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खतरे में फिर ईवीएम की विश्वसनीयता

Published On :    22 Feb 2021   By : MN Staff
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ईवीएम पर एक और सनसनी खुलासा, चुनाव आयोग और मीडिया ने साधा चुप्पी



नई दिल्ली : इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है. यह खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन ने बुधवार 17 फरवरी 2021 को किया था. लेकिन इतनी बड़ी खबर को चुनाव आयोग और गोदी मीडिया ने दबा दिया. यह कितनी हैरान करने वाली बात है कि इतनी बड़ी खबर को 7 दिन बाद भी न तो टीवी चैनलों में दिखाया गया और न ही अखबारों में जगह दिया गया. जबकि, इतनी बड़ी खबर उस समय दबाया गया है जब ईवीएम के खिलाफ देश में बहुत बड़ा आंदोलन चल रहा है.



चुनाव आयोग को चुनौती : पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन ने ईवीएम को कंप्यूटर से जोड़े जाने का दिया प्रमाण

अगर मैं गलत हूं तो मुझे गलत साबित करने की ज़िम्मेदारी आयोग की है ताकि मैं भ्रामक जानकारी न फैला सकूं : कन्नन

‘‘चुनाव परिणाम में हेराफेरी करने के लिए किसी निर्वाचन क्षेत्र में 100 प्रतिशत ईवीएम में छेड़छाड़ करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि निर्वाचन क्षेत्रों में 5-10 फीसदी ईवीएम को हैक करना पूरे चुनाव परिणाम को बदलने के लिए पर्याप्त है.’’



गौरतलब है कि पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन ने ईवीएम मशीन को कंप्यूटर से जोड़े जाने का प्रमाण देकर चुनाव आयोग को न केवल कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि आयोग के उस दावे की पोल खोलकर उसे पूरी तरह से नंगा भी कर दिया है, जिसमें चुनाव आयोग ईवीएम को किसी भी डिवाइस से कनेक्ट नहीं होने का दावा करते आ रहा है. 


कन्नन ने कहा है कि चुनाव आयोग बार-बार दावा करता है कि वीवीपीएटी और ईवीएम के साथ किसी एक्सटर्नल डिवाइस यानी बाहरी मशीन को जोड़ा नहीं जा सकता है. लेकिन, कन्नन ने ईवीएम और वीवीपीएटी बनाने वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक (बीईएल) के मैनुअल के हवाले से बताया है कि वीवीपएटी को शुरू करने के लिए बाहरी लैपटॉप या कंप्यूटर की ज़रूरत होती है. 


कन्नन ने पूछा कि अगर वीवीपीएट स्टैंडअलोन डिवाइस है तो उसकी कमीशनिंग के लिए लैपटॉप या कंप्यूटर की ज़रूरत क्यों पड़ती है? गोपीनाथन ने रिपोर्ट के हवाले से दावा करते हुए बताया है कि एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के ज़रिए ईवीएम और वीवीपीएटीपर उम्मीदवारों के नाम और उनके चुनाव चिन्हों को लोड करने के लिए लैपटॉप का इस्तेमाल किया जाता है.


बता दें कि ईवीएम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. लेकिन, गोदी मीडिया तो छोड़िए सोशल मीडिया पर भी इसकी कोई चर्चा नहीं हो रही है. यह भी बता दें कि आम चुनाव में ईवीएम की भूमिका से सभी लोग परिचित हैं और उन सवालों से भी परिचित हैं जो ईवीएम पर उठते रहते हैं, जो बहुत कम लोग समझ पाए हैं. जबकि, सच्चाई यह है कि चुनाव परिणाम में हेराफेरी करने के लिए किसी निर्वाचन क्षेत्र में 100 प्रतिशत ईवीएम में छेड़छाड़ करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि निर्वाचन क्षेत्रों में 5-10 फीसददी ईवीएम को हैक करना पूरे चुनाव परिणाम को बदलने के लिए पर्याप्त है.


