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भाजपा के विरोध के बावजूद सीएम नीतीश कुमार जल्द बुलाएंगे जातिनिहाय जनगणना को लेकर सर्वदलीय बैठक

Published On :    17 May 2022   By : MN Staff
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘हमलोग जातीय जनगणना के शुरू से पक्षधर रहे हैं. बीच में कोरोना और चुनाव जैसे कारणों से इस पर बैठक नहीं हो पाई. अब जल्द ही सभी दलों की बैठक बुलाई जाएगी. सभी दलों के लोगों का सुझाव लिया जाएगा. साथ ही जातीय जनगणना के लिए अधिकारियों को भी लगाया जाएगा.“ नीतीश कुमार ने कहा कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जातिगत जनगणना का काम शुरू कर दिया जाएगा.



नई दिल्ली : पिछले कई सालों से ओबीसी की जातिनिहाय जनगणना का मसला उठ रहा है. हालांकि जब भी जनगणना का समय आता है सत्ताधारी लोग इससे इनकार कर देते है. इस बार की जनगणना में भी मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर ओबीसी की जनगणना कराने से इनकार कर दिया. केंद्र सरकार के इनकार के बाद भी सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव बिहार में जातिगत जनगणना कराने पर अड़े हैं. बीजेपी की नाराजगी के बाद भी नीतीश कुमार ने जातीय जनगणना कराने का ऐलान कर दिया है. तेजस्वी यादव ने हाल में ही इस मुद्दे को लेकर सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की थी.


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘हमलोग जातीय जनगणना के शुरू से पक्षधर रहे हैं. बीच में कोरोना और चुनाव जैसे कारणों से इस पर बैठक नहीं हो पाई. अब जल्द ही सभी दलों की बैठक बुलाई जाएगी. सभी दलों के लोगों का सुझाव लिया जाएगा. साथ ही जातीय जनगणना के लिए अधिकारियों को भी लगाया जाएगा.“ नीतीश कुमार ने कहा कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जातिगत जनगणना का काम शुरू कर दिया जाएगा.


तेजस्वी यादव द्वारा जातीय जनगणना के मुद्दे पर मुलाकात किये जाने को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता से जब मुलाकात हुई थी तो उन्हें भी बता दिया गया था. नीतीश कुमार ने कहा कि जातीय जनगणना को लेकर अंदरूनी तौर पर भी वो सारी चीजों को देख रहे हैं और नियम बनाकर बहुत जल्दी जातीय जनगणना के लिए काम शुरू कर दिया जाएगा.


मुख्यमंत्री जब इसका ऐलान कर रहे थे उस समय बगल में डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद भी मौजूद थे. आज जब मुख्यमंत्री इसकी जानकारी दे रहे थे तो बिहार बीजेपी के चेहरा व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद हामी भरते दिखे. मुख्यमंत्री के बोलने के दौरान हल्के तौर पर ही सही लेकिन सर हिला कर मौन सहमति देते दिखे. बता दें कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भाजपा के अलावा लगभग सभी दल एकमत हैं. भाजपा नेता जातीय जनगणना की बजाय जनसंख्या नियंत्रण को ज्यादा जरूरी मान रहे हैं.


नीतीश कुमार कह चुके हैं कि जाति आधारित जनगणना कराया जाना देशहित में है और बिहार के 13 राजनीतिक दलों के नेता पूरी तरह से सहमत हैं. साथ ही नीतीश ने बिहार में अपने स्तर पर जातीय जनगणना कराने की दिशा में आगे बढ़ने के भी संकेत दिए हैं तो बीजेपी इस पर सहमत नहीं है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि जातीय जनगणना को लेकर हम केंद्र के स्टैंड के साथ हैं. ऐसे में नीतीश कुमार बीजेपी के खिलाफ जाकर जातिगत जनगणना पर जल्द शुरू करने जा रहे हैं. सवाल उठता है कि राज्य स्तर पर होने वाली जनगणना का क्या फायदा होगा.


जेएनयू में राजनीतिक अध्ययन केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर हरीश वानखेड़े का कहना है कि देश में ओबीसी आरक्षण के लिए कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, इसलिए जाति जनगणना होनी ही चाहिए. जनगणना कराने की जिम्मेदारी राज्य की नहीं बल्कि केंद्र सरकार की होती है, लेकिन मोदी सरकार अपने वैचारिक कारणों के चलते राजी नहीं है. ऐसे में राज्य सरकारें अपने स्तर पर अपने राज्यों में जातिगत जनगणना तो करा सकती हैं, लेकिन उसकी कोई वैधता नहीं होगी. साथ ही दूसरी दिक्कत यह है कि राज्य सरकार की जातिगत जनगणना रिपोर्ट को केंद्र सरकार स्वीकार नहीं करेगा.


वानखेड़े कहते हैं कि ऐसे में नीतीश सरकार अपने स्तर पर बिहार में भले ही जातिगत जनगणना करा ले, लेकिन वैधानिक मान्यता उसकी नहीं होगी. हां यह बात जरूर है कि राज्य सरकारें जाति आधार पर जनगणना कराकर देश के सामने अपने प्रदेश का एक जातीय आंकड़ा सामने रख सकती हैं, जिसके जरिए जातिगत जनगणना मुद्दे पर एक बहस खड़ी कर सकती हैं. इससे ज्यादा उस रिपोर्ट की कोई अहमियत नहीं होगी, क्योंकि न तो राज्य अपने स्तर से ओबीसी के आरक्षण का दायरा बढ़ा सकते हैं और न ही उसे लागू कर सकते हैं.

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