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कांग्रेस-बीजेपी की सरकार में किसानों की दुर्दशा, कर्ज के दलदल में किसान

Published On :    23 Sep 2020   By : MN Staff
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कर्जमाफी के बाद भी 10 राज्यों ने नहीं माफ किया किसानों का 1.12 लाख करोड़ का कर्ज



नई दिल्ली : पिछले छह सालों में कई विधानसभा चुनावों के दौरान विभिन्न पार्टियों द्वारा किसानों का कर्ज माफ करने के वादे के बाद भी 10 राज्यों ने करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ नहीं किया है. इतना ही नहीं, कर्ज माफी के बावजूद किसानों पर ऋण का भार बढ़ता ही जा रहा है और किसानों द्वारा कर्ज लेने की राशि में साल दर साल बढ़ोतरी हुई है. बीते रविवार को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों से जानकारी सामने आई है.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन नाबार्ड द्वारा इकट्ठा की गई सूचना के मुताबिक साल 2014 से लेकर अब तक 10 राज्यों एवं एक केंद्रशासित प्रदेश ने कुल 2,70,225.87 करोड़ रुपये के कृषि कर्ज को माफ करने वादा किया था. लेकिन राज्य सरकारों द्वारा वादा किए जाने के बावजूद 1,11,051.86 करोड़ रुपये के ऋण को माफ नहीं किया गया है.

महाराष्ट्र में किसानों के व्यापक विरोध के बाद देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में महाराष्ट्र सरकार ने 28 जून 2017 को छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकारी सम्मान योजना के तहत कुल 34,022 करोड़ रुपये के कृषि लोन को माफ करने का वादा किया था. लेकिन इसमें से सिर्फ 58 फीसदी का ही कर्जमाफ किया. 


इसमें भी प्रावधान था कि जिन किसानों के ऊपर 1.5 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है, तो उन्हें बाकी राशि का भुगतान करने के बाद इसका लाभ मिल पाएगा. बाद में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना गठबंधन वाली नई सरकार ने महात्मा ज्योतिराव फूले शेतकारी कर्ज मुक्ति योजना के तहत एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2019 के बीच लंबित दो लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ करने की योजना बनी थी. राज्य सरकार ने इस कार्य के लिए कुल 20,081 करोड़ रुपये का आवंटन किया, लेकिन इसमें से 17,080.59 करोड़ रुपये के ही कृषि लोन को माफ किया गया.



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मध्य प्रदेश में दिसंबर 2018 में पांच विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने वादा किया था कि यदि वे सत्ता में आते हैं तो उनकी सरकार 10 दिन के भीतर कृषि लोन माफ कर देगी. बाद में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उनकी पार्टी सत्ता में आई. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना के तहत राज्य सरकार ने कुल 36,500 करोड़ रुपये के कर्ज माफी की घोषणा की थी. लेकिन इसमें से सिर्फ 11,912 करोड़ रुपये के ही ऋण को माफ किया गया. जबकि, राजस्थान सरकार ने अलग-अलग श्रेणी के कर्जदार किसानों के लिए साल 2018 से 2019 के बीच कुल चार योजनाओं की घोषणा की और इनके तहत 18,695.72 करोड़ रुपये के कृषि लोन को माफ करने का ऐलान किया गया था. 


यानी राज्य की कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों ने अपने वादे के मुताबिक किसानों के कर्ज को माफ नहीं किया. इसी तरह से छत्तीसगढ़ में 6,230 करोड़ रुपये के अल्पकालिक ऋण को माफ करने की योजना बनाई थी. इस योजना के तहत राज्य के केवल 15.26 लाख किसानों को लाभ मिला है. जबकि बघेल से पहले रमन सिंह की अगुवाई वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने दिसंबर 2015 में किसानों के 25 फीसदी कर्ज माफी की घोषणा की थी. लेकिन, इसे उचित तरीके से लागू नहीं किया गया.

इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए अपने वादे के अनुसार साल 2017 में फसल ऋण माफी योजना की घोषणा की थी. लेकिन इसमें से सिर्फ 4,696.09 करोड़ रुपये के कृषि ऋण का माफ किया गया है. 



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अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने भी किसानों के फसल ऋण को माफ करने वादा किया था. योगी आदित्यनाथ ने 36,359 करोड़ रुपये के कृषि कर्ज को माफ करने के लिए एक योजना का ऐलान किया. लेकिन सरकार ने किसानों के 25,233.48 करोड़ रुपये के ही ऋण को माफ किया है. मजेदार बात तो यह है कि इस योजना के तहत कम से कम 4,814 किसानों के 1 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के लोन को माफ किया गया था.


साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस नेता सिद्धरमैया की अगुवाई कर्नाटक सरकार ने जून 2017 में 18,000 करोड़ रुपये के किसान ऋण माफी का ऐलान किया था. संसद में पेश किसानों के मुताबिक तत्कालीन इसमें से सिर्फ 7,794 करोड़ रुपये के ही लोन को माफ किया.  इसके अगले साल कांग्रेस ने जेडीएस के साथ गठबंधन कर एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई में नई सरकार बनाई और 44,000 करोड़ रुपये की लागत वाले नए ऋण माफी योजना की घोषणा की गई. मगर इसने भी केवल 14,754 करोड़ रुपये के ही कृषि ऋण को माफ किया. जबककि आंध्र प्रदेश 24,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफी योजना के कुल 15,622.05 करोड़ रुपये के ही कृषि कर्ज को माफ किया गया है. तेलंगाना में 17,000 करोड़ रुपये में सिर्फ 16,144.10 करोड़ माफ किया गया.

यही नहीं तमिलनाडु में मई 2016 में 5,318.73 करोड़ रुपये के कृषि लोन को माफ करने की घोषणा की थी. परन्तु, राज्य सरकार ने 4,529.54 करोड़ रुपये के ही कृषि कर्ज को माफ किया. इनके अलावा जम्मू कश्मीर ने जनवरी 2017 में घोषणा किया था कि चरणबद्ध तरीके से एक लाख रुपये तक के कृषि लोन का 50 फीसदी माफ किया जाएगा. लेकिन, इस योजना के तहत कुल 244 करोड़ रुपये के कर्ज को माफ किया गया है.

कर्ज माफी के बावजूद किसानों पर बढ़ता कर्ज
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संसद में पेश की गई जानकारी से एक और तथ्य निकलकर सामने आता है कि विभिन्न राज्यों की अलग-अलग कृषि कर्ज माफी योजना के बावजूद किसानों पर कुल कर्ज राशि बढ़ती ही जा रही है. आलम ये है कि पिछले पांच सालों (2015-20) में किसानों पर करीब 35 फीसदी कर्ज की बढ़ोतरी हुई है.

मंत्रालय के मुताबिक 31 मार्च 2015 तक किसानों पर 8,77,252.92 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो 31 मार्ज 2020 में बढ़कर 11,81,901.29 करोड़ रुपये हो गया. फिलहाल किसानों पर सबसे ज्यादा 7,28,306.29 करोड़ रुपये के कर्ज अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के हैं. इसके बाद क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के कुल 2,08,840 करोड़ रुपये के कृषि कर्ज हैं. वहीं किसानों पर राज्य एवं जिला सहकारी बैंकों के कुल 2,44,755 करोड़ रुपये के कर्ज हैं.



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आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2016 तक बैंकों द्वारा दिया गया कुल कृषि लोन 9,84,764.40 करोड़ रुपये था, जो ठीक एक साल बाद बढ़कर 10,43,586.69 करोड़ रुपये हो गया. इसके अगले साल 31 मार्च 2018 तक ये राशि और बढ़कर 11,17,459.27 करोड़ रुपये और 31 मार्च 2019 तक 11,78,581.20 करोड़ रुपये हो गई.
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