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विदेशी लोग देश के ही मूलनिवासियों को घोषित कर रहे हैं विदेशी

Published On :    22 Sep 2020   By : MN Staff
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असम में 86 हजार से अधिक लोगों को बीते पांच वर्षों में विदेशी घोषित किया गया : केंद्र



गुवहाटी : जो भारत का रहने वाले नहीं हैं, वे विदेशी हैं. लेकिन, यही विदेशी भारत के मूलनिवासी बहुजनां को विदेशी घोषित कर रहा है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने रविवार को लोकसभा में बताया कि असम में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों का निस्तारण करने वाले न्यायाधिकरण के समक्ष ‘डाउटफुल वोटर्स’ के 83,008 मामले लंबित हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में 86,756 लोगों को विदेशी घोषित कर दिया गया है. लेकिन, रॉय ने यह नहीं बताया कि विदेशी घोषित लोगों में कितने एससी, एसटी और ओबीसी के लोग हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस तरह का न्यायाधिकरण सिर्फ असम में कार्यरत है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि वर्तमान में केवल असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (विदेशी न्यायाधिकरण) काम कर रहे हैं. असम सरकार ने बताया है कि राज्य में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के पास 83,008 ‘डाउटफुल वोटर्स’ के मामले लंबित हैं. वहीं, साल 2015 से 30 जून, 2020 तक असम में 86,756 लोग विदेशी घोषित किए गए. राय ने कहा कि अवैध प्रवासियों और विदेशी नागरिकों के संदर्भ में डिटेंशन सेंटर बनाने का निर्माण प्रदेश एवं केंद्रशासित राज्यों की ओर से जरूरत के मुताबिक किया जाता है.

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रो. सौगत रॉय ने देशभर के विभिन्न फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में डाउनफुट मतदाताओं से संबंधित लंबित मामलों की जानकारी मांगी थी. इसके अलावा पिछले पांच साल में राज्यवार कितने लोग विदेशी घोषित किए गए, इसकी जानकारी मांगी थी. 



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इसके अलावा सौगत रॉय ने देश में बनाए गए डिटेंशन सेंटर यानी हिरासत केंद्रों की संख्या बताने के साथ यहां रखे गए लोगों का आंकड़ा भी जानना चाहा था. डिटेंशन सेंटर उन अवैध घुसपैठियों और विदेशी नागरिकों को मूल देश में वापस भेजने तक डिटेन करने के लिए स्थापित किए जाते हैं, जिन्होंने सजा पूरी कर ली है.

कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने असम के हिरासत केंद्रों के विदेशी घोषित बंदियों की रिहाई के बारे में अपनी पहले की शर्तों में ढील देते हुए बीते अप्रैल महीने में निर्देश दिया था कि विदेशी घोषित किए गए उन कैदियों को रिहा किया जाए जो दो साल या इससे अधिक समय से बंद हैं. 



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वहीं वर्तमान में जारी संसद सत्र के दौरान राज्यसभा में नित्यानंद राय ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के तहत अब तक 350 लोगों को डिटेंशन सेंटर से जमानत पर रिहा किया जा चुका है. उन्होंने ये भी बताया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान (16 सितंबर 2020 तक) इन डिटेंशन सेंटर में रह रहे 15 लोगों की मौत इलाज के दौरान विभिन्न बीमारियों से हो चुकी है.

बता दें कि इससे पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बीते मार्च महीने में लोकसभा में बताया था कि असम में 3,331 लोगों को रखने की क्षमता के साथ छह डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं. तेजपुर स्थित डिटेंशन सेंटर में 797 लोग, सिलचर में 479, डिब्रुगढ़ में 680, जोरहाट में 670, कोकराझाड़ में 335 और गोआलपाड़ा में 370 लोग रखे जा सकते हैं. अगर एनआरसी की बात करें तो असम में 14 लाख से ज्यादा लोगों को सूची से बाहर किया गया है, जिसमें 9 लाख एससी, एसटी, ओबीसी और 5 लाख मुस्लिम के लोग शामिल हैं.
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