने का अधिकार क्यों दिया जाता? कुल मिलाकर सरकार जनता के आक्रोश को दबाना चाहती है.



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यह भी बता दें कि सरकार की मंशा से साफ जाहिर होता है कि सरकार देश को बेचने का पूरा खाका खींच चुकी है. सरकार धीरे-धीरे सभी कंपनियों, स्कूल, कॉलेजों, रेलवे, बैंक, एयरपोर्ट आदि को निजी हाथों में बेच देगी और निजी कपंनियों को किराया से लेकर मूल्य तक निर्धारित करने का अधिकार भी निजी कपंनियों दे देगी, जैसा रेलवे में दी जा चुकी है. यह पूरे दावे के साथ कहा जा सकता है कि सरकार जनता के ऊपर अन्याय, अत्याचार कर रही है.


किसानों की जबरन जमीन छिनने का अभियान
भारत में बुलेट ट्रेनें के लिए जमीन अधिग्रहण पर जल्द शुरू होगा काम : नितिन गड़करी

बुलेट ट्रेन के नाम पर किसानों की जमीनों को छीनकर निजी कंपनियों को कौड़ियों के भाव में बेचने वाली मोदी सरकार किसानों की हत्या कर रही है. सरकार की नीतियों से ही तंग आकर किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं. सरकार किसानों की फसल का न तो उचित दाम दे रही है और न ही सस्ते में खाद, बीज, बिजली, पानी उपलब्ध करा रही है. इके इसके बाद भी सरकार किसानों की जबरन जमीन हड़प रही है. अभी तक सरकार ने बजट में किसानों को कर्ज के अलावा दिया क्या है? यह बात किसानों को अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए.



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बता दें कि देश में बुलेट ट्रेन का नेटवर्क बढ़ने के नाम पर भारतीय रेलवे ने हाई स्पीड बुलेट ट्रेनों के लिए सात नए रूट्स की पहचान की है. इसके लिए जल्द ही रेलवे और भारतीय राष्ट्रीय हाईवे अथॉरिटी (एनएचएआई) मिलकर जमीन अधिग्रहण का काम शुरू करने वाले हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई मंत्रियों की बैठक में जमीन अधिग्रहण का काम शुरू करने का फैसला लिया गया है. इसके लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है. देश की जनता को बेवकूफ बनाने के लिए सरकार बता रही है कि ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर पर 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है. वहीं सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर पर ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है. इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने एनएचएआई को पत्र लिख कर इन सात हाई स्पीड कॉरिडोर को लेकर विस्तृत विवरण दिया है. इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है, इसपर तेजी से काम हो सके इसके लिए एनएचएआई को एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा गया है.



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बता दें कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन पर जोर-शोर से काम चल रहा है. अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलने वाली इस ट्रेन के दिसंबर 2023 में शुरू होने की संभावना है. भारत में जापान की मदद से बुलेट ट्रेन शुरू होने वाली हैं. परन्तु, सबसे बड़ा सवाल है कि क्या बुलेट ट्रेन में गरीब, आम जनता भी सफर कर सकते हैं? कभी नहीं. क्योंकि, यह तो तय है कि बुलेट ट्रेन का भी किराया सरकार नहीं, निजी कंपनियां तय करेंगी और किराया इतना ज्यादा निर्धारित कर दिया जायेगा, जिससे गरीबों को बुलेट ट्रेन में सफर करना सपना हो जायेगा. बुलेट ट्रेनों में केवल अमीर ही सफर कर सकते हैं. गरीब, आम जनता के लिए तो साधारण ट्रेनें पहले से चल रही हैं. इससे साबित होता है कि सरकार बुलेट ट्रेन के नाम पर किसानों की जबरन जमीन छिनने का अभियान चला रही है.

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