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बिहार में बाढ़ ने मचाया था हाहाकार, किसी दल ने नहीं बनाया चुनावी मुद्दा

Published On :    27 Oct 2020   By : MN Staff
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बिहार विधानसभा के पहले चरण के वोटिंग के लिए चुनाव प्रचार सोमवार को थम गया. इस चुनाव प्रचार के दौरान राजनैतिक पार्टियों ने प्रदेश की जनता से बड़े-बड़े वादे किए. जिनमें लोगों को रोज़गार देना, मुफ्त वैक्सीन, शिक्षा-स्वास्थ्य आदि शामिल हैं.



पटना : बिहार विधानसभा के पहले चरण के वोटिंग के लिए चुनाव प्रचार सोमवार को थम गया. इस चुनाव प्रचार के दौरान राजनैतिक पार्टियों ने प्रदेश की जनता से बड़े-बड़े वादे किए. जिनमें लोगों को रोज़गार देना, मुफ्त वैक्सीन, शिक्षा-स्वास्थ्य आदि शामिल हैं. लेकिन इस पूरे प्रचार अभियान में बिहार का सबसे बड़ा और ज्वलंत बाढ़ का मुद्दा पूरी तरह से गायब दिखा. 


किसी भी राजनैतिक पार्टी ने बाढ़ से मुक्ति या उससे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए चुनावी मुद्दा नहीं बनाया. हालांकि भाजपा ग़रीबों और किसानों का हितैशी होने का दम भरती हैं, उसने भी बाढ़ की समस्या को चुनावी मुद्दा बनाना जरूरी नहीं समझा.


बाढ़ के चलते करीब 7.54 लाख हेक्टेयर कृषि जमीन बर्बाद हुई है. बाढ़ एक प्राकृतिक समस्या है लेकिन इससे होने वाले भीषण नुकसान से बचा जा सकता है. इसके बावजूद साल दर साल सरकार की तरफ से इस दिशा में कोई प्रयास या कोशिश नहीं कि जा रही है. इसकी चलते बिहार में बाढ़ से होने वाला नुकसान साल दर साल बढता जा रहा हैं. जिसकी सबसे ज्यादा मार ग़रीबों और किसानों पर पड़ती है. बिहार में बाढ़ की समस्या के बावजूद लोगों का नदी किनारे बसना जारी है. इसके अलावा पेड़ों की तेजी से कटाई, वेटलैंड का अतिक्रमण ऐसी चीजें हैं, जो बाढ़ की समस्या को विकराल बनाती हैं, लेकिन सरकार की तरफ से इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं.



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बिहार चुनाव में भाजपा जेडीयू गठबंधन ने सत्ता में रहने के बावजूद उसने इसे चुनावी मुद्दा ना बनाकर इस मुद्दे को भुनाने का काम किया. वहीं विपक्षी दलों की और से बेरोजगारी, लॉकडाउन में प्रवासी मजदूर पलायन, अपराध, जैसे मुद्दों पर तो घेरा जा रहा है, लेकिन वह भी बाढ़ के मुद्दे पर कोई बात नहीं कर रही हैं. बिहार की समस्याओं में जनसंख्या घनत्व, शिक्षा और पलायन भी बड़ा मुद्दा है और कमोबेश अधिकतर पार्टियां इन मुद्दों पर कुछ नहीं कह रही हैं.


मालूम हो कि बिहार में बाढ़ की समस्या सबसे बड़ी समस्या है और तेजी से विकराल होती जा रही हैं. राज्य हर साल बाढ़ की समस्या से जूझता है. राज्य के 38 में 28 जिले बाढ़ प्रभावित हैं. बाढ़ से ना सिर्फ राज्य में आधारभूत विकास जैसे सड़के आदि का नुकसान होता है. बल्कि खेती और जंगलों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस साल भी बाढ़ के चलते राज्य में करीब 83 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. 



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इनमें से कई अभी भी राहत कैंपों में रह रहे हैं. इस साल बाढ़ के चलते कई लोगों की मौत हुई और यह हर साल बढता ही जा रहा है. वही इस साल बाढ़ से 7.54 लाख हेक्टेयर कृषि जमीन बर्बाद हुई है. जिससे किसानों की बडे पैमाने पर नुकसान झेलना पडेगा. बावजूद इसके सत्ता पक्ष हो या विपक्ष किसीने भी इसे चुनावी मुद्दा बनाना जरूरी नहीं समझा.

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