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आरएमबीकेएस के सभी साथी अधिवेशन को सफल बनाने के लिए सहयोग करें

Published On :    26 Nov 2020   By : MN Staff
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राष्ट्रीय महासचिव की अपील



पुणे : बामसेफ से जुडे संगठन राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ (आरएमबीकेएस) के राष्ट्रीय महासचिव एन बी कुरणे ने बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को कामयाब बनाने की अपील की है. उन्होंने कहा, राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं इस अधिवेशन को सफल बनाने के लिए साथ सहयोग करें.


कुरणे ने कहा, 25 से 29 दिसंबर 2020 के दौरान बामसेफ का 37 वा और भारत मुक्ति मोर्चा का 10 राष्ट्रीय अधिवेशन होने वाला है. बामसेफ के इतिहास में पहिली बार यह अधिवेशन ऑनलाइन होगा. उन्होंने बताया की बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम साहाब के फेसबुक पेज से यह इस अधिवेशन का लाईव किया जाएगा. इस अधिवेशन में कई सारे विषयों पर चर्चा होगी और इस पर चर्चा करने के लिए पूरे देशभर से और विदेश से भी कुछ विद्ववान मान्यवर आएंगे.


उन्होंने कहा, बामसेफ ने देश में 42 साल तक बहोत बड़ा जनजागरण का काम किया हैं. इसमें कई लोगों ने अपना जीवन लगाया है. इसमे बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम साहाब भी शामिल है. उन्होंने इस आंदोलन को भारत में ही नहीं बल्कि देश के बाहर भी फैलाने का काम किया.


इसका परिणाम भारत में आज जो उथलपुथल हो रही है, जैसे की ईवीएम के मुद्दे पर पूरे देश में जनजागरण किया गया. जिसके चलते आज  देशभर के लोगों को ईवीएम में गड़बड़ी के बारे में जानकारी हो गई है. इसके साथ ही ओबीसी की जातिनिहाय जनगणना का मुद्दा हो, सीएए-एनआरसी-एनपीआर का मुद्दा हो, मंडल कमिशन का मुद्दा हो, संविधान बचाने का मुद्दा हो, महिलाओं पर अत्याचार का मुद्दा हो, इन सभी मुद्दों पर बामसेफ ने पूरे देशभर में जानजागरण का काम किया हैं.



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राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, इसका परिणाम यह हुआ की देश भर के लोगों के आज बामसेफ की ही बोली बोलना पड़ रहा हैं. यह एक बहोत बड़ा आंदोलन बामसेफ के माध्यम से चल रहा है. राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ यह बामसेफ से जुड़ा संगठन है. उन्होंने कहा, मै आरएमबीकेएस के सभी पदाधिकारी और कार्यकताओं को अपील करना चाहुंगा की वह इस अधिवेशन को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर साथ सहयोग करें. 


इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा, आज कर्मचारियों के खिलाफ में बहोत बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है. हाल ही में संसद में जो तीन श्रम बील पास किए गये है, इस बील के माध्यम से शासक जाति ने हमारे महापुरूषों ने लड़ झगडकर जो अधिकार हासिल किए थे उन्हें समाप्त किया जा रहा है.


एन बी कुरणे ने कहा, इसमें नारायण मेघाजी लोखंडे, राष्ट्रपिता जोतिराव फुले, अण्णाभाउ साठे और डॉ.बाबासाहाब अम्बेडकर ने हमारे लिए जो कानून बनाए उन सभी कानून को खत्म करने का यह एक षड्यंत्र है. कर्मचारियों के अधिकार किस तरह छीने गये है, इस पर प्रकाश ड़ालते हुए उन्होंने बताया, कर्मचारियों का सबसे बड़ा हथियार ट्रेड यूनियन था. 



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उसे खत्म करने के लिए पहले जो ट्रेड यूनियन बनाने का तरिका था, वह यह था की कमसे कम सात लोगों के माध्यम से ट्रेड यूनियन बनती थी. लेकिन अब जिस कंपनी या विभाग में ट्रेड यूनियन बनानी है, पहले उनकी मंजूरी लेनी पडेगी. लेकिन वह इसे परवानगी देने वाले नहीं हैं.


उन्होंने कहा, कर्मचारियों का दुसरा सबसे बड़ा हथियार था हड़ताल करना. पहले 14 दिन का नोटिस देकर हड़ताल पर जा सकते थे, लेकिन अब 60 दिन का नोटिस देना होगा. इस दौरान उनकी नौकरी बचेगी इसकी कोई गैरंटी नहीं हैं. कर्मचारियों के लिए 8 घंटे काम करने का प्रावधान था, अब हमें 12 घंटे कंपलसरी काम करना पडेगा. 


इसके पहले जीस कंपनी में 100 कर्मचारी थे, उनको कभी भी काम से हटाया जा सकता था, इसकी सीमा बढ़कर अब 300 कर दी है. यानी अब जिस कंपनी में 300 कर्मचारी है कंपनी उन्हें कभी भी काम से हटा सकती है, या कंपनी बंद कर सकती है. यही नहीं तो जो स्थाई कर्मचारी है, उन्हें कंपनी कभी भी ठेका कामगार घोषित कर सकती है. इस तरह के कानून भारत में लागू किये गए है. महिलाओं को रात पाली में काम पर नहीं रखने का काननू था, उसे खत्म कर दिया गया है.  



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उन्होंने कहा, इस देश में गंभीर परिस्थिती पैदा हो गई है. इसके खिलाफ लड़ने के लिए आरएमबीकेएस के माध्यम से बड़ा आंदोलन खडा किया जा रहा है. हम इस आंदोलन को अपने बलबुते पर कामयाब नहीं बना सकते. इसके लिए बामसेफ जैसे संगठन का साथ सहयोग लेना पडेगा. यदि उनका साथ सहयोग लेना हैं तो जो बामसेफ का अधिवेशन होने वाला है, उसके लिए सभी लोगों अपना और अपने रिस्तेदारों का रजिस्ट्रेशन करा कर इस अधिवेशन के लिए ज्यादा से ज्यादा आंदोलन निधी इकठ्ठा करने की हमारी जिम्मेदारी है.

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