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वामन मेश्राम ने चेताया, 15 अक्टूबर 2022 को नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय पर एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जाएंगे

Published On :    2 Jul 2022   By : MN Staff
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आरएसएस के लोगों ने संविधान के विरोध में काम किया है. इसकी वजह से भारत के संविधान की प्रतिष्ठा खतरें में पड़ गई है. इसलिए नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय पर एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जाएंगे.



पूना : आरएसएस के लोगों ने संविधान के विरोध में काम किया है. इसकी वजह से भारत के संविधान की प्रतिष्ठा खतरें में पड़ गई है. इसलिए नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय पर एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जाएंगे. भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने बृहस्पतिवार को यह ऐलान किया है. वे गुजरात राज्य के गांधीधाम जिले के कच्छ में भारत मुक्ति मोर्चा और बहुजन क्रांति मोर्चा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.


वामन मेश्राम ने कहा कि रोहतक में डीएनए परिषद का आयोजन किया गया था. मगर यह परिषद ना हो इसके लिए आरएसएस और बीजेपी के लोगों ने हमें ड़राने कि कोशिश की. हम लोगों ने जो हॉल बुक किया उन लोगों ने हॉल वाले पर दबाव डालकर रद्द करवाया. उन्होंने कहा, हरियाणा सरकार जो आरएसएस की बनाई हुई सरकार है, वहा संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करते हुए मुझे वहा कार्यक्रम करने नहीं दिया. इसलिए महाराष्ट्र में नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय पर 15 अक्टूबर 2022 को एक लाख लोगों का मोर्चा लेकर जाएंगे. कानून और संविधान के दायरे में रहकर लेके जाएंगे. 


कोई सोच भी नहीं सकता कि ऐसा कोई कर सकता है. इसके अलावा वामन मेश्राम ने देशभर में 9 अगस्त को मूलनिवासी दिवस के रूप में मनाने की कार्यकर्ताओं को अपील की है. उन्होंने कहा कि जब मूलनिवासी दिवस मनाया जाएगा तो लोग पूछेंगे विदेशी कौन है. फिर बोलना पड़ेगा कि ब्राम्हण विदेशी है.


संगठन के विस्तार के बारे में बताते हुए वामन मेश्राम ने कहा, आज सारे देश भर में इतना बड़ा विशाल आंदोलन खड़ा हो गया है. इस विशाल आंदोलन खड़ा करने के लिए मैं 18 साल कि उम्र से लगा हुआ हूं. हम लोगों ने लगातार इतना बड़ा विशाल आंदोलन खड़ा करने के लिए रात दिन कोशिश कि है. इस कोशिश का नतीजा निकला कि आज 31 राज्यों में 500 से ज्यादा जिलों, 4000 से ज्यादा तहसीलों में 22000 से ज्यादा ब्लॉक में और डेढ़ लाख से ज्यादा गांव में संगठन का जाल फैला हुआ है. कुछ लोगों को लग सकता है कि ऐसा नहीं है. इसलिए मै आपको सबूत के तौर पर कुछ बातें बताना चाहता हूं ताकि सत्य का पता चले.


वामन मेश्राम ने कहा, आप लोगों को याद होगा हम लोगों ने 5 मार्च 2019 में 13 मई रोस्टर के विरोध में और 200 पॉइंट रोस्टर लागू करने के लिए भारत बंद किया था. यह बड़े पैमाने पर भारत बंद हुआ. इसका इसर यह हुआ कि पीएम मोदी को संसद में संविधान संशोधन करके 13 पॉइंट रोस्टर रद्द करना पड़ा और 200 पॉइंट रोस्टर लागू करना पड़ा. आप जानते हो नरेंद्र मोदी कितना अकडू आदमी है. अकडने वाले नरेंद्र मोदी जैसे आदमी को हमने सीधा किया और संसद में संविधान संशोधन करने के लिए मजबूर किया. भारत के इतिहास में ऐसे आंदोलन से संसद में संशोधन किया गया हो, ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है.


आपको याद होगा 1964 में दादासाहेब गायकवाड ने जमीन के बटवारे के लिए 400000 लोगों को जेल में डालने का सत्याग्रह किया था. 4 लाख लोगों को जेल में डाला गया, लेकिन अभी तक जमीन का बटवारा नहीं हुआ. हम आप लोगों को बताना चाहते है ताकि आपको पता चले कि हमने क्या करके दिखाया. उन्होंने कहा, 29 जनवरी 2020 को हमने सीएए के विरोध में भारत बंद किया. इसे असम में लागू किया गया था. अ


सम में  19 लाख 48 हजार लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित करने का कार्य शुरू किया गया था. जिसमें 5 लाख मुसलमान और 14 लाख 48 हजार एससी, एसटी और ओबीसी के लोग थे. असम के लोग बामसेफ के लोगों से संपर्क कर कह रहे थे कि इसमें आप हमारी मदद करों. बामसेफ के लोगों ने उनसे कहा कि असम में हमारा संगठन उतना मजबूत नहीं है, लेकिन देशभर में मजबूत. हम यहा आपकी मदद नहीं कर सकते, मगर एक आदमी है जो आपकी मदद कर सकता है.


वामन मेश्राम ने आगे कहा, बामसेफ के लोगों ने मेरा नाम उन्हें बताया. वो लोग मुझसे दिल्ली मिलने आए. उन्होंने मुझे बताया कि सीएए से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या लाखों में है. मैने असम की राजधानी गुवाहाटी में बड़ा कार्यक्रम किया. मैने उनको पूंछा कि जब असम में बांग्लादेशीयों को खदड़ने के लिए आंदोलन चल रहा था तब आप एससी, एसटी और ओबीसी के लोग क्या कर रहे थे? उन्होंने जवाब दिया कि हम बांग्लादेशी नागरिकों को खदेड़ने के आंदोलन में शामिल थे. 


मैने उनको पूंछा कि अब खदेड़ने का आंदोलन शुरू हो गया है आपकी मांग तो पूरी हो रही है, अब आपकी क्या समस्या है. इस पर उन्होंने कहा कि अब हमारा ही नंबर लगा दिया है. आंदोलन चलाने के लिए हमारा साथ लिया और हमारे ही कम से कम 1448000 लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यानी हमें भारत के नागरिक नहीं मान रहे है.


उन्होंने आगे कहा, नागरिकता से वंचित किए हुए लोगों के घर और संपत्ति पर सरकार कब्जा कर लेगी. अब उन्हें डिटेंशन कैंप में यानी जेल में ड़ाल दिया जाएगा. मैंने उनको कहा कि यह भयंकर मामला है और आपके बस का नहीं है. मैंने उनसे वादा करके दिल्ली मं सीएए के विरोध में 29 जनवरी 2020 को भारत बंद का ऐलान किया. यह 5 मार्च 2019 के भारत बंद से भी बड़ा भारत बंद हो गया. क्योंकि 5 मार्च 2019 के आंदोलन में मुसलमान शामिल नहीं थे. 29 जनवरी 2020 भारत बंद में पूरे देशभर में मुसलमान शामिल हो गए. क्योंकि असम में 500000 मुसलमानों को नागरिका की सूची से हटा दिया गया था. उन्होंने सोचा कि अगर सीएए पूरे देशभर में लागू होता है तो देश के करोड़ों मुसलामनों पर इसकी आंच आएगी. इसलिए 29 जनवरी के भारत बंद में बड़ी संख्या में मुसलमान शामिल हुए थे.


