×

किसानों की कमाई दोगुनी करने का सरकार का लक्ष्य अभी कोसों दूर

Published On :    19 Jan 2021   By : MN Staff
साझा करें:

एनएसएसओ के आंकड़ों और जानकारों की राय से आया सामने



नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की कमाई दोगुनी करने का भले ही लक्ष्य रखा हो, लेकिन सरकारी संस्थान नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि यह लक्ष्य अभी कोसों दूर है. जानकारों का कहना हैं की नए कानूनों के कारण आमदनी पर नए सिरे से कुठाराघात की आशंका है. 


एक सर्वे के मुताबिक भारतीय किसान की औसत कमाई सालाना 77,124 रुपए जो एक महीने में महज 6,427 रुपए हैं. जबकि किसान का औसत मासिक खर्च करीब 6,227 रुपए है.यानी कमाई और खर्च में ज्यादा अंतर नहीं हैं. जिसके चलते बचत नहीं हो रही है. इस कारण किसानों पर इलाज, बीज-खाद या अन्य काम के लिए कर्ज बढ़ता जा रहा है.


केंद्र सरकार के संगठन नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (एनएसएसओ) के मुताबिक 0.1 हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसान औसतन अब भी महीने के 7300 रुपए तक कमा पा रहे हैं. जिन किसानों के पास एक से दो हेक्टेयर जमीन है, उनके परिवारों की आय 11,810 रुपए है. चार से 10 हेक्टेयर जमीन वाले किसानों की आय 31,560 रुपए है.


औसत आय देखें तो छह साल में किसान परिवारों की कमाई सिर्फ चार हजार रुपए बढ़ी है. केंद्र सरकार हर छोटे किसान परिवार को सालाना छह हजार रुपए पीएम-किसान निधि देती है. यह उनकी सालाना आय का महज फीसद है. 10 में से दो किसान गरीबी रेखा के नीचे हैं. 10 में से छह किसान की आय सालाना दो लाख रुपए भी नहीं है. देश के 22.5 फीसद किसान गरीबी रेखा से नीचे आते हैं, यानी हर 10 में से 2 किसान. इनमें सबसे ज्यादा 45.3 फीसद किसान झारखंड के हैं. पंजाब के 0.5 फीसद और हरियाणा के 4.3 फीसद किसान गरीबी रेखा से नीचे है.


नाबार्ड के मुताबिक, किसान परिवारों की हर महीने की कमाई औसतन 8931 रुपए थी. यानी सालाना 1,07172 रुपए. सबसे ज्यादा कमाई पंजाब और हरियाणा के किसान परिवारों की होती रही है. पंजाब में एक किसान हर महीने 23 हजार 133 रुपए और हरियाणा में 18 हजार 496 रुपए कमाई करता है। कमाई में पंजाब सबसे आगे और बिहार सबसे पीछे है. किसानों की कमाई के मामले में तीसरे स्थान पर जम्मू-कश्मीर है, जहां किसानों की सालाना औसतन कमाई 1,52,196 रुपए की है. यहा के किसानों की आमदनी गुजरात, महाराष्ट्र जैसे संपन्न राज्यों से भी काफी ज्यादा है.



यह भी पढ़े : पूर्व केंद्रिय मंत्री यशवंत सिन्हा ने साधा अर्नब गोस्वामी पर निशाना, कहा सरकार का दल्ला



केरल में किसानों की औसत सालाना कमाई 1,42,668 रुपए, राजस्थान में 88,188 रुपए, मध्य प्रदेश में 74,508 रुपए, छत्तीसगढ़ में 62,124 रुपए, ओड़ीशा में 59,712 रुपए, बंगाल में 47,760 रुपए और झारखंड के किसानों की सालाना औसत आय 56,652 रुपए है. यूपी और बिहार के किसानों की औसत आमदनी सबसे कम है. यूपी के किसानों की औसत सालाना आय 58,944 रुपए और बिहार में 42,684 रुपए है. वहीं खर्च के मामले में पंजाब और केरल के किसान आगे रहे. पंजाब के किसान हर महीने 13 हजार 311 रुपए और केरल के किसान 11 हजार 8 रुपए खर्च करते हैं. जबकि, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के किसान कमाई से ज्यादा खर्च करते हैं. औसतन 5249 रुपए पश्चिम बंगाल एक किसान ने खर्च किए.


