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शारीरिक श्रम करने के मामलों में सवर्ण सबसे पीछे

Published On :    14 Jun 2018   By : MN Staff
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भारत में 54 प्रतिशत लोग शारीरिक श्रम से दूर-रिपोर्ट



नई दिल्ली: भारत में यूरेशियन ब्राह्मण कितने आलसी हैं इस बात का सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब इंडियन काउंसिल ऑफ रिसर्च की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में 54 प्रतिशत लोग शारीरिक श्रम करने से कतराते हैं। 


इंडियन काउंसिल ऑफ रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब 54 प्रतिशत लोग शारीरिक श्रम से दूर भागते हैं, इन मामलों में उच्च जाति के लोग सबसे आगे हैं। इनमें पुरुषों की संख्या करीब 42 प्रतिशत और महिलाओं की संख्या 58 प्रतिशत है, यानी पुरूषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा आराम पसंद हैं। 


इस सर्वे में ये पाया गया कि गांव के लोगों की तुलना में शहरों के लोग ज्यादा आलसी हैं। गांव में रहने वाले 50 प्रतिशत लोग शारीरिक मेहनत से बचना चाहते हैं, जबकि शहरों में 65 प्रतिशत लोग आलस की अंगड़ाई ले रहे हैं। 


रिपोर्ट में यहां तक दावा किया गया है कि भारत के लोग ना तो टहलना चाहते हैं और ना ही उनमें किसी भी तरह का शारीरिक श्रम करने की इच्छा ही होती है, इन मामलों में तत्सम तथा उच्च जातियों के लोग सबसे ज्यादा हैं। 


जो निचली जाति के लोग हैं वे तो दिन-रात केवल शारीरिक श्रम ही करते हैं, क्योंकि उनका पूरा जीवन ही शरीरिक श्रम करते-करते खत्म हो जाता है। यहां तक की तपती घूप, हाड़ कंपकंपा देने वादी सर्दी, तेज गड़गड़ाहट के साथ बारिश, वोलावृष्टि में भी काम करते रहते हैं। 


डॉक्टरों के मुताबिक एक स्वस्थ जीवन के लिए रोजाना कम से कम 7 हजार कदम पैदल चलना चाहिए, ऐसा करके आप मोटापे, डायबिटीज और दिल की बीमारियों से बच सकते हैं। लेकिन भारत में ऐसा हर रोज करने वाले लोग बहुत कम हैं। भारत में लोग औसतन एक दिन में 4 हजार 297 कदम चलते हैं। 


सबसे हैरानी की बात ये है कि भारत के लोगों का ये आलस जानलेवा स्थिति तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद वो अपने आलस को त्यागना नहीं चाहते। एक स्टडी के मुताबिक शारीरिक श्रम ना करने की वजह से भारत में डायबिटीज और हाइपरटेंशन से बीमार लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। 


रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आलसपन का वायरस आज से नहीं, बल्कि बहुत पुराने समय से है। यूरेशियन ब्राहमणों के आलसी होने का उल्लेख वेदों में भी मिलता है, वेदों में लिखा गया है कि आलसी व्यक्ति पर कोई दवा असर नहीं करती। 


भारत में  करीब 13 करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं, इनमें महिलाओं का संख्या पुरुषों से ज्यादा है। इसके अलावा देश में 3 करोड़ से ज्यादा लोग दिल की बीमारियों से पीड़ित हैं और करीब 7 करोड़ लोग डायबिटीज के मरीज हैं। 


दिलचस्प बात तो यह है कि जब 83 करोड़ लोग खुद गरीबी और भुखमरी का दंश झेल रहे हैं तो उनके लिए क्या मोटापा, क्या डायबिटीज होगा, कुल मिलाकर भारत में यूरेशियन ब्राहमण ही सबसे ज्यादा आलसी, मोटापा और डायबिटीज के शिकार हैं। 

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