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इलेक्टोरल बॉन्ड से राजनैतिक दलों को मिला तीन साल में 6,493 करोड चंदा

Published On :    21 Nov 2020   By : MN Staff
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सूचना के अधिकार में खुलासा



नई दिल्ली : राजनैतिक  दलों को चुनाव लढ़ने के लिए चंदा मिले इस हिसाब से 2018 में लाए गए इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के तहत राजनैतिक दलों को महज तीन साल में 6,493 करोड रूपये का चंदा मिल चुका है. इसके साथ ही बिहार चुनाव से ठीक पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने राजनीतिक पार्टियों को फंड करने वाले 282 करोड़ रुपए के इलेक्टोरल बॉन्ड्स बेचे.


‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की ओर से सूचना के अधिकार में दायर अर्जी के जवाब में इसका खुलासा हुआ हैं. आरटीआई की जानकारी में सामने आया है कि बैंक ने 19 से 28 अक्टूबर के बिच 1 करोड़ रुपए कीमत के करीब 279 और 10 लाख रुपए के 32 इलेक्टोरल बॉन्ड्स बेचे.


डेटा के मुताबिक, एसबीआई की मुंबई स्थित मेन ब्रांच ने 14वीं शृंखला में 130 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स जारी किए, वहीं नई दिल्ली ब्रांच ने सिर्फ 11.99 करोड़ के बॉन्ड्स ही जारी किए. पटना स्थित एसबीआई ब्रांच में सिर्फ 80 लाख रुपए की कीमत के बॉन्ड्स की ही बिक्री हुई. इसके अलावा तीन शहरों में 237 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स का बेचे गए. इनमें भुवनेश्वर से 67 करोड़, चेन्नई से 80 करोड़ और हैदराबाद से 90 करोड़ के बॉन्ड्स तुड़वाए गए.



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इलेक्टोरल बॉन्ड्स खास कर राजनीतिक दलों को चंदा मिलने के लिए ही लाए गए हैं. इन्हें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 1000, 10,000, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपए के मूल्यवर्ग में जारी किया जाता है. इसे लोग अज्ञात तौर पर खरीदते हैं और राजनीतिक दलों करोडों रूपयों का चंदा देते है. इन बॉन्ड्स का फायदा सिर्फ एक योग्य राजनीतिक दल ही ले सकता है. इसके लिए बॉन्ड्स को अधिकृत बैंक के नामित अकाउंट में जमा कराना होता है. यानी जो बॉन्ड लोग बैंक से खरीद कर राजनीतिक पार्टियों को देते हैं, वह बॉन्ड राजनीतिक पार्टियां वापस बैंक को बेच देती हैं.


एसबीआई ने आरटीआई के जवाब में बताया कि 14वीं शृंखला के बॉन्ड्स की बिक्री पूरी होने के साथ ही पिछले तीन सालों में देश के बडे-बडे उद्योगपति अब तक 6493 करोड़ रुपए का चंदा राजनीतिक दलों को इसी के जरिए दे चुके हैं. पहले साल यानी 2018 में पार्टियों को इसके जरिए 1056.73 करोड़ रुपए मिले थे, 2019 में 5071.99 करोड़ रुपए और 2020 में 363.96 करोड़ रुपए.



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कॉरपोरेट सूत्रों के मुताबिक, इलेक्टोरल बॉन्ड्स के खरीदारों में मुंबई के बड़े बिजनेस हाउस भी आते हैं, क्योंकि इनके जरिए राजनीतिक दलों को गुप्त रूप से फंडिंग मुहैया कराई जा सकती है. दरअसल, इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर एसबीआई की गाइडलाइंस कहती हैं कि इसे खरीदने वालों की पहचान बैंक गुप्त रखेगा और इसका खुलासा किसी भी प्राधिकरण के सामने नहीं किया जाएगा. सिर्फ कोर्ट के आदेश और कानूनी एजेंसी द्वारा आपराधिक केस दायर करने के बाद मांग करने पर ही उनके पहचान का खुलासा हो सकता है.


बता दें कि इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए उन्हीं राजनीतिक दलों को चंदा मिल सकता है, जो रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट, 1951 के सेक्शन 29ए के अंतर्गत रजिस्टर्ड हों और पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में एक फीसदी से कम वोट न हासिल किए हों.
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