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ज्ञानवापी मस्जिद केसः ‘शिवलिंग’ पर टिप्पणी करने पर डीयू के प्रोफेसर रतन लाल गिरफ्तार, मचा हंगामा

Published On :    21 May 2022   By : MN Staff
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बुधवार को रतन लाल ने बताया था, फुले, रविदास और अंबेडकर से लेकर हिंदू धर्म में आलोचना की एक लंबी परंपरा है. यहां तो मैंने इसकी आलोचना भी नहीं की है, यह सिर्फ एक ऑब्जर्वेशन है. हमारे देश में किसी भी बात को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. लोग क्या करेंगे, बस मुंह पर पट्टी बांध लें?’’ इससे पहले रतन लाल ने कहा था, ‘‘भारत में यदि आप कुछ भी बोलते हैं तो किसी न किसी की भावना को ठेस पहुंचेगी. यह कोई नई बात नहीं है. मैं एक इतिहासकार हूं मैंने अपनी पोस्ट में बहुत सुरक्षित भाषा का इस्तेमाल किया है.



नई दिल्ली : ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग पाए जाने के दावे के बाद देश में सियासत गरमाई हुई है. इसको लेकर विभिन्न दलों और संगठनों की तरफ से बयानबाजी का सिलसिला जारी है. अब ज्ञानवापी मस्जिद में मिले कथित शिवलिंग पर टिप्पणी करने पर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज के एक एसोसिएट प्रोफेसर को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.  


डीसीपी (नॉर्थ) सागर सिंह कलसी ने शुक्रवार रात उनके गिरफ्तारी की पुष्टि की. पुलिस के अनुसार, रतन लाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए और 295-ए के तहत एक कार्यकर्ता की शिकायत पर मंगलवार देर रात साइबर थाने में यह मामला दर्ज किया गया. पुलिस के मुताबिक, इतिहास के प्रोफेसर रतन लाल ने मंगलवार को कथित तौर पर शिवलिंग पर विवादित टिप्पणी की थी.


बुधवार को रतन लाल ने बताया था, फुले, रविदास और अंबेडकर से लेकर हिंदू धर्म में आलोचना की एक लंबी परंपरा है. यहां तो मैंने इसकी आलोचना भी नहीं की है, यह सिर्फ एक ऑब्जर्वेशन है. हमारे देश में किसी भी बात को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. लोग क्या करेंगे, बस मुंह पर पट्टी बांध लें?’’ इससे पहले रतन लाल ने कहा था, ‘‘भारत में यदि आप कुछ भी बोलते हैं तो किसी न किसी की भावना को ठेस पहुंचेगी. यह कोई नई बात नहीं है. मैं एक इतिहासकार हूं मैंने अपनी पोस्ट में बहुत सुरक्षित भाषा का इस्तेमाल किया है.


वहीं प्रोफेसर रतन लाल को गिरफ्तार किए जाने को लेकर बहुजन कार्यकर्ता खासे नाराज हैं. सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई की मांग उठ रही है. प्रोफेसर के वकील का कहना है कि जिन धाराओं में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है वे संज्ञेय अपराध में नहीं आते. उनपर झूठा मुकदमा किया गया है. बकौल रतन लाल के वकील महमूद प्राचा, प्रोफेसर रतन लाल के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है. एफआईआर में कोई ऐसी बात नहीं है जो संज्ञेय अपराध में आता हो. आईपीसी की धारा 153ए और 295ए के तहत गिरफ्तारी नहीं की जा सकती, पुलिस के पास वह शक्ति ही नहीं है, गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना है.


वहीं रतन लाल के समर्थकों का कहना है कि अगर उनके पोस्ट से आपत्ति है तो उनसे तर्क करते बहस करते, पुलिसिया कार्रवाई क्यों? डीयू के प्रोफेसर लक्ष्मण यादव ने लिखा- प्रोफेसर रतन लाल की बातों से असहमत होने वाले उनसे तर्क करते, लेख लिखते, बहस करते. ये भावना आहत करने का क्या तुक? ये पुलिसिया कार्यवाही क्यों? दिल्ली विश्वविद्यालय के पास दिल्ली पुलिस के साइबर सेल थाना, मौरिस नगर के सामने रतन लाल जी को रिहा करने के लिए लोग जुटने लगे हैं.


मामले पर पत्रकार दिलीप मंडल ने लोगों से रतन लाल की गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट फैकल्टी में प्रदर्शन करने का आह्वान किया हैं. दिलीप मंडल ने लिखा, प्रोफेसर रतन लाल की गिरफ्तारी के खिलाफ आधी रात को दिल्ली पुलिस के साइबर थाने पर जमा हुए सैकड़ों दलित एक्टिविस्ट, शिक्षक और छात्र, दिल्ली यूनिवर्सिटी, आर्ट फ़ैकल्टी पर शनिवार सुबह 11 बजे प्रदर्शन.


दिलीप मंडल ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि रतन लाल ने जो भी कहा व उनकी राय है, उससे भाजपा सरकार असहमत हो सकती है. गिरफ्तारी गलत है. उन्होंने ट्वीट में लिखा- ज्ञानवापी मस्जिद से जो सामग्री मिली है, उस पर इतिहासकार प्रोफेसर रतनलाल की एक राय है. वे जाने माने विद्वान हैं. बीजेपी सरकार उनसे असहमत हो सकती है लेकिन रात में दिल्ली यूनिवर्सिटी की कोठी से दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार करना गलत है.

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