वामन मेश्राम ने आगे कहा, इसका यह परिणाम हुआ कि आएसएस, बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद को लोग चिंता में पड़ गए. उन्होंने सोचा कि हमने 50 साल में एससी, एसटी और ओबीसीं के लोगों को मुसलमानों को विरोध में लड़ाया, उन्हें भड़का कर उनका फसाद के लिए इस्तेमाल किया. अब वामन मेश्राम ने मुसलमानों को एससी, एसटी और ओबीसी के साथ जोड़ दिया. इससे हमारी 50 साल की मेहनत पर पानी फेर दिया. 29 जनवरी 2020 के भारत बंद का पहला फौरी परिणाम यह हुआ कि सीएए का कानून अभी ठप्प पड़ा हुआ है. अभी तक केंद्र सरकार ने लागू नहीं किया है. यह है हमारे संगठन शक्ति की ताकत.


उन्होंने कहा, बीजेपी और आरएसएस के लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी बहुत शक्तिशाली नेता है. चलो मान लेता हूं. नरेंद्र मोदी बहुत ताकतवर और शक्तिशाली नेता है, लेकिन उसका कानून लागू करने से हमने रोक दिया तो हम कितने ताकतवर है. मोदी ने सीएए को कचरा पेटी में डाल के रखा हुआ है. भारत बंद के बाद से सीएए कचरे के पेटी में पड़ा हुआ है. मैंने मोदी को चेतावनी दी है कि दोबारा वहां से नही निकालना. अभी तक नहीं निकाला है और निकाले भी नहीं दूंगा. सीएए के खिलाफ जो हमने भारत बंद किया था उसमें अब 19 लाख 48 हजार लोगां में से सिफ 1006 लोग रह है. बाकी लोगों को नागरिकता के प्रमाणपत्र दे दिए गए है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद एक आरटीआई में यह जानकारी दी है. यह हमारे संगठन की ताकत है.


उन्होंने आगे कहा, 25 मई 2022 को ओबीसी की जाति आधारित गिनती के लिए भारत बंद किया. नरेंद्र मोदी कहता है मैं ओबीसी का हूं, चाय बेचने वाला हूं. हमने सोचा था कि मोदी प्रधानमंत्री है तो ओबीसी की गिनती करने का निर्णय लेंगा. मगर उसने नहीं लिया. इससे सिद्ध होता है कि मोदी के पास निर्णय लेने का पावर नहीं हैं. निर्णय लेने का अधिकार आरएसएस के पास है. अन्यथा जो प्रधानमंत्री कहता है कि मैं ओबीसी का हूं तो ओबीसी की गिनती करने का निर्णय लेने का अधिकार मोदी के ही पास है. मगर नरेंद्र मोदी फैसला नहीं कर रहा है. इससे सिद्ध होता है कि नरेंद्र मोदी के पास फैसला करने का अधिकार नहीं है. फैसला करने का अधिकार आरएसएस के पास है. आरएसएस ने मोदी को चेहरा दिखाने वाला प्रधानमंत्री बनाया है.


वामन मेश्राम ने कहा, बाबासाहेब आंबेडकर ऐसे लोगों के लिए कहते हैं नॉमिनेटेड प्राइम मिनिस्टर यानी नामधारी प्रधानमंत्री. उन्होंने कहा एक होता है नामधारी और एक होता है कामधारी. नरेंद्र मोदी कामधारी नहीं बल्कि नामधारी प्रधानमंत्री है. मोदी को आरएसएस के ब्राम्हणों ने नॉमिनेटेड किया हुआ है. बाबासाहेब आंबेडकर इसी बात को लेकर गांधी जी के साथ लड़ाई झगड़ा कर रहे थे कि हमे नॉमिनेटेड प्रतिनिधित्व नहीं चाहिए. हमें सच्चा प्रतिनिधित्व चाहिए. अगर लोकतंत्र आएगा तो सच्चा प्रतिनिधित्व का अधिकार मिले यह लड़ाई थी. गांधी जी नॉमिनेटेड रिप्रेजेंटेशन तो बाबासाहेब आंबेडकर रियल प्रेजेंटेशन की बात करते थे. नरेंद्र मोदी आरएसएस द्वारा नॉमिनेटेड किया हुआ है. इसलिए पिछड़े वर्ग का होने के बाद भी पिछड़े वर्ग गिनती करने का फैसला नहीं ले पा रहा है. इससे यह बात सिद्ध होती है.


