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केंद्र सरकार ने गेहू के समर्थन मूल्य में बढ़ाए सिर्फ 50 रूपये

Published On :    23 Sep 2020   By : MN Staff
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रबी फसलों के समर्थन मूल्य में 6 सालों में सबसे कम इज़ाफा



नई दिल्ली : केंद्र द्वारा कृषि से संबंधित तीन विधेयक संसद में ध्वनीमत से पारित करने के पहले से किसानों का इस बिल के खिलाफ आंदोलन जारी हैं. इस बिच सरकार ने सोमवार को गेहूं समेत 6 रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ा दिया हैं. इसके पीछे का उद्देश्य किसानों तक यह संदेश पहुंचाना है की एमएसपी आधारित खरीद प्रक्रिया जारी रहेगी. रबी फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने गेहू पर सिर्फ 50 रूपए बढाये हैं. जो  पिछले छह सालों में रबी के समर्थन मूल्य में सबसे कम हिजाफा हैं.


यही नहीं तो गेहू के समर्थन मूल्य में सिर्फ 50 रूपये बढ़े हैं. आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने रबी फसलों पर 2021-22 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 4.3 पर्सेंट की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. पिछले साल रबी फसलों के एमएसपी में औसतन 5.7 फीसदी की वृद्धि हुई थी.


इस बार रबी फसलों में सबसे ज्यादा मसूर के एमएसपी में बढ़ोतरी हुई है. इसबार मसूर पर 300 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है, जबकि चना और सरसों के एमएसपी पर 225 रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. गेहूं के एमएसपी पर 50 रूपए की मामूली बढ़ोतरी हुई है. गेहूं के एमएसपी पर पिछले साल के मुकाबले 2.6 फीसदी की वृद्धि हुई है. 2013-14 से गेहूं के एमएसपी पर हर सीजन लगभग 5 फ़ीसदी के हिसाब से बढ़ोतरी हो रही थी परंतु इस बार सिर्फ 2.6 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.



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वित्त वर्ष 2013-14 से वित्त वर्ष 2020-21 के बीच जौं और सरसों के एमएसपी पर लगभग 6 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान चने के एमएसपी पर प्रति सीजन बढ़ोतरी 7.5 फीसदी थी. जबकि पिछले 8 साल में मसूर और कुसुम के एमएसपी पर लगभग 8 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई. जबकि इसबार चने पर सिर्फ 4.6 फीसदी की वृद्धि हुई है. इन छह रबी फसलों की लागत पर औसतन रिटर्न 78 फ़ीसदी है जो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा है.


किसानों को गेहूं में औसतन लागत के ऊपर 106 फीसदी मुनाफा मिलने की उम्मीद है, जबकि सरसों में लागत के ऊपर 93 फीसदी मुनाफा मिलेगा. वहीं चना और मसूर में एमएसपी वृद्धि के बाद लागत के ऊपर 78 फ़ीसदी मुनाफा मिलेगा. जौ में औसतन लागत के ऊपर 65 फीसदी तो कुसुम में 50 फीसदी रिटर्न की उम्मीद है.



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बता दें कि एक दिन पहले ही संसद से कृषि संबंधी दो विधेयक पारित हुए हैं, जिनका विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के अंदर से भी विरोध किया जा रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि नए कानून एमएसपी आधारित सरकारी खरीद को खत्म कर सकते हैं. पंजाब, हरियाणा और देश के कुछ अन्य स्थानों पर किसान समूह भी ‘कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक-2020’ और ‘कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता व कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020’ विधेयकों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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