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केंद्र सरकार ने जीएसटी फंड का अन्य चिजों के लिए इस्तेमाल कर दिया राज्यों को धोका

Published On :    25 Sep 2020   By : MN Staff
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कैग की रिपोर्ट में खुलासा



नई दिल्ली : कोरोना महामारी के चलते कई राज्य आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. वे लगातार केंद्र सरकार से अपने हिस्से की जीएसटी रकम देने की मांग कर रहे हैं. लेकिन केंद्र सरकार उनकी मांग को टालने का काम कर रही हैं. इस बिच कैग की एक ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ हैं की केंद्र सरकार ने जीएसटी फंड का अन्य चिजों के लिए इस्तेमाल कर राज्य सरकारों को धोका दिया. कैग ने इसे जीएसटी कंपन्सेशन सेस एक्ट 2017 का उल्लंघन माना हैं.


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के अटॉर्नी जनरल के मत का हवाला देते हुए पिछले हफ्ते कहा था की कंसोलायडेटेड फंड ऑफ इंडिया यानी सीएफआई से जीएसटी राजस्व के नुकसान के लिए राज्यों को क्षतिपूर्ति करने के लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं था. हालांकि कैग ने पाया है कि सरकार ने खुद साल 2017-18 और 2018-19 में सीएफआई में जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस के 47,272 करोड़ रुपये को बरकरार रखते हुए कानून का उल्लंघन कर अन्य चीजों के लिए रकम का इस्तेमाल किया. इसके कारण साल के लिए राजस्व प्राप्तियों की अधिकता और राजकोषीय घाटे को कम किया गया.


कैग ने बताया, सेस कलेक्शन और जीएसटी कंपन्सेशन सेस फंड में इसके ट्रांसफर से जुड़े ऑडिट परीक्षण की जानकारी से पता चलता है कि जीएसटी कंपन्सेशन सेस फंड में कम रकम थी. क्योंकि साल 2017-18 और 2018-19 के दौरान कुल 47,272 करोड़ रुपए ही उसमें थे.


कैग ने केंद्र सरकार के खातों पर अपनी रिपोर्ट में कहा, कम रकम जमा किया जाना जीएसटी कंपन्सेशन सेस एक्ट 2017 का उल्लंघन था. इसके प्रावधानों के मुताबिक, पूरे साल के दौरान जुटाया गया सेस नॉन-लैप्लेबल फंड यानी जीएसटी कंपन्सेशन सेस फंड में जमा करना जरूरी होता है. यह जनता के खाते का एक हिस्सा होता है और यह राजस्व के नुकसान के लिए राज्यों को क्षतिपूर्ति करने के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है.



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हालांकि, जीएसटी कंपन्सेशन फंड में पूरी जीएसटी सेस की रकम ट्रांसफर करने के बजाय सरकार ने इसे सीएफआई में बनाए रखा और अन्य उद्देश्यों के लिए इसका इस्तेमाल किया. रिपोर्ट विस्तृत तौर पर बताती है, 2018-19 के दौरान फंड में 90 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का बजट प्रावधान था और राज्यों को मुआवजे के रूप में एक समान रकम का बजट रखा गया था. हालांकि, साल भर के दौरान 95,081 करोड़ रुपए जीएसटी कंपन्सेशन सेस के तौर पर इकट्ठा किए गए, पर डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू ने सिर्फ 54,275 करोड़ रुपए फंड में ट्रांसफर किए.


कैग के अनुसार, फंड से राज्यों को मुआवजे के तौर पर 69,275 करोड़ रुपये का पेमेंट हुआ. कम ट्रांसफर के कारण 35,725 करोड़ रुपे की बचत हुई और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को मुआवजे के भुगतान पर 20,725 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था.



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बता दें कि कोरोना महामारी से केंद्र सहित राज्यों की भी आर्थिक गतविधियां बंद हैं. इसके पहले राज्यों को कर द्वारा पैसा मिलता था. हालांकि केंद्र सरकार ने एक देश एक कर प्रणाली बताकर जीएसटी कानून लाया और राज्यों को मिलने वाले कर कर अधिकार छिन लिया. ऐसे में राज्य सरकारे आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं. 


राज्यों का विकास और कोरोना महामारी से निपटने के लिए उनके पास पैसों की कमी हैं. ऐसे स्थिती में राज्य सरकारे केंद्र से अपने हिस्से के जीएसटी रकम की मांग कर रहे हैं. लेकिन केंद्र सरकार उनकी मांग को अनदेखी कर रही हैं. वह इसलिए की केंद्र ने जीएसटी फंड का अन्य चिजों के लिए इस्तेमाल किया हैं. जो राज्य सरकारों के साथ एक धोकाधडी हैं.

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