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वेतन पाने वाले जवानों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा सकता

Published On :    7 Apr 2021   By : MN Staff
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विवादित पोस्ट पर लेखिका गिरफ्तार



गुवाहाटी : छत्तीसगढ़ के बीजापुर से माओवादियों के हमले में 24 जवान शहीद हो गये और कई जवान लापता होने की खबर है. इस घटना से एक तरफ जहां पूरा देश दुखी है वहीं दुसरी तरफ असम की एक लेखिका ने जवानों की शहादत को लेकर फेसबुक पर विवादित पोस्ट किया है. 


असम की लेखिका ने माओवादियों के हमले में मारे गये जवानों को शहीद मानने से इनकार कर दिया. उसने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा वेतन पाने वाले जवानों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा सकता. इस पोस्ट पर लेखिका को मंगलवार को गुवाहाटी पुलिस ने देशद्रोह और कई अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार कर लिया.

दरअसल, शिखा सरमा नाम की इस महिला ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में छत्तीसगढ़ में माओवादी हमले में मारे गए जवानों को शहीद मानने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था कि वेतन पाने वाले पेशेवर, जो सेवा के दौरान जान गंवाते हैं, उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया जा सकता. इसी बयान पर मिली शिकायत के बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया.


गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर मुन्ना प्रसाद गुप्ता ने कहा कि शिखा सरमा पर आईपीसी की कई धाराएं लगाई गई हैं, इनमें देशद्रोह का मामला- आईपीसी 124ए भी जोड़ा गया है. शिखा को बुधवार को ही कोर्ट में पेश किया जाएगा. बताया जाता है कि शिखा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं. उन्होंने सोमवार को अपने फेसबुक पर लिखा था, वेतन पाने वाले पेशेवर, जो सेवा के दौरान जान गंवाते हैं, उन्हें शहीद नहीं माना जा सकता. इस तर्क से तो बिजली विभाग में काम करने वाला कर्मचारी, जो करंट लगने से मरता है, उसे भी शहीद का दर्जा मिलना चाहिए.


शिखा सरमा के इस पोस्ट पर लोगों ने गुस्सा जताया. इसके बाद गुवाहाटी हाईकोर्ट के दो वकील उमी डेका बरुआ और कंगकना गोस्वामी ने दिसपुर पुलिस स्टेशन में लेखिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. उन्होंने कहा, यह हमारे सैनिकों के सम्मान की बड़ी बदनामी है. इस तरह के खराब बयान न सिर्फ हमारे जवानों के अद्वितीय बलिदान की तुलना पैसे बनाने से करते हैं, बल्कि यह इस देशसेवा की आत्मा और पवित्रता पर भी मौखिक हमले की तरह है.


इससे पहले नक्सलियों ने कोबरा यूनिट के उस जवान को छोड़ने की शर्त रखी है, जिसे उन्होंने तीन दिन पहले सीआरपीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में सुकमा-बीजापुर बॉर्डर से किडनैप कर लिया था. माओवादियों ने मंगलवार को सरकार से कहा कि वह जवान को लेने के लिए वार्ताकार का नाम दें. इसके बाद हम पुलिसकर्मी को छोड़ देंगे, तब तक वह हमारी सुरक्षा में सुरक्षित रहेगा. बता दें कि पुलिस ने रविवार को ही कहा था कि सीआरपीएफ की स्पेशल कोबरा यूनिट का जवान राकेश्वर सिंह मन्हास मुठभेड़ के बाद से ही गायब है.


वहीं गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें जवानों की शहादत के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल प्रेस को संबोधित कर रहे हैं और उनके बगल में खड़े गृहमंत्री ठहाके लगा रहे हैं. इसे संवेदनहीनता नहीं तो क्या कहा जाए? जवानों की शहादत के बाद इस प्रेस वार्ता के दौरान बस्तर इलाके के कुछ पत्रकार अमित शाह से कुछ कहते हैं और अमित शाह जोर से हंस पड़ते हैं.


कांग्रेस नेता राधिका खेड़ा ने ट्वीटर पर यह वीडियो जारी करते हुए लिखा है कि बाईं तरफ देश के गृहमंत्री हैं. ये जवानों की शहादत के बाद प्रेस वार्ता में इनकी हंसी है. वह लिखती हैं कि जवानों की शहादत हुई है और गृहमंत्री को लगता है कि यह पॉरी हो रही है. कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने लिखा, जवानों की शहादत पर पूछे गए सवाल के जवाब में बिना मास्क के मुस्कुराता हुआ ये चेहरा कौनसा राष्ट्रवाद है?


इस वीडियो के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों के प्रति हमारे देश के नेताओं के मन में कितनी संवेदना और सहानुभूति है. ये वही लोग है जो शहीदों की लाशों पर वोट का कारोबार करते हैं. ये उसी सरकार के गृहमंत्री हैं जिनके मुखिया पुलवामा के शहीदों के नाम पर युवाओं से पहले वोट की अपील करते हैं.
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