बता दें कि एक बार फिर से पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन ने ईवीएम घोटाले पर खुलासा करके चुनाव आयोग को चुनौती दे दी है. बुधवार को ईवीएम और वीवीपीएटी पर ताजा खुलासा . कन्नन ने 2019 लोकसभा चुनाव को बेहद नजदीक से देखा है. कन्नन उस चुनाव में चुनाव अधिकारी थे. सबसे बड़ी बात तो यह है कि पद पर रहते हुए उन्होंने ईवीएम से जुड़ी प्रक्रिया पर दो बार सवाल उठाया था. उनके दावे इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. 


कन्नन गोपीनाथन ने ईवीएम को लेकर जो खुलासे किए हैं, उनसे चुनाव आयोग के दावों पर सवालिया निशान लग गया है. चुनाव आयोग कहता है कि ईवीएम एक स्टैंड अलोन मशीन है, जिसे किसी बाहरी मशीन से नहीं जोड़ा जा सकता है. लेकिन, कन्नन गोपीनाथ ने जो अब जानकारियां दी हैं, उनसे आयोग का यह दावा संदेह के दायरे में आ गया है.


ईवीएम से जुड़ सकती है बाहरी डिवाइस

कन्नन ने कहा है कि चुनाव आयोग बार-बार दावा करता है कि वीवीपीएटी और ईवीएम के साथ किसी एक्सटर्नल डिवाइस यानी बाहरी मशीन को जोड़ा नहीं जा सकता है. लेकिन, कन्नन ने ईवीएम और वीवीपीएटी बनाने वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक (बीएल) के मैनुअल के हवाले से बताया है कि वीवीपीएटी को शुरू करने के लिए बाहरी लैपटॉप या कंप्यूटर की ज़रूरत होती है. कन्नन ने पूछा कि अगर वीवीपीएटी स्टैंडअलोन डिवाइस है तो उसकी कमीशनिंग के लिए लैपटॉप या कंप्यूटर की ज़रूरत क्यों पड़ती है? गोपीनाथन ने बताया है कि एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर के ज़रिए ईवीएम और वीवीपीएटी पर उम्मीदवारों के नाम और उनके चुनाव चिन्हों को लोड करने के लिए लैपटॉप का इस्तेमाल किया जाता है.


गोपीनाथन ने बुधवार को ट्वीट किया, यदि आप तकनीकी विशेषज्ञ समिति के इन चार प्रोफेसरों में से किसी को जानते हैं, तो उनसे पूछें कि ईवीएम पर किसी भी बाहरी डिवाइस से कनेक्ट नहीं होने पर उम्मीदवारों का नाम और प्रतीक ईवीएम पर कैसे लोड किया जाता है. कन्नन का कहना है कि चुनाव आयोग दावा करता है कि ये मशीनें बीईएल/इसीआईएल द्वारा बनाई जाती हैं. लेकिन, सच्चाई यह है कि बीईएल की ई-प्रोक्योरमेंट साइट पर मशीन की पीसीबी समेत कई कंपोनेंट के लिए टेंडर मंगाए गए हैं. कन्नन ने सवाल उठाया है कि अगर उपकरणों का निर्माण बीईएल/इसीआईएल द्वारा किया जाता है, तो पीसीबी के लिए टेंडर क्यों आमंत्रित किए गए?


चुनाव आयोग को खुली चुनौती
कन्नन गोपीनाथन ने इन सभी सवालों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगे हैं. उन्होंने कहा कि अगर मैं गलत हूं तो मुझे जवाब देने और गलत साबित करने की ज़िम्मेदारी आपकी है, ताकि मैं भ्रामक जानकारी न फैला सकूं. अगर मेरी बात में सच्चाई है, तो इसे संज्ञान में लेकर सुधार करना भी आपकी जिम्मेदारी है. इतने महत्वपूर्ण सवालों पर मीडिया और चुनाव आयोग की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है. इससे साबित होता है कि ईवीएम में बड़े पैमाने पर घोटाला होता है और इस घोटाला में बीजेपी-कांग्रेस के साथ चुनाव आयोग और गोदी मीडिया भी शामिल है. यही कारण इतने महत्वपूर्ण खबर को दबा रहे हैं.

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