×

भारत की चिंताजनक तस्वीर...

Published On :    11 Jul 2018   By : MN Staff
साझा करें:

चंद लोगों की मुट्ठी में देश, भारत में आर्थिक असमानता के बीच बढ़ती अमीरी-गरीबी की खाई. -रिपोर्ट



नई दिल्ली: गैर सरकारी संगठन ऑक्सफेम ने अपनी एक रपट में कहा कि भारत में आर्थिक असमानता बीते तीन दशकों से बढ़ रही है, गरीब और गरीब हो रहे हैं। 


रिपोर्ट के अनुसार हालत यह है कि देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीय अरबपतियों के खाते में है। पांच साल पहले इन अरबपतियों का हिस्सा 10 प्रतिशत था। 


बीते गुरुवार को जारी ‘द वाइडेनिंग गैप्स इंडिया इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2018’ नाम की इस रपट में कहा गया है कि आय, उपभोग और धन के मानकों पर भारत विश्व के असमान स्थिति वाले देशों में शुमार है और इन हालातों के लिए सरकारों की असंतुलित नीतियों को जिम्मेदार बताया गया है। 


इसमें कहा गया है कि भारत में धनाढ्यों ने देश में सृजित संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा ‘सांठ गांठ वाले पूंजीवाद’ या ‘बपौती’ में हासिल किया है, वहीं आय पिरामिड के नीचे के तबके का आय में हिस्सा लगातार कम होता जा रहा है।


ऑक्सफेम इंडिया की सीईओ निशा अग्रवाल ने कहा, ये असमानताएं 1991 के बहुप्रचारित उदारीकरण के दौरान अपनाए गए सुधार पैकेजों तथा उसके बाद अपनाई गई नीतियों का परिणाम हैं। रपट में कहा गया है कि ताजा अनुमानों के अनुसार भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के 15 प्रतिशत के बराबर है। 


यह केवल पांच साल पहले ही जीडीपी के 10 प्रतिशत के बराबर थी। इसके अनुसार 2017 में भारत में 101 अरबपति थे जिनकी हैसियत 65 अरब रुपये या उससे अधिक है। इस रिपोर्ट के लेखक प्रो. हिमांशु का कहना है, ‘जाति, धर्म, क्षेत्रीयता और लिंग के आधार पर बंटे भारत के संदर्भ में आर्थिक असमानता और अधिक चिंतित करने वाली है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते विकास के दौर में आर्थिक असमानता को रोका जा सकता है। लैटिन अमेरिका और पूर्व एशियाई देशों में आर्थिक असमानता कम और घट रही है। जबकि भारत उन देशों की कतार में खड़ा है जहां आर्थिक असमानता पहले से बढ़ी हुई है तथा जो और तेजी से बढ़ रही है। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अचानक से नहीं हो रहा है। श्रम की जगह पूंजी को समर्थन देने वाली विशिष्ट नीतियों और अकुशल श्रम की जगह कुशल श्रम को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चुनाव भारत में इस विकास के लिए जिम्मेदार है। 


ऑक्सफेम इंडिया की सीईओ निशा अग्रवाल ने कहा, ‘धन और विरासत कर’ लागू कर विकास की इस धारा को बदला जा सकता है और उस कर का इस्तेमात गरीबों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर किया जाए। खासकार गरीब बच्चों के विकास को ध्यान में रखते हुए इस कर को खर्च किया जाए।


बीते जनवरी महीने में दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक से ठीक पहले ऑक्सफेम इंडिया ने एक और रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि भारत में 2017 में कुल संपत्ति के सृजन का 73 प्रतिशत हिस्सा केवल एक प्रतिशत अमीर लोगों के हाथों में है। 


सर्वेक्षण में भारत की आय में असामनता की चिंताजनक तस्वीर पेश की गई थी। भारत के संबंध में इसमें कहा गया है कि पिछले साल 17 नए अरबपति बने है। इसके साथ अरबपतियों की संख्या 101 हो गई है। 67 करोड़ भारतीयों की संपत्ति में सिर्फ एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 


रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में भारतीय अमीरों की संपत्ति 4.89 लाख करोड़ बढ़कर 20.7 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह 4.89 लाख करोड़ कई राज्यों के शिक्षा और स्वास्थ्य बजट का 85 प्रतिशत है।

संपर्क करें

आपके पास अगर कोई महत्वपुर्ण जानकारी, लेख, ओडीयो, विडीयो या कोई सुझाव हैै तो हमें नीचे दिये ई-मेल पर मेल करें.:

email : news@mulniwasinayak.com


MN News On Facebook

लोक​प्रिय
मध्य प्रदेश में गुजरात मॉडल की सच्चाई...
विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा-कांग्रेस का गठबंधन तयः मानक
लोकतंत्र में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं-सुप्रीम कोर्ट
देश में नफरत की आगनफरत फैलाने में यूपी नंबर वन, गुजरात नंब
अब राजस्थान के शिक्षाकर्मी जुमलेबाजी के शिकार...
केवल आंकड़ों में शौच मुक्त हुआ भारत, हकीक़त है कुछ और...
भारत में प्रदूषण से 60 हजार लोगों की मौत...
एसबीआई ने जारी किया 70,000 कर्मचारियों को दिया गया पैसा वापस
भारत को फिर लगा करारा झटका आईएमएफ ने घटाया भारत का जीडीपी
सोनिया गांधी को ‘विदेशी कहने पर मायावती ने राष्ट्रीय कॉर
पनामा पेपर्स लीक मामले में 1140 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति.
चुनाव से पहले केन्द्र का कई निशाना
रोड निर्माण कंपनी से ITकी रेड, 163 करोड़ रूपये कै श,100 किलो सोना
नौकरियों के मुद्दे पर घिरी सरकार मोदी ने बुलाई अर्थशास्त
सुप्रीम कोर्ट ने कहा भीड़ द्वारा हत्या रोकने के लिए क़ानून
भारत में ब्राह्मणवाद के खिलाफ एक क्रांति का उदय...
बचत खाते में न्यूनतम शेष नहीं रखने पर पीएनबी ने खाता धारक
विदेशी छात्रों को निजी कंपनियां मुहैया कराएंगी हॉस्टल
मंदिर,धर्म और जाति पर बहस से नहीं पैदा होंगी नौकरियां-सैम
सीएम का करीबी बताने वाले ‘बुंदेलखंड के ब्राह्मण योगी’ ने
COPYRIGHT

All content © Mulniwasi, unless otherwise noted or attributed.


ABOUT US

It is clear from that the lack of representation given to our collective voices over so many issues and not least the failure to uphold the Constitution - that we're facing a crisis not only of leadership, but within the entire system. We have started our “Mulnivasi Nayak“ on web page to expose the exploitation and injustice wherever occurring by the brahminical forces & awaken the downtrodden voiceless & helpless community.

Our Mission

Media is playing important role in democracy. To form an opinion is the primary work in any democracy. Brahmins and Banias have controlled the fourth pillar of the democracy, by which democracy is in danger. We have the mission to save the democracy & to make it well advanced in common masses.

© 2018 Real Voice Media. All Rights Resereved
 e - Newspaper