×

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार ज़्यादा पैसा खर्च करना शुरू करें

Published On :    23 Sep 2020   By : MN Staff
साझा करें:

आरबीआई के पूर्व गवर्नर की सलाह



नई दिल्ली : पहले नोटबंदी, जीएसटी और अब कोरोना महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लागू लाकडाउन के चलते आर्थिक गतविधियां ठप्प होने से देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है. इसको पटरी पर लाने के लिए पूर्व आरबीआई गवर्नर ने मोदी सरकार को सलाह दी हैं. उनका कहना हैं की यदि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना हैं तो सरकार को ज्यादा पैसा खर्च करना शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, अर्थव्यवस्था को 5-6 फीसदी की वृद्धि दर पर लौटने में 3 से 5 साल का वक़्त लगेगा. बीबीसी को ईमेल के ज़रिए दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने यह बाते कहीं.


अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में क्या-क्या चुनौतियाँ होंगी और उनके क्या समाधान हो सकते हैं? इसके जवाब में डॉ. सुब्बाराव ने कहा, सबसे बड़ी चुनौती है लोगों की नौकरियाँ बचाना और फिर से विकास शुरू करना. उन्होंने कहा, महामारी अब भी बढ़ रही है, ऐसे में अभी भी कई ख़तरे हैं. कहा नहीं जा सकता कि महामारी के प्रकोप में कब और कैसे कमी आ सकती है. इसलिए अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के पैमाने और जटिलताओं का बहुत ज़्यादा अंदाज़ा लगाना संभव नहीं है.


डॉ सुब्बाराव ने कहा, मनरेगा अभी लाइफ़लाइन बना है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि महामारी से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती की स्थिति में थी. विकास दर एक दशक में सबसे कम यानी लगभग 4.1 फीसदी पर थी. राजकोषीय घाटा अधिक था और वित्तीय क्षेत्र ख़राब ऋण की समस्या से जूझ रहा था. महामारी का प्रभाव कम होने के बाद ये समस्याएं और बड़ी हो जाएंगी.


जब उनसे पूछा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था महामारी के प्रभाव से कब तक बाहर आएगी? इस पर उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था में सकारात्मक वृद्धि अगले साल से संभव है, लेकिन इस साल के नकारात्मक आंकड़े को देखते हुए यह भी कह सकते हैं कि ये सकारात्मक वृद्धि बहुत ज़्यादा नहीं होगी. इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में लगभग एक चौथाई की गिरावट आई और कई अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि पूरे साल की ग्रोथ निगेटिव डबल डिजिट में रह सकती है.



यह भी पढ़े : प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश यात्राओं पर 517.82 करोड़ रुपये किए खर्च



डॉ सुब्बाराव का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ सकारात्मक चीज़ें पर ही काम किए जाने की ज़रूरत है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने शहरी अर्थव्यवस्था के मुक़ाबले बेहतर तरीक़े से रिकवर किया है. जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी तो मनरेगा के विस्तार की योजना ने एक लाइफलाइन दी, और महिलाओं, पेंशनभोगियों और किसानों के खातों में तुरंत पैसे डाले गए. जिससे उनके हाथ में पैसे आए और फिर से मांग पैदा करने में मदद मिली. उनका कहना है अगर उन लोगों के हाथ में पैसा दिया जाता है तो वो खर्च करेंगे जिससे आख़िरकार खपत ही बढ़ेगी. लेकिन ये लक्ष्य हासिल करने के लिए मज़बूत नीतियाँ लागू करने की ज़रूरत होगी.


वित्तीय सचिव रह चुके डी सुब्बाराव इस राय से सहमति जताते हैं कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार को पैसा खर्च करना शुरू करना चाहिए. निजी खपत, निवेश और शुद्ध निर्यात ग्रोथ के अन्य फैक्टर हैं, लेकिन फिलहाल ये सभी मुश्किल दौर में हैं. अगर सरकार इस वक़्त ज़्यादा खर्च करना शुरू नहीं करती है, तो बैड लोन जैसी तमाम समस्याओं से निपटना और मुश्किल हो जाएगा और अर्थव्यवस्था की हालत और खस्ता होती जाएगी.



यह भी पढ़े : कांग्रेस-बीजेपी की सरकार में किसानों की दुर्दशा, कर्ज के दलदल में किसान



उनके मुताबिक़ जिन क्षेत्रो में फोकस करना चाहिए उसमें सबसे पहले, आजीविका की रक्षा करनी होगी और ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा मनरेगा का विस्तार करना है जो सेल्फ-टार्गेटिंग है. दूसरा सरकार को रोज़गार बचाने और बैड लोन को बढ़ने से रोकने के लिए संकटग्रस्त उत्पादन इकाइयों की मदद करनी चाहिए. तीसरा, सरकार को बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च करना चाहिए जो नौकरियों का निर्माण करेगा. अंत में, सरकार को बैंकों में अतिरिक्त पूंजी डालनी होगी ताकि क्रेडिट फ़्लो को बढ़ाया जा सके.


उन्होंने कहा, रिसर्च फर्म, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के मुताबिक़, अगस्त में भारत की बेरोज़गारी दर नौ सप्ताह के उच्चतम स्तर यानी लगभग 9.1 फीसदी पर थी. ज़रूरत है अर्थव्यवस्था एक महीने में 10 लाख नौकरियाँ पैदा करे, लेकिन आधी भी पैदा नहीं कर रहे. पीएम मोदी 2014 में पहली बार इसी वादे के साथ जीतकर आए थे कि वो 20 की उम्र वाले उन लोगों की ज़िंदगी बदल देंगे जो नए रोज़गार की तलाश कर रहे हैं. इस वादे का पूरा नहीं होना उनकी एक नाकामी मानी जानी चाहिए.

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
बामसेफ और राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ के 37 वे वर्चुअल अधिवेश
बिहार में उपेंद्र कुशवाहा का गठबंधन बन सकता हैं किंगमेकर
सरकार की आलोचना के लिए जनता को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता
गुर्जर आरक्षण को लेकर आंदोलन तेज, करौली- भरतपुर में इंटरन
भाजपा की जनसभा मे 200 लोग भी नहीं जुटे, गुस्से में उमा भारती
प्रधानमंत्री की सभा में उडी नियमों की जमकर धज्जियाँ, खूद
रक्षा मंत्रालय ने ठुकराई सैनिको के हालात देखने लेह जाने
आरोग्य सेतु एप किसने बनाया, सरकार को नहीं पता
क्लीन चिट के बावजूद निलंबन नहीं किया जा रहा रद्द
सुशांत सिंह मामले में जी न्यूज़, इंडिया टीवी ने मांगी माफी,
भूपेश बघेल सरकार ने माफ किया टाटा पर लगा 200 करोड़ का जुर्मान
अशोका विजयादशमी पर पंजाब, हरियाणा में फुंके रावन की जगह प
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत की बढ़ी मुश्किले, हाईको
बिहार में पहले चरण के वोटिंग के दौरान कई जगह ईवीएम हुई खरा
पक्षतात के आरोप से घिरी फेसबुक की अधिकारी आंखी दास ने दिय
बामसेफ के 37वें वर्चुअल राष्ट्रीय अधिवेशन की जोरदार तैया
बिहार के मतदाताओं में बढ़ा भाजपा-जेडीयू गठबंधन के प्रति व
संघ परिवार से जुड़े दल के कार्यकर्ता ने ताजमहल परिसर में ल
प्रवासी मजदूर घर नहीं जा सकते, लेकिन देश में आ रहे अवैध हथ
बिहार में बाढ़ ने मचाया था हाहाकार, किसी दल ने नहीं बनाया च
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper