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इम्पा की प्रथम राष्ट्रीय वर्चुअल मीटिंग सफलता पूर्वक सम्पन्न

Published On :    13 Aug 2020   By : MN Staff
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डॉक्टर, समयाभाव के बावजूद भी आंदोलन में रीढ़ की भूमिका अदा कर सकते हैं-वामन मेश्राम



पुणे : इंडियन मेडिकल प्रोफेशनल एसोसिएशन (इम्पा) की प्रथम राष्ट्रीय वर्चुअल मीटिंग बुधवार, 12 जुलाई, 2020 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। यह वर्चुअल मीटिंग करीब सवा घंटे तक तक चली। मीटिंग की प्रस्तावना रखते हुए इम्पा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मगन ससाने ने कहा कि ब्राह्मणों का बुद्धिजीवी वर्ग अपनी बौद्धिक क्षमता का उपयोग और प्रयोग सदियों से हमारे मूलनिवासी बहुजन समाज को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक गुलाम बनाए रखने के लिए करते आ रहा है। इसीलिए डॉ. बाबसाहब अम्बेडकर कहते थे ‘‘ ब्राह्मणों ने अपनी विद्वता का उपयोग इस देश के करोड़ों लोगों को मूर्ख, अज्ञानी और गुलाम बनाए रखने के लिए करते हैं।


डॉ. ससाने ने आगे कहा कि समाज में डॉक्टर को हाईली मेरिटोरियस माना जाता है। इसलिए मेरिटोरियस लोगों को मेरिटोरियस वर्क करना चाहिए। अर्थात समाज का लीडरशिप करना चाहिए। क्योंकि समाज का लीडरशिप करना दुनिया में सर्वाधिक जटिल और मेरिट का कार्य माना गया है। शायद इसीलिए डॉ.बाबासाहब अम्बेडकर कहा करते थे कि जिस समाज में 10 डॉक्टर, 20 इंजीनियर और 30 वकील पैदा हो जाएं तो उस समाज की तरफ कोई बुरी नजर से देखने की साहस नहीं कर सकता है। इसका मतलब है कि डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर जानते थे कि बौद्धिकता का जवाब बौद्धिकता से ही दिया जा सकता है। इसीलिए डॉ.बाबसाहब ने समाज के बुद्धिजीवी वर्ग से समाज का नेतृत्व करने की अपेक्षा की थी।


डॉ.ससाने ने आगे कहा कि ईवीएम के माध्यम से हमारे वोटों की डकैती करके भारत की सŸा पर काबिज ब्राह्मण एनएमसी (नेशनल मेडिकल कौंसिल) जैसे कानून बनाकर हमारे समाज में जहां डॉक्टर बनने से रोकने की साजिश कर रहे हैं, वहीं अब सीएए, एनआरसी और एनपीआर जैसे कानून के माध्यम से मूलनिवासियों की नागरिकता समाप्त कर अपने ही देश में विदेशी घोषित करके गुलाम बनाए रखने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समाज के डॉक्टर्स में वह बौद्धिक क्षमता है कि वह समाज का लीडरशिप करके समाज को ब्राह्मणों की गुलामी से न केवल आजाद करा सकते हैं बल्कि मूलनिवासी महापुरूषों के सपनों का भारत बना सकते हैं।



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इम्पा संरक्षक एवं बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. वामन मेश्राम ने मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्तमान में हमारा देश और समाज बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। इस नाजुक दौर से देश और समाज को मुक्त कराने के लिए फुले-शाहू-अम्बेडकरी आंदोलन को पुनर्जीवित कर राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन करना ही एक मात्र विकल्प है। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूँ कि डॉक्टर्स के पास समयाभाव होता है। बावजूद इसके डॉक्टर आंदोलन में रीढ़ की भूमिका अदा कर सकते हैं। डॉक्टर्स को आवाहन करते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि, आज की तारीख में हमारे समाज में लाखों डॉक्टर हैं, लेकिन पूरे देश में प्रत्येक तहसील में सिर्फ एक डॉक्टर यानी 5000 तहसील में 5000 डॉक्टर ही तैयार हो जाएं और एक फुलटाईमर निर्माण कर उसके खर्चे की जिम्मेदारी उठालें, भले ही समय न दें तो भी देश में 5000 फुलटाईमर निर्माण हो जायेंगे और आंदोलन को जन-आंदोलन में रूपांतरित करने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।



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मा. वामन मेश्राम ने आंदोलन को जन-आंदोलन में रूपांतरित करने के लिए जन समर्थन हासिल करने के लिए इम्पा से जुड़े डॉक्टर्स से प्रत्येक सप्ताह गाँवों में मेडिकल कैम्प का आयोजन करने पर भी जोर दिया। साथ ही स्वयं की मीडिया का निर्माण करने और सोशल मीडिया से अधिकतम लोगों को जोड़ने पर जोर दिया। आंदेलन को सफल बनाने के लिए बुद्धि, पैसा, हुनर, समय और श्रम का निवेश करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि साधन और संसाधन के अभाव में किसी बड़े उदे्श्य की कल्पना तो की जा सकती है, लेकिन सफल नहीं किया जा सकता है।


मीटिंग का संचालन डॉ. राजेश कुमार (राष्ट्रीय महासचिव, इम्पा, नई दिल्ली) ने की और डॉ.जे.जी. परमार (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इम्पा, नई दिल्ली) ने मीटिंग से जुड़े सभी डॉक्टर्स का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मीटिंग के समापन की घोषणा की। मीटिंग से प्रमुख रूप से डॉ. पी.एन.पी. पाल, डॉ. नन्दलाल, डॉ. बसंत कुमार, डॉ. सतपाल, डॉ. अवतार सिंह, डॉ. भरत बिलवाल, डॉ. विशन मान, डॉ. विवेक कुमार जिलोवा, डॉ. आर. एस. मरकाम, डॉ. इकबाल अहमद, डॉ. चरन सिंह आदि करीब 120 डॉक्टर जुड़े रहे।

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