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मोदी सरकार ने तेज कर दी नीजीकरण की गति, 100 सरकारी कंपनियों की संपत्ति बेचने का ऐलान

Published On :    25 Feb 2021   By : MN Staff
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केंद्र की मोदी सरकार ने नीजीकरण की गति तेज करते हुए 100 सरकारी कंपनियों की संपत्ति बेचने की घोषणा की हैं. प्रधानमंत्री ने निजीकरण पर वेबिनार को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया. पीएम मोदी ने नीजीकरण का जोरदार समर्थन करते हुए कहा की बिजनेस करना सरकार का काम नहीं हैं.



नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार ने नीजीकरण की गति तेज करते हुए 100 सरकारी कंपनियों की संपत्ति बेचने की घोषणा की हैं. प्रधानमंत्री ने निजीकरण पर वेबिनार को संबोधित करते हुए यह ऐलान किया. पीएम मोदी ने नीजीकरण का जोरदार समर्थन करते हुए कहा की बिजनेस करना सरकार का काम नहीं हैं. उन्होंने कहा, देश में सरकार के पास ऐसी कई संपत्तियां हैं, जिसका या तो पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ हैं या या वे बेकार पड़ी हुई है. ऐसी 100 संपत्तियां बेचकर 2.5 लाख करोड रूपए जुटाये जायेंगे. इन पैसों का इस्तेमाल जनकल्यानकारी योजना जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य पर किया जाएगा.


प्रधानमंत्री ने कहा, इसी क्रम में ऑयल, गैस, पोर्ट, एयरपोर्ट, पॉवर, जैसे क्षेत्रों में करीब 100 संपदाओं का मौद्रिकरण का लक्ष्य रखा गया है. इससे 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान है. उन्होंने कहा कि कई ऐसे पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइज हैं जो घाटे में हैं. इनमें से कई को करदाताओं द्वारा चुकाए गए कर के पैसे लगाने पडते है.


एक प्रकार से, जो गरीब के हक का है, आकांक्षाओं से भरे युवाओं के हक का है, उन पैसों को इन इंटरप्राइजेज के कामों में लगाना पड़ता है और इस कारण अर्थव्यवस्था पर भी बहुत प्रकार का बोझ पड़ता है. सरकारी उपक्रमों को सिर्फ इसलिए ही नहीं चलाते रहना है, क्योंकि वो इतने वर्षों से चल रहे हैं.  


प्रधानमंत्री ने कहा, उपक्रमों और कंपनियों को समर्थन देना सरकार का कर्तव्य है. लेकिन यह जरूरी नहीं है कि सरकार इन कंपनियों का स्वामित्व रखे और इन्हें चलाए. मोदी ने आगे कहा कि निजी क्षेत्र अपने साथ निवेश, बेहतरीन प्रबंधक, प्रबंधन में बदलाव और आधुनिकीकरण लाता है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बिक्री से जो पैसा आएगा उसका इस्तेमाल जन कल्याण योजनाओं पर किया जाएगा.


पीएम मोदी ने कहा कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं दूरसंचार, बिजली, पेट्रोलियम, कोयला और अन्य खनिज, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि इनमें सरकार की उपस्थिति को न्यूनतम स्तर पर रखा जाएगा. उन्होंने कहा व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं. प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम जब भी कारोबार करते हैं, तो घाटा होता है. उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है.



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मोदी ने कहा कि सरकार का अगले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पवन हंस, आईडीआई बैंक और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की हिस्सेदारी बेचकर 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है. इसके अलावा एलआईसी के साथ ही दो सरकारी बैंकों ओर एक साधारण बीमा कंपनी की बिक्री की जाएगी.


बता दें कि केंद्र सरकार ने घाटे का हलावा देंकर देश की एक नहीं बल्कि ऐसी 100 कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की बात कहीं है. घाटे में चल रही कंपनियां सरकार बेच रही है, इसे समजा जा सकता है, लेकिन हजारों करोड़ का मुनाफा कमाने वाली बीपीसीएल भी सरकार बेच रही है, जो न समजने वाली बात है. अहम सवाल यह हैं की सरकारी कंपनियां घाटे में क्यों चलती है? क्या इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है. हैराण करने वाली बात यह हैं की यही कंपनियां नीजी क्षेत्र को सौंपने बाद मुनाफा कमाती है? या सरकारी संपत्तियां बेचने के लिए सिफ घाटे का बहाना बनाया जा रहा है.



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दुसरी बात यह हैं की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां बेचने का सरकार को कोई अधिकार नहीं है. सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को खड़ा करने के लिए अपना पैसा नहीं लगाती. जनता के कर द्वारा यह क्षेत्र खड़ा किया जाता है. लेकिन संघ का एजेंडा आगे बढ़ाने वाली भाजपा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को खत्म कर यहा एससी, एसटी ओबीसी को मिलने वाला आरक्षण समाप्त करना चाहती है. 


सार्वजनिक कंपनियों को बेचने के पीछे सरकार प्रमुख उद्दश आरक्षण खत्म कर एससी, एसटी, ओबीसी को उनके प्रतिनिधित्व के मूल अधिकार से वंचित करना है. इसका परिणाम यह होगा की 100 कंपनियां या उनकी हिस्सेदारी बेचने से लाखों लोगों की रोजी रोटी खतरे में आएगी. दो करोड़ रोजगार देने के नाम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार अब रोजगार देने के बजाय उसे छिनने की कोशिश कर रही है.

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