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हनुमान चालीसा, अजान, हिजाब, शिवलिंग विवाद खड़ा करने का मकसद 25 मई के भारत बंद को डाइवर्ट करने की कोशिश, चौधरी विकास पटेल ने कसा तंज

Published On :    21 May 2022   By : MN Staff
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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने कहा, आजादी के 75 साल में देश में जानवरों, कुत्तों और हिजड़ों की गिनती हुई, मगर देश की आधी से अधिक आबादी ओबीसी कि अभी तक गिनती नहीं. यह एक बहुत बड़ा मुद्दा देश में है. ओबीसी कि गिनती ना होने की वजह से पिछड़े वर्ग के लोगों की गिनती ब्राह्मण हिंदू के नाम पर करते रहे. इससे साड़ेतीन फीसदी ब्राह्मण पिछड़े वर्ग के लोगों का समर्थन लेकर के बहुसंख्यक होते हैं देश की सत्ता और व्यवस्था पर कब्जा करते हैं और पिछड़े वर्ग को ही उनके हक अधिकार से वंचित करने का काम करते है.



लखनऊ : जब-जब पिछड़ा वर्ग अपने हक अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए सामने आया है तब-तब ब्राह्मणवादियों द्वारा उस लड़ाई को डाइवर्ट करने की कोशिश की गई. अभी 25 मई के भारत बंद को भी डाइवर्ट करने की कोशिश की जा रही है. चाहे वह हनुमान चालीसा, अजान, हिजाब या शिवलिंग विवाद का मामला हो. यह जो तमाम विवाद खड़े करने के पीछे का मकसद ओबीसी को उसकी वास्तविक लड़ाई से भटकाने का मकसद है. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने शुक्रवार को यह बात कहीं.


उन्होंने कहा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के माध्यम से 25 मई 2022 को ओबीसी की जाति आधारित जनगणना सहित कई मुद्दों को लेकर के भारत बंद का आह्वान किया गया है. आजादी के 75 साल में देश में जानवरों, कुत्तों और हिजड़ों की गिनती हुई, मगर देश की आधी से अधिक आबादी ओबीसी कि अभी तक गिनती नहीं. यह एक बहुत बड़ा मुद्दा देश में है. ओबीसी कि गिनती ना होने की वजह से पिछड़े वर्ग के लोगों की गिनती ब्राह्मण हिंदू के नाम पर करते रहे. इससे साड़ेतीन फीसदी ब्राह्मण पिछड़े वर्ग के लोगों का समर्थन लेकर के बहुसंख्यक होते हैं देश की सत्ता और व्यवस्था पर कब्जा करते हैं और पिछड़े वर्ग को ही उनके हक अधिकार से वंचित करने का काम करते है.


चौधरी विकास पटेल ने कहा, यह पहली बार नहीं हो रहा है 1992 के दौर में पिछड़े वर्ग के लोग मंडल कमीशन की लड़ाई लड़ रहे थे. उस समय भी बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि का मुद्दा बीजेपी, बजरंग दल, हिंदू परिषद के द्वारा खड़ा किया गया था. जब मंडल कमीशन लागू हुआ और मंडल की केवल एक सिफारिश लागू हुई. मंडल कमीशन को उस समय के ब्राह्मण खींचकर सुप्रीम कोर्ट ले गए.


पिछड़ा वर्ग मोर्चा के नेता ने कहा, 16 नवंबर 1992 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया 52 परसेंट ओबीसी को केवल 27 परसेंट आरक्षण दिया गया और 27 परसेंट में भी क्रिमिलेअर लगा दिया गय 3743 जातियों को मंडल ने ओबीसी माना था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में केवल 1900 जातियों को ही ओबीसी माना गया. 52 फीसदी ओबीसी को 27 आरक्षण देना और उसमें भी क्रीमिलेयर लगाना और मंडल कि केवल एक सिफारिश लागू करना और 3743 जातियों में से केवल 1998 जातियों को ही ओबीसी मानना यह एक बहुत बड़ी धोखेबाजी ओबीसी के साथ में 1992 में हुई. ब्राह्मणवादियों ने सोचा कि अगर ओबीसी के लोग इस धोखेबाजी को समझेंगे और इसके खिलाफ काम करेंगे तो ओबीसी को उनका हक देना पड़ेगा.


