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देश का बुरा हाल : शतक लगा चुकी पेट्रोल की कीमतें

Published On :    21 Feb 2021   By : MN Staff
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सरकार और तेल कंपनियों के अच्छे दिन, बुरे दौर से गुजर रही जनता



♦ कीमत से ज्यादा टैक्स वसूल कर केंद्र और राज्य सरकारें कर रही कमाई
♦ मोदी राज में पेट्रोल पर टैक्स 3 गुना तो डीजल पर 7 गुना बढ़ा टैक्स

नई दिल्ली : कांग्रेस सरकार में भी देश का बुरा हाल था बीजेपी सरकार में भी बुरा हाल है. भले ही बीजेपी सरकार ‘अच्छे दिन’ का नारा दी है, लेकिन कांग्रेस सरकार में भी सिर्फ सरकारें और निजी कंपनियों के अच्छे दिन थे. जनता तो उस समय और आज भी बुरे दिन से गुजर रही है. चांदी केवल पूंजीपतियों की कट रही है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पेट्रोल की कीमतें मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में शतक लगा चुकी हैं. 


डीजल भी बराबरी से उसके पीछे-पीछे चल रहा है. दोनों की कीमतों में कुछ न कुछ पैसे लगभग रोजाना बढ़ोतरी हो रही है. 9 फरवरी से अब तक दिल्ली में पेट्रोल का दाम 3.28 रुपए और डीजल का दाम 3.49 रुपए बढ़ चुका है. केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम करना उसके हाथ में नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कीमतों में बढ़ोतरी के लिए पूर्वर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. जबकि, ये सब तब हो रहा है, जब कच्चे तेल की कीमत पूर्वर्ती सरकार की तुलना में लगभग आधी हो चुकी है. 


अब जब मोदी ने बढ़ती कीमतों के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, तो ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि पिछली सरकार से मोदी सरकार तक पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्स बढ़ गया? सरकार की कमाई कितनी बढ़ गई? सरकारी तेल कंपनियों का मुनाफा कितना बढ़ गया? इसे टूलकिट में समझते हैं...

कच्चा तेल कम होने बाद भी कम नहीं महंगाई
मई 2014 में जब मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, तब कच्चे तेल की कीमत 106.85 डॉलर प्रति बैरल थी. एक बैरल यानी 159 लीटर. मोदी के प्रधानमंत्री बनने के तीन महीने बाद ही यानी सितंबर में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के नीचे आ गई और तब से नीचे ही है. जबकि, जनवरी 2021 में कच्चे तेल की कीमत 54.79 डॉलर प्रति बैरल थी. यानी, कच्चे तेल की कीमतें लगभग आधी हो गई हैं. कुल मिलाकर  सरकार का नसीब तो अच्छा है, लेकिन जनता का नसीब अच्छा नहीं है. क्योंकि, कीमतें कम होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं हुईं, उल्टा जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ गया. एक और चौंकाने वाली बात है कि जब मोदी सत्ता में आए तब पेट्रोल पर 34 फीसदी और डीजल पर 22 फीसदी टैक्स लगता था, लेकिन आज पेट्रोल पर 64 फीसदी और डीजल पर 58 फीसदी तक टैक्स लग रहा है. यानी अब जनता पहले की तुलना में पेट्रोल पर दोगुना और डीजल पर ढाई गुना टैक्स दे रही है.



13 बार बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी 
केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी के जरिए टैक्स लेती है. मई 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तब केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 10.38 रुपए और डीजल पर 4.52 रुपए टैक्स वसूलती थी, ये टैक्स एक्साइज ड्यूटी के रूप में लिया जाता है. मोदी सरकार में 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, लेकिन घटी सिर्फ तीन बार. आखिरी बार मई 2020 में एक्साइज ड्यूटी बढ़ी थी. इस वक्त एक लीटर पेट्रोल पर 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए एक्साइज ड्यूटी लगती है. मोदी के आने के बाद केंद्र सरकार पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 7 गुना टैक्स बढ़ा चुकी है.



केन्द्र सरकार की तीन गुना बढ़ी कमाई
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की अच्छी-खासी कमाई होती है. मोदी सरकार ने तो इससे कमाई तीन गुना तक बढ़ा ली है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल यानी पीपीएसी के मुताबिक 2013-14 में सिर्फ एक्साइज ड्यूटी से सरकार ने 77,982 करोड़ रुपए कमाए थे, जबकि 2019-20 में 2.23 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई हुई. वहीं 2020-21 के पहली छमाही में यानी अप्रैल से सितंबर तक मोदी सरकार को 1.31 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई. अगर इसमें और दूसरे टैक्स भी जोड़ लें तो ये कमाई 1.53 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है. ये आंकड़ा और ज्यादा होता, अगर कोरोना नहीं आया होता और लॉकडाउन न लगा होता.

टैक्स लगाकर जनता को चूस रही राज्य सरकारें 
केंद्र सरकार ने तो एक्साइज ड्यूटी लगाकर कमाई कर ली. अब बारी है राज्य सरकारों की क्योंकि केंद्र सरकार एक ही है, इसलिए पूरे देश में एक्साइज ड्यूटी एक ही लगती है, लेकिन राज्य सरकारें अलग-अलग हैं, तो हर राज्य में अलग-अलग टैक्स लगता है. राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर कई तरह के टैक्स और सेस लगाती हैं. इनमें सबसे प्रमुख वैट और सेल्स टैक्स होता है. पूरे देश में सबसे ज्यादा वैट/सेल्स टैक्स राजस्थान सरकार वसूलती है. यहां पेट्रोल पर 38 फीसदी और डीजल पर 28 फीसदी टैक्स लगता है. उसके बाद मणिपुर, तेलंगाना और कर्नाटक हैं, जहां पेट्रोल पर 35 फीसदी या उससे अधिक टैक्स लगता है. इसके बाद मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 33 फीसदी वैट लगता है.

राज्य सरकारों ने भी की बड़ी कमाई
पेट्रोल-डीजल पर वैट और सेल्स टैक्स लगाकर राज्य सरकारों ने भी अच्छी कमाई की है. हालांकि ये कमाई केंद्र की तुलना में कम है. 2013-14 में राज्य सरकारों ने वैट और सेल्स टैक्स से 1.29 लाख करोड़ रुपए कमाए थे. 2019-20 में ये कमाई 55 फसदी बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई. 2020-21 की पहली छमाही में ही राज्य सरकारों ने 78 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा कमाए हैं. यहां भी वही फॉर्मूला लागू होता है, जो केंद्र पर लागू हुआ था. यानी ये कमाई और ज्यादा होती, अगर लॉकडाउन न लगा होता.

सरकारी कंपनियों के अच्छे दिन आए
देश में तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियां हैं. इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम शामिल हैं. इन तीनों ही कंपनियों का मुनाफा बढ गया है. इन तीनों कंपनियों ने दिसंबर 2019 में 4,347 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था. जबकि, दिसंबर 2020 में इनका मुनाफा बढ़कर 10,050 करोड़ रुपए हो गया.

अब बात पड़ोसी देशों की
भारत में जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें जबर्दस्त बढ़ीं है तो वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देशों में इनकी कीमतों में कमी आई है. पाकिस्तान में ही अप्रैल 2014 में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 66.17 रुपए और डीजल की कीमत 71.27 रुपए थी. लेकिन अब वहां एक लीटर पेट्रोल 51.13 रुपए और डीजल 53 रुपए के आसपास है. इसके साथ ही चार पड़ोसी देशों में सिर्फ बांग्लादेश ही ऐसा है, जिसने इस दौरान पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं, वो भी मामूली.

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