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केवल घोषणाबाजी करने में आगे बीजेपी सरकार

Published On :    12 Aug 2020   By : MN Staff
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छह साल बाद भी 8111 घोषणाओं में सिर्फ 4398 हुईं पूरी, मनोहरलाल खट्टर सरकार का जारी रिपोर्ट कार्ड



चंडीगढ़ : चुनाव में जनता को लुभाने के लिए राजनीतिक पार्टियां घोषणाएं तो कर देती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन घोषणाओं को पूरा करने में 5 साल का कार्यकाल बड़ी आसानी से खत्म हो जाता है. फिर अगले चुनाव में उन्हीं घोषणाओं के दम पर पार्टियां चुनाव लड़ती हैं. क्योंकि उनके पास दूसरा कोई मुद्दा नहीं रहता है. यानी राजनीतिक पर्टियां केवल घोषणाबाजी करने में ही 5 साल बीता देतीं हैं. 


मजेदार बात तो यह भी है कि इन घोषणाओं में ज्यादातर घोषणाएं केवल जुमले होते हैं. इन घोषणाओं से न तो जनता को रत्तीभर फायदा होता है और न ही राज्य का कोई विकास होता है. इन पार्टियों में कांग्रेस, बीजेपी सहित ब्राह्मणों की अन्य पार्टियां शामिल हैं. कुछ ऐसा हरियणा में देखने को मिला है जहां मनोहर लाल खट्टर सत्ता में आने से पहले हजारों घोषणाएं की थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन हजारों घोषणाओं में गिनचुन कर घोषणाएं ही लागू हुई हैं.


गौरतलब है कि साल 2014 में संघ कार्यकर्ता से सीधे सीएम बने मनोहरलाल खट्टर का एक रिपोर्ट कार्ड आया है. मुख्यमंत्री ने खुद अपनी घोषणाओं से संबंधित मामलों की समीक्षा की. इसमें पता चला कि 315 घोषणाएं तो बिल्कुल व्यवहारिक ही नहीं थीं. 


मुख्यमंत्री घोषणाओं के मॉनिटरिंग एवं क्रियान्वयन अधिकारी टीसी गुप्ता ने बताया कि 2014-20 के बीच कुल 8111 मुख्यमंत्री घोषणाएं हुई थीं, जिनमें से 4398 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं. 2388 पर कार्य प्रगति पर है. जबकि 1032 घोषणाएं अभी लंबित हैं. गुप्ता ने बताया कि कृषि विभाग से संबंधित 95 प्रतिशत घोषणाएं पूरी हुई हैं. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 93 प्रतिशत व स्वास्थ्य विभाग की 77.7 प्रतिशत पूरी हुई हैं. स्कूल शिक्षा, परिवहन, बिजली, लोक निर्माण, विकास एवं पंचायत, शहरी स्थानीय निकाय से जुड़ी घोषणाओं के काम को भी समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा.



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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री की घोषणाओं की व्यवहार्यता संबंधी जानकारी तुरंत दें. ऐसी घोषणाओं की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही निविदाएं आमंत्रित की जाएं और इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाए. सीएम ने स्पष्ट किया कि घोषणा के बाद जब योजनाओं का काम शुरू हो जाता है, तो प्रशासनिक सचिव फील्ड में जाकर कार्य प्रगति की समीक्षा करें. इस बारे स्थानीय जन प्रतिनिधियों को भी सूचित किया जाए.


मनोहरलाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग तथा रेलवे से जुड़ी परियोजनाओं को इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं में शामिल किया है, इसलिए नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत इनके लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है. जिन परियोजनाओं के लिए 70 प्रतिशत भूमि उपलब्ध हो जाती है, वहां पर भूमि का अधिग्रहण किया जाए और शेष 30 प्रतिशत उसके आसपास अधिग्रहित की जाए ताकि इसे भविष्य में निजी भूमि से बदला जा सके. इसका मुख्य लक्ष्य इन्फ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाओं को पूरा करवाना है.



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बता दें कि सरकार ने जिन हजारों घोषणाओं में गिनचुनकर घोषणाओं को लागू किया है उनमें भी अधिकतर जनहित विरोधी है. जैसे में भूमि अधिग्रहण. इसके तहत सरकार किसानों की जबरन जमीनें छीन रही हैं और इसी को विकास का नारा दे रही हैं.

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