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इस साल 5.2 करोड़ नौकरियां कम होंगी, 2.1 करोड़ से ज्यादा लोग रहेंगे बेरोजगार

Published On :    19 Jan 2022   By : MN Staff
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कोरोना महामारी के चलते साल 2022 में भी बेरोजगारी ज्यादा रहेगी. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कामकाजी घंटों में महामारी से पहले के मुकाबले दो फीसदी की कमी रहेगी.



नई दिल्ली : दो करोड़ रोजगार देने का वादा करने वाले भाजपा के राज में लगातार बेरोजगारी बढ़ रही है. देश में बीते दिसंबर महीने में बेरोजगारी दर चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी. अब कहा जा रहा है कि कोरोना महामारी के चलते साल 2022 में भी बेरोजगारी ज्यादा रहेगी. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कामकाजी घंटों में महामारी से पहले के मुकाबले दो फीसदी की कमी रहेगी. यह 5.2 करोड़ पूर्णकालिक रोजगार के बराबर होगा.



आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 में बेरोजगार लोगों का आंकड़ा 20.7 करोड़ तक पहुंच सकता है. यह वर्ष 2019 से 2.1 करोड़ ज्यादा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 तक वैश्विक बेरोजगारी का आंकड़ा महामारी के पहले के स्तर से अधिक बना रह सकता है. आईएलओ के महानिदेशक गाई राइडर का कहना है कि कोविड संकट के दो वर्ष बीतने के बाद भी स्थितियां नाजुक हैं. उन्होंने कहा कि पुनर्बहाली का रास्ता धीमा और अनिश्चितताओं से भरा है. अनेक कामगारों को नए प्रकार के कामकाज की तरफ मुड़ना पड़ रहा है.



रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि रोजगार पर कुल असर अनुमानित आंकड़ों से ज्यादा हो सकता है. इसका कारण है कि बड़ी संख्या में लोगों ने श्रम बल छोड़ दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में श्रम बल की भागीदारी 2019 की तुलना में 1.2 फीसदी कम रह सकती है. इसके लिए कोरोनो के डेल्टा और ओमिक्रोन जैसे वैरिएंट के उभार को जिम्मेदार ठहराया गया है. आईएलओ रोजगार में कमी या बढ़ोतरी की गणना काम के घंटों के आधार पर करती है. यह संगठन एक सप्ताह में 48 घंटे के काम के मानक के आधार पर रोजगार की गणना करता है.


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रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के कारण लगभग हर देश में आर्थिक, वित्तीय और सामाजिक तानाबाना कमजोर हो रहा है. इस नुकसान की भरपाई में कई वर्षों का समय लग सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च आय देशों में पुनर्बहाली मजबूत है, जबकि निम्न-मध्य आय वाली अर्थव्यवस्थाएं खराब हालातों का सामना कर रही हैं.



रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सीएमआईआई के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.9 फीसदी हो गई जबकि नवंबर में यह दर सात फीसदी थी. दिसंबर का यह आंकड़ा अगस्त में 8.3 फीसदी के बाद से सबसे अधिक है. आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 9.3 फीसदी हो गई जबकि नवंबर में यह दर 8.2 फीसदी थी. वहीं, दिसंबर में ग्रामीण बेरोजगारी दर बढ़कर 7.3 फीसदी हो गई जो नवंबर में 6.4 फीसदी थी. गौरतलब है कि मई 2021 में भारत में बेरोजगारी दर सबसे अधिक दर्ज की गई थी. इस महीने में यह 11.84 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंची थी.



कई अर्थशास्त्रियों को चिंता है कि ओमीक्रॉन वेरिएंट पिछली तिमाही में देखे गए आर्थिक सुधार को उलटा सकता है. बेरोजगारी को लेकर मुंबई स्थित सीएमआईई के आंकड़ों पर अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं की बारीकी नजर रखते हैं क्योंकि सरकार मासिक आंकड़ें जारी नहीं करती.



बता दें कि देश में बेरोजगारी एक भीषण समस्या बनी हुई है. सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण भी इसके लिए जिम्मेदार है. एक तरफ रोजगार निर्माण नहीं हो रहे है, वहीं दूसरी तरफ निजीकरण रोजगार खत्म किए जा रहे है. जिसके चलते शिक्षित युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे है. बेरोजगारी की वजह से युवाओं में खुदखुशी के मामले बढ़ने की भी खबरे आ चुकी है. अगर बेरोजगारी में और इजाफा होता है तो लाखों करोड़ों लोग गरीबी के खाई में धकले जाएंगे. इससे भुखमरी की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. क्योंकि पिछले साल जारी किए गए विश्व भूख सूचकांक में भारत में भूख की स्थिति को चिंताजनक बताया गया था.
 

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