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कपिल मिश्रा के ख़लिफ़ दो शिकायतें करने पर भी अब तक कोई एफ़आईआर नहीं

Published On :    24 Sep 2020   By : MN Staff
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राजधानी दिल्ली में हुए दंगा मामले में भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ दो शिकायतें करने के बाद भी दिल्ली पुलिस उन पर अब तक कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं किया हैं. बता दें कि कपिल मिश्रा ने 23 फ़रवरी उस इलाक़े में जा कर रोड ख़ाली कराने का अल्टीमेटम दिया था.



नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में हुए दंगा मामले में भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ दो शिकायतें करने के बाद भी दिल्ली पुलिस उन पर अब तक कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं किया हैं. बता दें कि कपिल मिश्रा ने 23 फ़रवरी उस इलाक़े में जा कर रोड ख़ाली कराने का अल्टीमेटम दिया था. 


उसी दिन शाम को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के. एक तबक़े ने इस भाषण को हेट स्पीच और हिंसा भड़काने वाला बताकर कपिल मिश्रा की गिरफ़्तारी की माँग की थी. लेकिन दंगों के लगभग सात महीने बाद भी कपिल मिश्रा को लेकर हुई तमाम शिकायतों के बावजूद कपिल मिश्रा पर एक भी एफ़आईआर दिल्ली पुलिस ने दर्ज नहीं की. वहीं बीबीसी ने दावा किया हैं की उनके पास दो शिकायतों की कॉपी हैं जिनमें शिकायतकर्ताओं ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन दंगों के लगभग सात महीने के बाद भी उनपर एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है.


दरअसल यमुना विहार की ज़मी रिज़वी ने 24 फ़रवरी को एक शिकायत दिल्ली पुलिस कमिश्नर, गृह मंत्रालय, पीएमओ और दिल्ली के उप-राज्यपाल को भेजी. इसमें लिखा है- 23 फ़रवरी, 2020 को 20-25 लोगों का एक झुंड कपिल मिश्रा तुम लठ्ठ बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं जैसे नारे लगा रहा था, जिनके हाथों में बंदूक़ें, त्रिशूल, डंडे थे. इसके कुछ देर बाद कपिल मिश्रा अपने कुछ और साथियों के साथ वहां आए औरं खड़े होकर भड़काऊ भाषण देना शुरू कर दिया. रिज़वी ने 18 मार्च को कड़कड़डूमा कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाया लेकिन अब तक इस मामले में कुछ नहीं हो सका है.


रिज़वी ने शिकायत में लिखा, मिश्रा के भाषण को सुनते ही उनके साथियों ने प्रदर्शनकारियों पर पत्थरों से कर्दमपुरी में हमला कर दिया. पुलिस की मौजूदगी में मुसलमानों को देशद्रोही, मुल्ले और जातिसूचक शब्द कहे गए. गाड़ियां तोड़नी शुरू कर दी गईं. 


इन सब लोगों को कपिल मिश्रा हाथ में बंदूक़ लहरा कर कह रहा था- छोड़ना नहीं है इन सालों को आज, ऐसा सबक़ सिखाना है कि यह प्रोटेस्ट करना ही भूल जाएं. हद तो तब हो गई जब कपिल मिश्रा ने डीसीपी के सामने प्रोटेस्ट ख़त्म करने की धमकी दी. उसके बाद डीसीपी साहब ने गलियों में घूम-घूम कर लोगों को धमकाया कि हमें ऊपर से आदेश हैं कि दो दिन बाद क्षेत्र में कोई प्रोटेस्ट नहीं होना चाहिए और अगर तुमने प्रोटेस्ट ख़त्म नहीं किए तो यहां दंगे होंगे.


रिजवी का आरोप हैं की कपिल मिश्रा व उसके साथियों ने कर्दमपुरी, ज़ाफ़राबाद, मौजपुर इलाक़े में अल्पसंख्यकों को चिन्हित कर पकड़-पकड़ कर मारा है. कृपया दोषियों के साथ उचित धाराओं में एफ़आईआर करके सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जाए. ख़ास बात यह हैं की रिजवी की शिकायत अर्जी पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर का 24 फ़रवरी की तारीख़ के साथ रिसीविंग स्टैंप है. यानी 24 फ़रवरी को दिल्ली पुलिस को ये अप्लीकेशन मिल गई थी और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को इसकी जानकारी है. इतना ही नहीं इस अप्लीकेशन को गृह मंत्रालय ने भी रिसीव किया है जिसका मतलब है कि गृहमंत्रालय को भी इसकी जानकारी है.



हालांकि रिज़वी की ये शिकायत अकेली नहीं है. चांद बाग़ की रहने वाली रुबीना बानो का कहना है कि शिकायत दर्ज करने जब वह थाने गईं तो उनकी शिकायकत नहीं दर्ज की गई. इसके बाद 18 मार्च को उन्होंने मुस्तफ़ाबाद के ईदगाह पर लगाए गए दिल्ली पुलिस के शिकायत केंद्र जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई. मुस्तफ़ाबाद में ईदगाह को दंगा पीड़ितों के लिए एक शिविर में तब्दील किया गया था. आज तक इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज नहीं की है. रूबीना का आरोप है कि उन्हें और उनके परिवार को अपनी शिकायत में लिए गए नामों के कारण डराया-धमकाया जा रहा है. साथ ही उसे केस में फँसाने की धमकी भी दी जा रही है.


रूबीना बानो ने अपनी शिकायत में ये भी कहा है कि एसएचओ साहब कह रहे थे कि बिना नाम के कंप्लेंट करो, यह हम नहीं लेंगे और उल्टा मुझे केस में फँसाने की धमकी देने लगे. इस मामले में रूबीना बानो ने दिल्ली हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की है. रूबीना ने याचिका में लिखा है कि उन पर मार्च से लेकर जुलाई तक स्थानीय पुलिस ने डरा कर क़ानूनी कार्रवाई करने की धमकी देते हुए शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया. रूबीना के मुताबिक़ 25 जुलाई को उनके पति को एक शख़्स ने बंधक बनाया और उन्हें धमकाते हुए कहा कि अगर रूबीना ने शिकायत वापस नहीं ली तो उनके परिवार को परिणाम भुगतना होगा.


यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि 
23 फ़रवरी और 24 फ़रवरी की घटनाओं को लेकर कपिल मिश्रा के नाम वाली शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की है. जब की 23 फ़रवरी को कपिल मिश्रा के भाषण देने के बाद शाम को पहली हिंसा की ख़बर सामने आई थी

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