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नई भर्ती के नाम पर युवाओं को ठेंगा

Published On :    14 Jun 2018   By : MN Staff
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रिटायर्ड कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर रखेगा रेलवे



नई दिल्ली: आज एक बार केन्द्र सरकार ने देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं को नौकरी के नाम पर ठेंगा दिखा दिया है। जहां एक तरफ केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी वाली सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को 50 साल उम्र का हवाला देते हुए जबरन रिटायर कर रही है तो वहीं दूसरी ओर 62 साल उम्र की आयु में रिटायर हो चुके कर्मचारियों को फिर से नियुक्त कर रही है। 


जबकि 2014 में मोदी की सरकार बनने के तुरन्त बाद ही बेरोजगार युवाओं के लिए घोषणा करते हुए नरेन्द्र मोदी ने हर साल 02 करोड़ नौकरियां पैदा करने का वादा दिया था, लेकिन आज रिक्त पदों को भरने और नई भर्ती करने के बजाए सरकार उन रिटायर कर्मचारियों को पुनः नियुक्त कर रही है जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो चुकी हैं।


इंडियन रेलवे (भारतीय रेलवे) अपनी विरासत को बचाए रखने के नाम पर नई भीर्त कराने के बजाए रिटायर्ड कर्मचारियों को नियुक्त करने जा रही है। इसके लिए 65 वर्ष से कम आयु के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भर्ती करने का फरमान जारी कर दिया है। 


ऐसे कर्मचारियों को मेहनताने के रूप में 1,200 रुपये प्रति दिन दिए जाने का आदेश जारी किया है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे बोर्ड ने भाप इंजन, पुराने डिब्बों, भाप से चलने वाली क्रेन, पुराने समय के सिग्नल, स्टेशन उपकरण और भाप से चलने वाले उपकरण जैसी पुरानी चीजों को संरक्षित, पुर्नस्थापित और पुनर्जीवित करने के लिए रिटायर्ड रेल कर्मियों को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 




अब सवाल यह है कि क्या नये युवा इस काम को नहीं कर सकते हैं?  कर सकते हैं, लेकिन सरकार उन युवाओं को अवसर नहीं ही नहीं देना चाहती है, केवल रोजगार के अवसर पैदा करने का भरोषा देकर युवाओं को बेवकूफ बना रही है। 


रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा उनके पास रेलवे की विरासत के रखरखाव और मरम्मत का अनुभव है, साथ ही वे नई पीढ़ी के लिए कोच के रूप में भी काम कर सकते हैं। यह काम आसान नहीं है, लेकिन एक घड़ी जो कि 150 वर्ष पुरानी है इतने वर्षों के बाद भी चल रही है। 


पुराने हाथों में वो हुनर आज भी विराजमान है। यहां पर वही सवाल खड़ा होता है कि क्या जो बैल 60 साल पहले एक किलोमीटर चलता था क्या आज भी एक किलोमीटर चल पायेगा? किसी भी मायने में यह नहीं हो सकता है, लेकिन सरकार बूढे़ हो चुके बैलों को बेहतर साबित करने में लगी हुई है।


बता दें कि जोनल प्रमुखों के साथ हाल ही में हुई बैठक में इस बारे में निर्णय किया गया है कि विरासती वस्तुओं के उचित संरक्षण और प्रदर्शन का सुनिश्चित करने की जरूरत है। बताया तो यह भी जा रहा है कि उनकी भर्ती अधिकतम 6 महीने के लिए संविदा के आधार पर होगी, साथ ही उनकी चिकित्सा स्थिति और कौशल स्तर पर विचार किया जाएगा। 


बोर्ड ने कहा कि रिटायर्ड कर्मचारियों के पारिश्रमिक को उनकी पेंशन में जोड़ने पर उनके द्वारा लिए गए अंतिम वेतन से अधिक नहीं होगा, इसके अलावा उन्हें ओवर-टाइम, यात्रा या दैनिक भत्ता भी नहीं दिया जाएगा। लेकिन बोर्ड का रवैया बता रहा है कि है कि बाद में उनको स्थायी तौर पर नियुक्त कर दिया जायेगा और नियुक्त होने वालों में उच्च एवं तत्सम जातियों के लोगों को ही शामिल किया जायेगा।

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