उन्होंने कहा, 52 परसेंट ओबीसी का समर्थन लेकर ब्राह्मणवादी देश की सत्तापर कब्जा किए हुए है. ब्राह्मणवादियों को सत्ता और व्यवस्था में ऑक्सीजन देने का काम ओबीसी कर रहा है. अगर वह भी इसी वहां से कटता है तो ऑक्सीजन बंद हो जाएगा. इसलिए ब्राह्मणवादियों ने सोचा कि अगर ओबीसी अपने हक अधिकार की लड़ाई लड़ेगा तो फिर उनको ऑक्सीजन कौन देगा. ओबीसी खुद ही हुक्मरान हो जाएगा. इसलिए ब्राह्मणों ने ओबीसी के लोगों को उस लड़ाई से डाइवर्ट करने का कोशिश किया. ओबीसी के लोगों को विनय कटियार, कल्याण सिंह, उमा भारती, प्रवीण तोगड़िया जैसे पिछड़े वर्ग के नेताओं को सामने करके बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि मुद्दे के विवाद में उलझाने का काम किया. अपने हक अधिकार, अपने बच्चों की लाखों नौकरियों के लिए ओबीसी के लोगों ने संसद भवन घेरने के बजाय बाबरी मस्जिद को घेरने का काम किया और 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई.


पिछड़ वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, मंदिर के समर्थन में कोर्ट का फैसला आया, लेकिन जब मंदिर बन रहा है तो एक भी ओबीसी को मंदिर के ट्रस्ट में नहीं रखा गया. इससे यह बात साबित होती है कि पिछड़े वर्ग को इस्तेमाल करने के लिए पिछड़े वर्ग को उनके हक अधिकार से वंचित करने के लिए उन्हें मंदिर और मस्जिद की लड़ाई में शामिल किया गया था. यह पिछड़े वर्ग के मुद्दे को डाइवर्ट करने के लिए किया गया था. एक मुद्दा 2011 में आया जब 2010 में भारत मुक्ति मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय वामन मेश्राम साहब ने पूरे देश भर में देश में जानवरों की गिनती होती है मगर ओबीसी की गिनती नहीं होती है, इस मुद्दे पर देशभर में 51000 कार्यक्रम लिए. जब यह कार्यक्रम देशभर में वामन मेश्राम साहब ने लिए तो यह बात तमाम पिछड़े वर्ग के नेताओं तक पहुंची. तब पिछड़े वर्ग के नेताओं ने उस समय देश की पार्लियामेंट को बंद करने का काम किया.


ओबीसी के नेता ने कहा, इससे बीजेपी और कांग्रेस में चिंतन शुरू कि अगर हम जाति आधारित गिनती करते हैं तो पिछड़े वर्ग को उनका हक हिस्सा मिलेगा. इससे ब्राह्मणों का वर्चस्व खत्म हो जाएगा. अगर गिनती नहीं करते हैं तो पिछड़े वर्ग के लोग वामन मेश्राम के साथ चले जाएंगे. दोनों तरीके से खतरा है. इसलिए उस समय ब्राह्मणवादियों ने पिछड़े वर्ग के मुद्दे को डाइवर्ट करने के लिए अन्ना हजारे और बाबा रामदेव का इस्तेमाल करने का काम किया. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नाम पर अन्ना हजारे और बाबा रामदेव को लेकर के आए. आरएसएस, बीजेपी और कांग्रेस के द्वारा किया देश भर में इस बात का प्रचार किया गया कि देश में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है इसलिए जनलोकपाल आना चाहिए. अन्ना हजारे और बाबा रामदेव का उपयोग करके ओबीसी की जाति आधारित गिनती के मुद्दे को 2011 में भी दबाने का काम किया गया.


विकास पटेल ने कहा, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उस वक्त पार्लियामेंट में आश्वासन दिया था कि हम जाति आधारित जनगणना करेंगे. लेकिन केवल सोशियो इकोनामिक सर्वे किया गया और उसकी रिपोर्ट भी पब्लिश नहीं की गई. इससे दोबारा ओबीसी के साथ धोखा हुआ. अभी हम ओबीसी के मुद्दे को लेकर के भारत बंद करने जा रहे हैं. आप देख रहे होंगे जब से हम भारत बंद की तैयारी कर रहे हैं कभी हिजाब, हनुमान चालीसा तो कभी अजान का विवाद शुरू हो जाता है. आज की तारीख में शिवलिंग का विवाद ज्यादा जोर शोर से चल रहा है. ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर तमाम प्रकार के विवाद खड़े किए जा रहे है. सवाल यह है कि क्या यह विवाद वास्तव में विवाद हैं या जानबूझकर के यह विवाद खड़े किए जा रहे हैं.


