×

अब 1951 से पहले निवास करने वालों को माना जाएगा असम का नागरिक

Published On :    13 Aug 2020   By : MN Staff
साझा करें:

गृह मंत्रालय की कमिटी की रिपोर्ट हुई सार्वजनिक



गुवहाटी : असम में नागरिकता को लेकर तैयार किए गए असम समझौते की धारा 6 को लागू करवाने के लिए बनाई गई गृह मंत्रालय की कमेटी की रिपोर्ट चार सदस्यों ने सार्वजनिक कर दी. इसमें गृह मंत्रालय ने कहा हैं की असमिया लोगों की पहचान 1951 को कट-ऑफ साल माना जाना चाहिए. 14 सदस्यीय कमेटी ने इसी वर्ष फरवरी में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. अब कमेटी के चार सदस्यों ने इसे सार्वजनिक कर दी. यदि यह धारा लागू की जाती हैं तो राज्य में 1951 पहले रह रहे लोगों को असम का नागरिक माना जाएगा.

समझौते की धारा 6 को लागू करवाने वाली कमेटी के जिन लोगों ने रिपोर्ट जारी की है, उनमें 4 में से तीन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के कार्यकर्ता हैं. चौथे शख्स निलय दत्ता हैं, जो कि अरुणाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि असम अकॉर्ड के क्लॉज -6 को लागू करवाने के लिए असमिया लोगों की परिभाषा में स्वदेशी जनवादी, असम के अन्य स्थानीय समुदायों और 1 जनवरी 1951 से पहले असम में रह रहे भारत के लोगों को शामिल करना चाहिए.

मंगलवार को जारी एक बयान में असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रिपोर्ट के बाहर आने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार असम समझोते की हर धारा को लागू करवाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पिछली किसी भी सरकार ने इस लागू करवाने के लिए कमेटी का गठन नहीं किया था.

1985 के समझौते के तहत 24 मार्च 1971 को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (एनआरसी) के लिए कटऑफ तारीख रखी गई. यानी इस तारीख से पहले असम में रहने वाले लोग ही असमिया नागरिक माने गए हैं. हालांकि, अकॉर्ड में यह नहीं बताया गया है कि कौन लोग एनआरसी से सुरक्षित होंगे. असम अकॉर्ड के क्लॉज -6 के मुताबिक, असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान को सुरक्षित और सर्वनिक्षित रखने के लिए सभी तरह के संवैधानिक, विधाय और प्रशासनिक सुरक्षा दी जाएगी.



यह भी पढ़े : भारत में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद को तैयार संयुक्त राष्ट्र


क्लॉज -6 लागू करवाने से जुड़ी रिपोर्ट इसी साल फरवरी में केंद्र सरकार को दी गई थी. इसमें असमिया लोगों के लिए कई तरह के रिजर्वेशन का ऐलान किया गया है. विशेष रूप से लोकसभा में असम से आने वाली सीटों के 80-100 प्रति शेयर पर असमिया लोगों का हक, विधानसभा और स्थानीय संस्थाओं में आरक्षण. इसके अलावा सरकार और केंद्रीय क्षेत्र की भर्तियों में भी 70-100 प्रति आरक्षण है.

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के लागू होने के साथ ही पिछले साल असम में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे. इस कानून में दूसरे देशों में प्रताड़ित हिंदू, इसाई सिख, बौद्ध और जैनों को भारत की नागरिकता का रास्ता साफ किया गया. ऐसे में असम में लोगों ने एक बार फिर इस कानून से अपनी पहचान पर खतरा होने का अंदेशा जताया था और सड़कों पर प्रदर्शन किए गए थे. तब सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने असम समझोते की धारा 6 को जल्द ही लागू करवाने का वादा किया था.



यह भी पढ़े : चौंका देने वाला खुलासा


अब इसे लागू करने के लिए बनाई गई गृह मंत्रालय की हाई-लेवल कमेटी ने कहा है कि असमिया लोगों की पहचान 1951 को कट-ऑफ साल तक तय करना चाहिए. समिती की रिपोर्ट सार्वजनिक होने से सरकार के मनसुबे की एक बार फीस से पोल खुल गई हैं. क्यांकि 1985 के समझौते के तहत 24 मार्च 1971 से असम में रहने वालों को असम का नागरिक माना गया. लेकिन अब इसमें बदलाव लाकर 1951 से पहले रहने वालों को असम का नागरिक माना जाएगा ऐसा गृह मंत्रालय द्वारा गठीत समितियों का कहना हैं. इससे असम की लोगों की नागरिकता का संकट और गहरा हो जाएगा और अभी असम से जो 19 लाख लोग नागरिकता की सूची से बाहार कर दिए गए उसमें और इजाफा हो जाएगा.
संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
विदेशी कर्ज के जंजाल में फँसता भारत, देश पर 101.3 लाख करोड़ का
राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति के बिना ही चल रहा भारत
डॉ. कफील खान और योगी सरकार की लड़ाई पहुंची संयुक्त राष्ट्र
देश में धड़ल्ले से हो रहा धोखाधड़ी
विपक्षी दलों द्वारा लाये गये संशोधन खारिज, सरकार ने ध्वन
राष्ट्रपति कृषि विधेयकों पर न करे हस्ताक्षर, शिरोमनी अका
चरम पर बेरोजगारी के बाद भी खाली पद नहीं भर रही सरकार
कॉलेजियम प्रणाली से जो न्यायाधीश नियुक्त हुए वे नहीं थे
लॉकडाउन में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने की सुप्री
पत्रकार राजीव शर्मा समेत चीनी महिला व साथी सात दिन की पुल
300 से कम कर्मचारियों की क्षमता के उद्योगों में कामगारों क
यूपी में एक बार फिर अल्पसंख्यकों के साथ पक्षपात
उद्धव, आदित्य ठाकरे, सुप्रिया सुले के चुनावी हलफनामों की
आखिर केंद्र सरकार ने माना, कोरोना महामारी में ट्रेनों मे
भारत की अहम जानकारी चीन को देने पर पत्रकार राजीव शर्मा गि
पानी के लिए हाहाकार
भारत को स्वास्थ्य ढांचे में लंबे समय तक निवेश जारी रखना च
लॉकडाउन के समय 31 फीसदी कम लगे टीके
आर्थिक तंगी का सामना कर रहे झारखंड को केंद्र ने दिया बिजल
विज्ञापन के जरिये पांच सालों में सोशल मीडिया पर सिर्फ एक
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper