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ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा से संयुक्त किसान मोर्चा ने ख़ुद को किया अलग

Published On :    27 Jan 2021   By : MN Staff
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कहा- असामाजिक तत्वों की घुसपैठ



नई दिल्ली : दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा में शामिल लोगों से किसान संघों के संयुक्त किसान मोर्चा ने खुद को अलग कर लिया और आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ कर ली है अन्यथा आंदोलन शांतिपूर्ण था. संघ ने इस घटनाओं की निंदा की है और खेद जताया है. 


कुछ किसान समूहों द्वारा पहले से तय रास्ता बदलने के बाद परेड हिंसक हो गई है. संयुक्त किसान मोर्चा में किसानों के 41 संघ हैं. वह दिल्ली वह दिल्ली से सटे विभिन्न बॉर्डर केंद्र सरकार की ओर से लाए गये तीन नए कृषि कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन की अगुवाई कर रहा है.

किसान संगठन ने एक बयान में कहा, आज के किसान गणतंत्र दिवस परेड में अभूतपूर्व भागीदारी के लिए हम किसानों को धन्यवाद देते हैं. हम अवांछनीय और अस्वीकार्य घटनाओं की निंदा करते और खेद भी जताते हैं जो आज हुई हैं और ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों से खुद को अलग करते हैं.


बयान में कहा गया है, हमारे सभी प्रयासों के बावजूद, कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने मार्ग का उल्लंघन किया और निंदनीय कृत्यों में शामिल हुए. असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ की है, अन्यथा आंदोलन शांतिपूर्ण था. हमने हमेशा यह माना है कि शांति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी तरह का उल्लंघन आंदोलन को नुकसान पहुंचाएगा.


संयुक्त किसान मोर्चा का बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी के कई स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई हैं. वहीं एक किसान की दिल्ली के आईटीओ पर मौत हो गई. पुलिस ने शहर के कई स्थानों पर किसानों को काबू करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे.



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बयान में कहा गया है, हम अपने आप को ऐसे सभी तत्वों से अलग करते हैं जिन्होंने हमारा अनुशासन तोड़ा है. हम परेड के मार्ग और नियमों पर चलने के लिए और किसी भी हिंसक कृत्य या ऐसी किसी भी चीज़ में लिप्त नहीं होने की सभी से दृढ़ता से अपील करते हैं जो राष्ट्रीय प्रतीकों और गरिमा को प्रभावित करती है. हम सभी से अपील करते हैं कि वे ऐसे किसी भी कृत्य से दूर रहें.



बयान में कहा गया है, हम आज तय की गई कई परेडों के संबंध में सभी घटनाओं की पूरी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. हमारी सूचना के मुताबिक, कुछ खेदजनक उल्लंघनों के अलावा परेड योजना के अनुसार शांतिपूर्ण निकाली जा रही है. हाथों में डंडे, तिरंगा व किसान संघ के झंडे थामें हजारों किसानों ने ट्रैक्टरों पर सवार होकर बैरिकेड तोड़ दिए और कई स्थान पर पुलिस के साथ संघर्ष किया तथा लाल किले को घेर लिया एवं झंडे फहराने वाले खंभे पर चढ़ गए.


दिल्ली में हुयी हिंसा की निंदा करते हुये भाकियू के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि एक सोची समझी साजिश के तहत भोले भाले किसानो का गुमराह किया गया जिसकी जांच किये जाने की जरूरत है. मुजफ्फरनगर जाते समय कुछ देर बागपत में रूके टिकैत ने पत्रकारों से कहा कि दिल्ली में जो कुछ हुआ, वह निंदनीय है. ऐसा लगता है कि किसानो को जानबूझ कर लाल किले का रास्ता दिखाया गया. दिल्ली पुलिस की बैरीकेडिंग कमजोर थी. किसान दिल्ली के रास्ते नहीं जानते, उन्हे एक साजिश के तहत जाने दिया गया.



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उन्होने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि किसान आंदोलन जारी रहे. कोई किसानो को गुमराह कर रहा है. सरकार को घटना की जांच करानी चाहिये. गणतंत्र दिवस जैसे मौके पर हिंसा की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती. पुलिस की कार्रवाई से किसानो को जो नुकसान हुआ है, उसका मुआवजा दिया जाना चाहिये. एक किसान की जान गयी, उसके परिजनो को सरकार मुआवजा दे. टिकैत ने कहा कि दिल्ली में किसान आंदोलन में हुई हिंसा और उपद्रव से उनका व उनके किसान संगठन से कोई लेना देना नही है.  



बता दें कि विविध राज्य के किसान बिते 28 नवंबर से दिल्ली की अलग अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि तीन कृषि कानूनों को रद्द किया जाए और एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए.
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