उन्होंने कहा, भारतीय संविधान में क्या खाना है क्या पहनना है अपने धर्म को धर्म जैसा कहता है उस तरीके से मानना है अगर इसकी इजाजत दिया है. यह काम आज से नहीं हो रहा है. हिजाब बहुत दिन से लोग पहन रहे हैं और तमाम लोग बड़ा-बड़ा घूंघट पहनते है. इसके अलावा माइक लगा करके अलग-अलग धर्म के लोग उनके रीति रिवाज के हिसाब से काम करते हैं. अजान भी आज से नहीं बहुत लंबे समय से हो रहा है. इस पर कोई विवाद नहीं था. लेकिन यह जो सारे विवाद इसलिए खड़े किए जा रहे हैं. वह इसलिए कि अगर ओबीसी को मुसलमानों से नहीं भिडाया गया तो जाति आधारित गिनती का जो आंदोलन हो रहा है, संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी का जो आंदोलन हो रहा है इस आंदोलन में ओबीसी शामिल हो जाएगा. इससे ब्राह्मणवादियों ने उसके हक अधिकार पर जो कब्जा किया है वह देना पड़ेगा.


ओबीसी के युवा नेता ने कहा, इसलिए ओबीसी को मुसलमानों से लड़ाने के काम पर लगातार जारी रखा जाए. इसी षड्यंत्र का हिस्सा है अभी जो शिवलिंग का विवाद चल रहा है जो एक फव्वारा है. बीच में वजू मतलब हाथ धोने के लिए की व्यवस्था के लिए फव्वारा बनाया जाता है. जितनी भी पुरानी मस्जिदें हैं उसमें लगभग बीच में वह फव्वारा खड़ा किया गया है. पानी के फव्वारे को शिवलिंग बताकर विवाद खड़ा किया जा रहा है. ताकि ओबीसी के लोगों के वास्तविक लड़ाई के लिए 25 मई को भारत बंद होने जा रहा है. जाति आधारित जनगणना, एमएसपी की गारंटी कानून को लेकर उससे ओबीसी का ध्यान हटाया जा सके.


चौधरी विकास पटेल ने कहा, सोचने वाली बात यह है कि केवल ओबीसी के जो जाहिल लोग हैं उनका ध्यान नहीं हट गया है बल्कि जो जागृत लोग हैं उनका भी ध्यान इस मुद्दे की वजह से हट गया है. क्योंकि वे सोशल मीडिया में कहने में बिजी हो गए है कि वह शिवलिंग ही है. जो फव्वारा है. जागृत लोग उसका विरोध करने में शामिल हो गए कि नहीं वह फव्वारा है शिवलिंग नहीं है. दोनों तरफ से जो उसका विरोध कर रहे हैं और जो समर्थन कर रहे है वह भी ब्राह्मणवादियों के झांसे में फंस गए है. क्योंकि ओबीसी को असली प्रचार 25 मई के भारत बंद, जाति आधारित गिनती, एमएसपी गारंटी कानून आदिं सहीत जो मुद्दे लिए गए हैं उन मुद्दों का प्रचार करना था. लेकिन ओबीसी ब्राह्मण वादियों के साजिश में फंसे गए. इसकी वजह से ओबीसी लोग शिवलिंग है कि नहीं है इस मुद्दे का प्रचार  सोशल मीडिया में कर रहे है. ओबीसी, एससी, एसटी, और माइनारटीज के लोगों को इससे सतर्क होने की जरूरत है.


पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, 25 तारीख के भारत बंद को कमजोर करने के लिए ब्राह्मणवादियों के द्वारा यह साजिश की जा रही है. 25 तारीख के बाद यह मामला शांत हो जाएगा. इसलिए पिछड़े वर्ग, एससी-एसटी और तमाम लोगों को इस बात को समझने की जरूरत है कि आज की तारीख में उनके लिए मंदिर का मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उनके बच्चों की नौकरियों, उनके रिजर्वेशन का मुद्दा महत्वपूर्ण है. किसानों को एमएसपी की गारंटी का मुद्दा महत्वपूर्ण है. इस बात को समझने की जरूरत है. क्योंकि मंदिर बनेगा तो मंदिर की कमाई ब्राह्मण ही खाएगा. इसलिए हमें मंदिर की लड़ाई नहीं लड़ना है. मंदिर की लड़ाई ब्राह्मण लड़े. हमें कोई ऑब्जेक्शन नहीं है. उनको भी बाबा साहब ने अधिकार दिया है. लेकिन हमें अपने हक अधिकार की लड़ाई को लड़ना है. इस बात को हम लोगों को ध्यान में रखने की जरूरत है. और इस बात को ध्यान में रखते हुए हम लोगों को भारत बंद का प्रचार और प्रसार करने की जरूरत है.

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