किसानों की आमदनी को लेकर संप्रग और राजग की मौजूदा सरकार ने सर्वे कराए थे. सर्वे के आंकड़ों से पता चला कि मनमोहन सिंह सरकार में किसानों की कमाई कुछ ज्यादा नहीं थी और नरेंद्र मोदी सरकार में भी नहीं रही. मनमोहन सरकार में हुए सर्वे में किसानों की हर महीने की कमाई 6,426 रुपए और मोदी सरकार में हुए सर्वे में किसानों की कमाई 8,931 रुपए बताई गई. मनमोहन से लेकर मोदी सरकार तक किसानों की महीने की कमाई महज 2505 रुपए ही बढ़ी. केंद्र सरकार के नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) रिपोर्ट में कमाई और खर्च के आंकड़े दिए गए हैं.



यह भी पढ़े : ट्रैक्टर रैली को लेकर यूपी के किसान बोले



पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन कहते है किसानों की उपज का बेहतर दाम दिलवा पाना चुनौती है. सरकार ने 2007 में वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाई थी. इसके तहत एक हजार गोदाम ही पंजीकृत हैं. अगर गोदामों में इलेक्ट्रिकल रसीद प्रणाली लागू हो जाए तो किसानों की आय पर फर्क पड़ेगा. 


वहीं किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष रखने वाले समिति में शामिल अशोक दलवाई कहते हैं की किसानों की आय 2022-23 तक दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में 10.4 फीसद की वृद्धि दर हासिल करनी होगी. इस वक्त यह 2.9 फीसद है. लक्ष्य पाने के लिए बाकी के चार साल में 15 फीसद की विकास दर हासिल करनी होगी, जो फिलहाल असंभव है.

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
न्यायपालिका को जर्जर बताने वाले पूर्व सीजेआई के खिलाफ अव
बीते 10 महीने में छत्तीसगढ़ के 141 किसानों ने की आत्महत्या : छत
राकेश टिकैत करेंगे पांच राज्यों में जनसभाएं, 1 मार्च से शु
फिर बढ़े रसोई गैस के दाम, 25 रुपए महंगा हुआ सब्सिडी वाला सिले
मंदी से बाहर नहीं निकला देश, अभी माइनस में है जीडीपी ग्रोथ
खुलेआम बिक रही मौत देने वाली दवा
सुशांत सिंह मामले में हंगामा करने वाले 7 बार के सांसद की स
तमिलनाडु में विवाद में एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण, क्षत्र
पिछड़े वर्ग के आंकडों के बिना सरकार उनका उद्धार नहीं कर सक
असम में ऐन चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका, बीपीएफ ने साथ छ
बीजेपी विधायक ने उड़ाया चुनाव आयोग का मजाक, बोले- नहीं मानत
भूखे रहने पर मजबूर हुए करोड़ों परिवार
कांग्रेस में उभरे मतभेद खुलकर आए सामने
चिंताजनक : औद्योगिक क्षेत्रों में हवा-पानी की गुणवत्ता ह
2030 तक महज एक फीसद ही कम होगा कार्बन उत्सर्जन, संयुक्त राष्
शेर पालने का ड्रामा करके पूरे देश की कमर तोड़ रहें हैं ये फ
बच्चों के लिए असुरक्षित बनी डिजिटल दुनिया, बाल यौन शोषण क
भाजपा-जजपा की बढ़ सकती मुश्किलें, खट्टर सरकार के खिलाफ बढ़ र
पुलिस ने उसे घर से हिरासत में लेकर सरेंडर करने के लिए टार्
भारत में राजनीति और भ्रष्टाचार के आपसी संबंध पर एमएन टीव
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper