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किस-किस से बदला लेंगे गृहमंत्री, पर्चा जारी कर नक्सलियों ने एक बार फिर सरकार को दी चुनौती

Published On :    8 Apr 2021   By : MN Staff
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शनिवार को बीजापुर के तर्रेम में नक्सली मुठभेड़ के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ आए, लेकिन उनके छत्तीसगढ़ से वापस रवाना होते ही नक्सलियों ने सरकार को चुनौती देते हुए एक पर्चा जारी किया है.



रायपुर : शनिवार को बीजापुर के तर्रेम में नक्सली मुठभेड़ के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ आए, लेकिन उनके छत्तीसगढ़ से वापस रवाना होते ही नक्सलियों ने सरकार को चुनौती देते हुए एक पर्चा जारी किया है. 


तर्रेम में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में घायल हुए अपने साथियों को सलाम करते हुए उन्होंने अमित शाह पर भी निशाना साधा है. पर्चे में कहा गया है कि अमित शाह देश के गृह मंत्री होकर भी बदला लेने जैसी असंवैधानिक बात करते हैं. नक्सलियों ने गृह मंत्री अमित शहा से सवाल किया की वे किस-किस से बदला लेंगे.


माकपा (माओवादी) के प्रवक्ता अभय द्वारा जारी किए गए पर्चे में कहा गया है कि सरकार और सुरक्षा बलों के अभियान के खिलाफ वे टैक्टिकल काउंटर ऑपेंसिव कैंपेन चला रहे हैं जिसमें अब तक 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी या तो घायल हुए हैं या मारे गए हैं.


पर्चे की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया गया है. पर्चे में कहा गया है कि सरकारी तंत्र किसान आंदोलन का दमन कर रहा है. माओवादी इसका विरोध करते हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि संगठन की केंद्रीय कमेटी ने सरकार के दमन के खिलाफ 26 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है और जनता से इसके समर्थन की अपील भी की है.



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पर्चे में कहा गया है की किसानों से लेकर देश में चल रहे तमाम जनसंघर्षों को ऊंचा उठाते हुए, सरकार के दमन का खंडन करते हुए, हमारी पार्टी के केंद्रीय कमेटी उसके जवाब में अप्रैल माह में प्रतिरोध संघर्ष संचालित करते हुए 26 अप्रैल को भारत बंद सफल करने का आह्वान किए थे. 


सरकार कोरोना महामारी से जनता की रक्षा करने में नाकाम हुई जनता को बचाने की न सोचते हुए, माओवादी का भूत खड़ा कर रही है, चुनाव पर ध्यान दे रही है. पर्चे में लिखा है कि सरकार आम जनता को कोरोना महामारी से बचाने की बजाय उन्हें माओवादियों का डर दिखा रही है. कोरोना से बचाव के जगह सरकार को चुनाव की ज्यादा चिंता है. इसे सरकार का सत्ता प्रेम बताते हुए पर्चे में इसका प्रतिरोध करने की बात कही गई है.


पर्चे में केंद्र की बीजेपी सरकार को भगवा आतंकवादी बताते हुए नक्सलियों ने कहा है कि सरकार अपने न्यायपूर्ण हकों के लिए लड़ने वाली जनता को आतंकवादी कहती है और माओवादियों को भी उसी श्रेणी में रखती है. पर्चे में यह भी लिखा है कि सरकार माओवादियों के अस्तित्व को मिटाने के लिए वर्षों से इस तरह का दुष्प्रचार कर रही है।



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पर्चे में दावा किया गया है कि सरकार की कार्रवाइयों के खिलाफ इस तरह के मुठभेड़ आगे भी होते रहेंगे. नक्सलियों ने कहा है कि सरकार उन्हें आतंकवादी मानती है जबकि वे सरकारी तंत्र द्वारा जनता के संसाधनों की लूट के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं. पर्चे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की भी चर्चा है. उनके बारे में कहा गया है कि मुख्यमंत्री शांति वार्ता से पहले हथियार और हिंसा छोड़ने की शर्त रख रहे हैं.



पर्चे में कहा है कि वे पुलिस के साथ संघर्ष नहीं चाहते, लेकिन जब वे सरकारी तंत्र का हथियार बनकर उन पर हमला करते हैं तो उन्हें जवाब देना पड़ता है. उन्होंने पुलिस को भी शोषित जनता का हिस्सा बताते हुए लोगों से अपील की है कि अपने बच्चों को पुलिस में भर्ती नहीं करें.
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