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रक्षा उत्पादों को निजी कंपनियों को सौंपना होगा खतरनाक साबित

Published On :    12 Aug 2020   By : MN Staff
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एआईडीईएफ की चेतावनी



नई दिल्ली : रक्षा उत्पादों को निजी हाथों में सौप ने सरकारी फैसले का ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन ने विरोध करते हुए रक्षा उत्पादों को निजी हाथों में न सौंप ने की मांग की हैं. साथ ही फेडरेशन चेतावनी देते हुए कहा की रक्षा उत्पादों को निजी कंपनियों को सौंपना खतरनाक साबित होगा. इस मामले में रक्षा मंत्री को एक पत्र भेजा गया हैं. 


फेडरेशन का कहना हैं की जो रक्षा उत्पाद आयात किया जा रहा हैं उसका उत्पादन देश की 41 आर्डनेंस फैक्ट्रियों में ही कराया जाना चाहिए. फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक ने बताया है कि गत 9 अगस्त 2020 को रक्षा मंत्री द्वारा 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक लगाई गई है. आयात पर रोक लगाए गए रक्षा उत्पादों में लगभग 21 ऐसे उत्पाद पाए गए हैं, जो कि देशभर में फैली हुई 41 ऑडनेंस फैक्ट्रीयों द्वारा पहले से ही बनाए जा रहे हैं, फिर भी उन का आयात किया जा रहा था.


पत्र में विभिन्न उत्पाद जैसे कि ऐसे स्नस््रक्कष्ठस् एम्युनिशन, स्नाइपर राइफल, धनुष, सारंग, अल्ट्रा लाइट होविटजसर, बुलेट प्रूफ जैकेट बैलेस्टिक हेलमेट, प्रहरी, तारपीडो लांचर, विभिन्न प्रकार के चार्ज, विभिन्न प्रकार के बम, पैराशूट, राइफल अपग्रेड सिस्टम, ऑटोमेटिक चार्ज, ट्रैक्टर, एलएमजी असाल्ट राइफल, सेल्फ प्रोपेल्ड गन, पिनाका इत्यादि तथा जिन ऑडनेंस फैक्ट्री में इनका उत्पादन होता है, उनकी सूची भी सौंपी गई है.


फेडरेशन ने कहा हैं की मेक इन इंडिया के नाम पर निजी कंपनियों द्वारा विदेशों से स्पेयर पार्ट के नाम पर पुर्जे मंगाए जाते हैं और उनकी असेंबलिंग करके उत्पाद तैयार किया जाता है. रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की प्रैक्टिस ना केवल खतरनाक बल्कि देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ साबित होगी. देश की सुरक्षा के मद्देनजर, सिर्फ मुनाफा कमाने की सोच रखने वाली निजी कंपनियों के हाथों में संवेदनशील रक्षा उत्पादन को नहीं सौंपा जाना चाहिए.



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फेडरेशन द्वारा सरकार से यह मांग की गई है कि यह सभी उत्पाद निजी क्षेत्रों को उत्पादन हेतु नहीं सौंपे जाने चाहिए क्योंकि लगभग 340 कंपनियों के रक्षा उत्पादन लाइसेंस जारी किए गए हैं, परंतु किसी भी कंपनी द्वारा रक्षा उत्पादन की शुरुआत नहीं की गई है. इज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर सरकार द्वारा इन निजी कंपनियों को जिस तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं, उसे देखकर यह लगता है कि सरकार निजी कंपनियों पर बहुत ही ज्यादा मेहरबान है, जबकि निजी रक्षा उत्पादन कंपनियां अभी तक अस्तित्व में ही नहीं आ पाई है.


यह भी देखा गया है कि सरकार द्वारा रिलायंस डिफेंस जैसी कंपनियों को जमीनें दी गई हैं, जिसमें डिफेंस कांप्लेक्स बनाए जाने हैं, यहां पर यह देखना चाहिए कि इनमें से कितनी कंपनियों ने अभी तक अपनी उत्पादन इकाई प्रारंभ की है. फेडरेशन यह समझने में असमर्थ है कि ऑडनेंस फैक्ट्रीयों की संपूर्ण क्षमता का उपयोग न करके निजी क्षेत्रों को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है.



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ऑल इंडिया डिफेंस फेडरेशन रोक लगाई गई आयात सूची के उत्पादों के उत्पादन के लिए ओएफबी, डीआरडीओ, डीपीएसयू सेना के संयुक्त प्रयास का प्रस्ताव प्रस्तुत करता है. रक्षा क्षेत्र की सभी शासकीय इकाइयां एक साथ रक्षा उत्पादन में आपसी सहयोग, जवाबदेही, समय सीमा के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करें. हमें पूरा विश्वास है कि रक्षा उत्पादन की सभी शासकीय इकाइयां रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में पूर्णतः सक्षम है. रक्षा क्षेत्र की इकाइयों में छुपी हुई तकनीकी योग्यता और क्षमता को पहचान कर उपयोग में लाने की आवश्यकता है. फेडरेशन को पूरा विश्वास है कि यदि रक्षा मंत्री इस प्रस्ताव को कार्यान्वित करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत होगा.

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