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चीन ने लद्दाख में भारत की लगभग 38,000 वर्ग किमी भूमि पर किया कब्जा

Published On :    16 Sep 2020   By : MN Staff
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की जानकारी से पीएम मोदी की खुली पोल



नई दिल्ली : पिछले कई महिनों से लद्दाख में जारी भारत और चीन के बिच तनाव को लेकर मंगलवार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में जानकारी दी. उन्होंने सदन को एलएसी पर चल रही गतिविधियों से अवगत कराया. इस दौरान रक्षा मंत्री ने बताया की चीन ने लद्दाख में भारत की लगभग 38,000 वर्ग किमी भूमि पर कब्जा जमाया हुआ हैं. उनके इस बयान से एक बार फिर पीएम मोदी झुठे साबित हुए हैं. इसके बाद पीएम मोदी पर  एलएसी को लेकर जानकारी होने के बाद भी झूठा बयान देने के आरोप लगाए गए. अब राजनाथ सिंह के बयान से सच्चाई सामने आने पर एक बार फीर पीएम मोदी की पोल खुल गई हैं.


बता दें की 15 जून को गलवान घाटी में एलएसी पर दोनों देशों के बिच हिंसक झड़प हुई थी. जिसमें भारत के 20 जवान शहिद हुए थे. इसके बाद पीएम मोदी ने 19 जून की सर्वदलिय बैठक में बयान दिया था की ना कोई हमारे सीमा के अंदर घुसा हैं और ना कोई हमारी पोस्ट उनके कब्जे में हैं.


रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत-चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है. भारत और चीन की सीमा का प्रथागत और परंपरागत अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है. इस अलाइनमेंट की पुष्टि विभिन्न समझौतों, ऐतिहासिक प्रचलनों और प्रैक्टिसेज द्वारा हुई है. लेकिन चीन यह मानता है कि सीमा अभी भी औपचारिक रूप से निर्धारित नहीं है. चीन, भारत की लगभग 38,000 वर्ग किमी भूमि का अनाधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है. इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने 5180 वर्ग किमी की भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी. चीन अरूणाचल प्रदेश की सीमा से लगे हुए लगभग 90,000 वर्ग किमी भारतीय क्षेत्र को भी अपना बताता है.


भारत और चीन ने औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा के समाधान के लिए धैर्य की आवश्यकता है और इसका समाधान, शांतिपूर्ण बातचीत के द्वारा निकाला जाए. अंतरिम रूप से दोनों पक्ष सीमा पर शांति बहाल रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं. अभी तक दोनो देशों के सीमा क्षेत्र में सामान्य रूप से निरूपित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल नहीं है और इसे लेकर दोनों की समझ अलग-अलग है. इसलिए शांति बहाल रखने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह के समझौते और प्रोटोकॉल्स हैं.



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राजनाथ सिंह ने वर्तमान परिस्थिति से सदन को अवगत कराते हुए कहा कि अप्रैल माह से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन की सेनाओं की संख्या और उनके हथियारों में वृद्धि देखी गई. मई महीने की शुरुआत में चीन ने गलवान घाटी क्षेत्र में हमारी सेना के सामान्य, परंपरागत पैट्रोलिंग पैटर्न में व्यवधान शुरू किया, जिसके कारण तनाव स्तिथि उत्पन्न हुई. ग्राउंड कमांडर्स द्वारा इस समस्या को सुलझाने के लिए विभिन्न स्तरों पर वार्ता की जा रही थी. इसी बीच मई के मध्य में चीन द्वारा वेस्टर्न सेक्टर में कई स्थानों पर एलएसी पर अतिक्रमण करने की कोशिश की गई.



रक्षा मंत्री ने आगे बताया कि एलएसी पर टकराव बढ़ता हुआ देख दोनों तरफ के सैन्य कमांडरों ने 6 जून 2020 को मीटिंग की और इस बात पर सहमति बनी कि पारस्परिक एक्शंस द्वारा डिसइंगेजमेंट किया जाए. दोनो पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि एलएसी को माना जाएगा और कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी जिससे यथास्थिति बदले. लेकिन इस सहमति के उल्लंघन में चीन द्वारा एक हिंसक स्थिति 15 जून को गलवान में क्रिएट की गई. हमारे बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान का बलिदान दिया लेकिन साथ ही चीनी पक्ष को भी भारी क्षति पहुंचाई.



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रक्षा मंत्री ने बताया कि चीनी पक्ष के साथ समझौतों और प्रोटोकॉल्स का पालन किए जाने को लेकर बातचीत चल रही रही थी कि चीन की तरफ से 29 और 30 अगस्त की रात को उकसाने वाली सैनिक कार्रवाई की गई, जो पोगांग झिल के दक्षिण तट क्षेत्र में यथास्थिति को बदलने का प्रयास था. लेकिन एक बार फिर हमारी सशस्त्र सेनाओं के सही समय पर कड़ी प्रतिक्रिया के कारण उनके ये प्रयास सफल नहीं हुए.


उल्लिखित घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चीन की कार्रवाई से हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के प्रति उसकी उपेक्षा दिखती है. जबकि हमारी सेना इसका पूरी तरह पालन करती है. अभी की स्थिति के अनुसार चीनी ने  एलएसी और अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जवान तैनात और गोलाबारूद जमा किया हुआ है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान के बाद मोदी मोदी एक बार झूठे साबित हो रहें हैं.
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