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सुप्रीम कोर्ट बोला- कंपीटिटिव एग्जाम के प्रदर्शन के आधार पर मेरिट की व्याख्या नहीं कि जा सकती

Published On :    21 Jan 2022   By : MN Staff
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नीट के पीजी और यूजी के लिए ऑल इंडिया कोटा में ओबीसी के लिए 27 फीसदी रिजर्वेशन को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपीटिटिव एग्जाम के प्रदर्शन के आधार पर मेरिट की व्याख्या नहीं की जा सकती है.



नई दिल्ली : नीट के पीजी और यूजी के लिए ऑल इंडिया कोटा में ओबीसी के लिए 27 फीसदी रिजर्वेशन को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपीटिटिव एग्जाम के प्रदर्शन के आधार पर मेरिट की व्याख्या नहीं की जा सकती है. कोर्ट ने कहा कि मेरिट की परिभाषा सिर्फ कंपीटिटिव एग्जाम के प्रदर्शन तक सीमित नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को अपने अंतरिम आदेश में नीट पीजी की काउंसलिंग शुरू करने की इजाजत दी थी. कोर्ट ने उस मामले में गुरुवार को डिटेल आदेश पास किया.


सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया कि कंपीटिटिव एग्जाम के रिजल्ट के आधार पर मेरिट की इतनी संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती कि यह सिर्फ औपचारिक अवसर की समानता देता है. कॉम्पिटिटिव एग्जाम के जरिए एजुकेशनल संस्थानों के संसाधन का आवंटन भर होता है लेकिन यह किसी शख्स की संभावनाओं और उसकी क्षमता का आंकलन नहीं कर पाता. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वालों की उत्कृष्टता, क्षमता और उसकी भविष्य की संभावनाएं, कंपीटिटिव एग्जाम में रिफ्लेक्ट नहीं होती हैं.


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी विशेष वर्ग के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक लाभ परीक्षा में जाहिर नहीं होते. यह सब कुछ उस वर्ग विशेष को प्राप्त होते हैं और कहीं न कहीं परीक्षा के दौरान उनकी सफलता में इसका योगदान होता है. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में उच्च नंबर मेरिट का प्रॉक्सी नहीं हो सकता है. किसी भी मेरिट को हमेशा सोशल पहलू के साथ देखा जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि रिजर्वेशन मेरिट के विरुद्ध नहीं है. आरक्षण दरअसल सोशल जस्टिस के वितरण के असर को बढ़ाता है. मेरिट सामाजिक प्रासंगिकता है जो सामाजिक अच्छाई का एडवांटेज है और यह सामाजिक मूल्य के संदर्भ में देखा जाता है.


29 जुलाई 2021 के केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई. इसमें नीट दाखिले लिए ओबीसी के लिए 27 फीसदी और ईडब्ल्यूएस के लिए 10 फीसदी ऑल इंडिया कोटे में रिजर्वेशन दिया गया है. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के तहत नीट पीजी में रिजर्वेशन नहीं हो सकता. ईडब्ल्यूएस के लिए आठ लाख रुपये के क्राइटेरिया पर भी सवाल उठाया गया था.


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को ऑल इंडिया कोटे के तहत रिजर्वेशन देने के लिए कोर्ट की इजाजत लेने की जरूरत नहीं है. ऑल इंडिया कोटा में रिजर्वेशन देना केंद्र सरकार का नीतिगत फैसला है और उसी तरह से ज्यूडिशियल रिव्यू के दायरे में है जैसे बाकी रिजर्वेशन के मामले होते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडब्ल्यूएस कैटगरी के मामले में हम आगे सुनवाई करेंगे. अभी इस सेशन के लिए मौजूदा नियम के तहत काउंसलिंग की इजाजत दी गई है ताकि काउंसलिंग में देरी न हो. मौजूदा क्राइटेरिया में ईडब्ल्यूएस के लिए आठ लाख रुपये तक की आमदनी तय की गई है.


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हम नीट की यूजी और पीजी परीक्षा के ऑल इंडिया कोटा में ओबीसी के लिए 27 फीसदी रिजर्वेशन संवैधानिक तौर पर वैध है. इसकी वैधता बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद-15 (1) का अनुच्छेद-15 (4) और 15 (5) अपवाद नहीं है. अनुच्छेद-15 (1) समानता की बात करता है जिसमें समान अवसर बिना विषमता के देने की की बात है. जबकि अनुच्छेद-15 (4) और 15 (5) समानता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे लोगों के पहचान सुनिश्चित करने की बात करता है.


केंद्र सरकार ने 29 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाले नीट परीक्षा में एआईक्यू के तहत ओबीसी को 27 फीसदी और गरीब सवर्ण छात्रों को 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नीट पीजी का काउंसलिंग प्रक्रिया तब तक शुरू नहीं होगी जब तक केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस के लिए 8 लाख रुपये की लिमिट पर दोबारा फैसला नहीं ले लेती है.
 

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