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संविधान के नियमों को यूपी के सरकारी विभाग ने रखा ताक पर

Published On :    22 Jan 2021   By : MN Staff
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मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटाने के उद्देश्य से खोला बैंक खाता



लखनऊ : संविधान कें नियमों को ताक पर रख यूपी के पीडब्ल्यूडी विभाग ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए चंदा जुटाने हेतू एक बैंक खाता खोलने का मामला सामने आया है, जो भारतीय संविधान के विरोध में हैं. 


मालूम हो की भारत का संविधान धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का प्रचार और प्रसार करने का अधिकार है, लेकिन यह किसी भी धर्म के नाम पर टैक्स वसूलने या धन एकत्र करने से सरकार को रोकता है. हालांकि यूपी सरकार के अधिकारियों ने इस प्रावधान को बिल्कुल उल्टा कर दिया है.  


बीते 19 जनवरी को विभाग के प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष राजपाल सिंह ने लखनऊ में एचडीएफसी बैंक की एमजीरोड शाखा को पत्र लिखकर ‘पीडब्ल्यूडी राम मंदिर वेलफेयर’ नाम से एक खाता खोलने की गुजारिश की. उन्होंने कहा कि इसमें लोक निर्माण विभाग द्वारा अपने सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन ‘स्वेच्छा’ से राम मंदिर निर्माण के लिए दान किया जाएगा. इसके जवाब में बैंक ने तुरंत एक अकाउंट खोल दिया.


वैसे तो पीडब्ल्यूडी के कर्मचारियों द्वारा ‘स्वैच्छिक’ दान को कानूनी रूप से कर नहीं माना जा सकता है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस धनराशि को एकत्र करने के लिए सरकारी मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है और यह विशेष धर्म के प्रचार के लिए जबरदस्ती कर वसूली के समान है. यह स्पष्ट नहीं है कि ये फंड जुटाने का निर्णय चीफ इंजीनियर का खुद का है, ताकि शासन की नजर में वे खुद को वफादार स्थापित कर सकें, या फिर वे ऊपर से आए किसी लिखित या अलिखित आदेख का पालन कर रहे हैं. इस मामले में  द वायर ने चीफ इंजीनियर राजपाल सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं आया है.



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पीडब्ल्यूडी विभाग उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अधिकार-क्षेत्र में है, जिनकी जड़ें वीएचपी में रही हैं. इस कट्टर ब्राह्मणवादी संगठन के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंहल न सिर्फ मौर्य के गुरु थे, बल्कि वे बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर बनाने की मांग के प्रमुख पैरोकारों में से एक थे. मौर्य के इसी इतिहास के चलते उन्हें भाजपा में बड़े पद प्रदान किए गए. एक ओबीसी नेता होने के चलते वे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भी थे. लेकिन वे सवर्ण ना होने के चलते ये योगी आदित्यनाथ को सीएम और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया.


अटकलें लगाई जा रही हैं कि मौर्य सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर अयोध्या मंदिर निर्माण के लिए योगी आदित्यनाथ की तुलना में अधिक धन इकट्ठा करना चाहते हैं, जिन्होंने अभी तक सिर्फ दो लाख का दान दिया है. खास बात ये है कि आदित्यनाथ भी गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर के प्रमुख हैं, जो कि अत्यधिक धन रखने के लिए जाना जाता है और इसमें से कुछ राशि जरूर राम मंदिर निर्माण के लिए दी जा सकती है. मामला चाहे जो भी हो, लेकिन इसकी बहुत कम संभावना है कि एक मुख्यमंत्री जिसकी खुद की राजनीति कट्टर हिंदुत्व है, वह इस असंवैधानिक कदम को रोकने के लिए कोई कदम उठाएगा.



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यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी विभाग द्वारा कर्मचारियों को मंदिर के लिए एक दिन का वेतन देने और इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंक खाता स्थापित करने के लिए आधिकारिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए आग्रह करना अत्यधिक अनुचित है. जो कर्मचारी दान नहीं देना चाहते हैं, वे इसका विरोध करते हुए पीछे हट सकते हैं. वैसे तो इसमें कहा गया है कि ये दान स्वैच्छिक है. हालांकि हर कोई जानता है कि जो दान देने से इनकार करेगा, उसे मंदिर-विरोधी तमगे से नवाजा जाएगा, जिसके परिणाम काफी खराब हो सकते हैं.


बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 27 सरकार को किसी धर्म के प्रचार प्रसार के लिए टैक्स इकट्ठा करने से ही नहीं बल्कि सरकारों को धर्म के नाम पर खर्च करने से भी रोकता है. इसमें कहा गया है, किसी भी व्यक्ति को ऐसा कोई भी कर का भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिसे किसी विशेष धर्म या धार्मिक संप्रदाय के प्रचार या रखरखाव के लिए खर्च किया जाना है.

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