उन्होंने कहा, हमने ओबीसी की जाति आधारित गिनती के मुद्दे पर भारत बंद किया. आरएसएस के लोग ओबीसी जाति आधारित गिनती का विरोध करते हैं. अगर नरेंद्र मोदी ने विरोध किया तो वह प्रधानमंत्री रहेगा या नहीं रहेगा यह दों बाते है. समर्थन करेगा तो जाति आधारित गिनती तो होगी मगर प्रधानमंत्री पद नहीं रहेगा. इस परिस्थिति की वजह से हमारी लड़ाई जारी है और दोबारा ओबीसी की जाति आधारित गिनती कि लिए भारत बंद किया जा सकता है. 2024 तक भारत बंद किया जा सकता है. 


2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की और से मोदी चुनकर ना आए इसका पूरा ख्याल रखेंगे. क्योंकि ओबीसी के ही लोग मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए सहयोग कर रहे है. ओबीसी के लोगों ने सोचा कि मोदी ओबीसी है इसलिए प्रधानमंत्री बनने के बाद ओबीसी की गिनती करेगा, इसलिए ओबीसी के लोगों ने मोदी के नाम पर बीजेपी को वोट दिया. मोदी ने ओबीसी जाति आधारित गिनती नहीं कि यह जानकारी जब लोगों में जाएगी तो मोदी को ओबीसी का वोट नहीं मिलेगा.


वामन मेश्राम ने कहा, मोहम्मद साहब के खिलाफ नूपुर शर्मा द्वारा कि गई विवादित टिप्पणी के माध्यम से देशभर में मुसलमानों को कॉर्नर करने का काम किया जा रहा है. उससे देश के टुकड़े होने का खतरा पैदा हो गया. आजादी के आंदोलन में मुसलमानों को कॉर्नर करने का काम गांधी और नेहरू के द्वारा हुआ था. इसीका परिणा था कि 14 अगस्त 1947 को भारत के टुकड़े होकर पाकिस्तान बना. यदि दोबारा मुसलमानों को इसी तरह से बीजेपी और आरएसएस के द्वारा कॉर्नर किया गया तो दोबारा देश के टुकड़े होंगे. 14 अगस्त 1947 को टुकड़े हो गए. तब हमारे आंदोलन की ताकत इतनी बड़ी नहीं थी कि हम रोक लगा सके. अभी भारत के 1 इंच का टुकड़ा ब्राह्मणों के द्वारा होने नहीं देंगे. अब हमारे पास है इसको रोक लगाने की ताकद है. अब नहीं होने देंगें. पूरी ताकत से इसको रोकेंगे.


उन्होंने आगे कहा, इसलिए हमने 25 जून 2022 को भारत के टुकड़े करने की साजिश को विफल करने के लिए भारत बंद किया था. बहुत लोगों ने हमको सलाह दिया की एक महिने में दोबारा भारत बंद मत करो. लेकिन संगठन शक्ति के बल पर किया. दूनिया में माना जाता है कि कोई भी बड़ा परिवर्तन संगठन शक्ति के बल पर किया जा सकता है. हमने यह शक्ति भारत बंद करने तक बढ़ाई. 


इससे आएसएस के लोगों की चिंता बढ़ गई कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री हमारे, कई राज्यों में विरोधी पार्टी के नेता हमारे, केंद्र की सरकार हमारी, संसद में 303 लोगों का बहुमत हमारा और भारत बंद वामन मेश्राम का. अरे भाई ईवीएम में चोरी करके आप बहुमत हासिल कर सकते हो. लेकिन जिन लोगों के वोटों की चोरी आपने ईवीएम में की वह आदमी मेरे साथ है. तुम लोगों को हम लोग सड़कों पर निपट देंगे. क्योंकि सड़कों पर लोग हमारे साथ है. वोट की चोरी तो आपने कर लिया पर आदमियों की चोरी कैसे करोगे.


वामन मेश्राम ने कहा, आज बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद की समस्या है केंद्र सरकार हमारी, संसद में बहुमत हमारा, कई राज्यों के मुख्यमंत्री हमार,े विरोधी पार्टी के नेता मगर भारत बंद वामन मेश्राम का. यह उनकी चिंता है. वे आमने- सामने मेरे साथ लड़ नहीं सकते इसलिए उन्होंने हमारे संगठने के कार्यकर्ताओं के माध्यम से संगठन में तोड़फोड़ करने का काम शुरू किया. कहेंगे कि हम तो कुछ नहीं कर रहे है यह तुम्हारे ही लोग है. इस ग्राउंड के नजदीक ही वीएल मातंग नाम का आदमी रहता है. वह पहले नंबर का तोड़फोड़ करने वाला आदमी है और 15 दिन से घर से गायब है. 


मैने सोचा की वह शेर की औलाद है तो इधर-उधर की बजाए उसके घर के पास ही कार्यक्रम करता हूं. मार्च आखिर तक मातंग मुझे कह रहा था कि नारायण गरवा को सारे कच्छ की जिम्मेदारी दे दों जैसे पहले दी गई थी. मैंने कहा नारायण गरवा को काम करने दो नियंत्रण मेरे पास ही रखूंगा. उसके समझ में आया कि कच्छ का नियंत्रण वामन मेश्राम के पास रहेगा तो हमने सारे कच्छ में जो भ्रष्टाचार का बोलबाला कर रखा है उसका भंड़ाफोड हो जाएगा.


संगठन में तोड़फोड करने वाले गद्दारों को आड़े हाथो लेते हुए वामन मेश्राम ने का कि भांजी राठौड़ भी इधर ही आस- पास रहता है. उस दया करके इसको पहले मैंने उसके पिछवाड़े पर लात मारा था. निशा के पिता की वजह मैने उसको माफ कर संगठन में लाया और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी जिम्मेदारी लगाया. जो इस लायक नहीं था. वह भी गद्दारों के समर्थन में खड़ा हो गया. देशभर में जहां जहां भी कोई गद्दार है उसके घर के पास ही कार्यक्रम करूंगा.


वामन मेश्राम ने कहा, हरियाणा रोहतक में मुझे कार्यक्रम करने के लिए ब्राह्मणों ने रोका. रोकने की वजह से 13 करोड़ लोगों ने मेरा भाषण सुना. मैने इसके लिए ब्राह्मणों को धन्यवाद दिया क्योंकि इस भाषण को एक करोड़ लोग भी सुनने वाले नहीं थे. हरिणायाक के ब्राम्हण जब मेरे खिलाफ मैदान में उतने तो मेरे लोगों को ज्यादा समझाना नहीं पड़ा. हमारे लोगों को बहुत आसानी से समझ में आ गया. जिन लोगों को गद्दार घोषित किया यह हमारा संगठन का मामला है. मगर जनता को मालूम होना चाहिए कि वह गद्दारों से सावधान रहें. लोगों में बहुत गुस्सा है. वे गद्दारों को मारने पिटने की अनुमति मुझे मांग रहे है. लेकिन मै इस तरह कि बातों के समर्थन में नहीं हूं. संगठन के स्तर पर इनसे निपटना होगा.


उन्होंने कहा, अभी हमारे पास 99 फीसदी लोगों का समर्थन है. पहले जैसे कार्यक्रम चलते थे वैसे ही चल रहे है. लोग पहले की तरह संगठन को आंदोलन निधी दे रहे है. मुस्लिम समाज के लोग भी इस आंदोलन में आना चाहते हैं. पहले की तरह लोग समर्थन भी कर रहे है. संगठन में तोड़फोड करने वाले लोगों से निपटने के बाद हमने संगठन को बढ़ाया और आज हम देशभर में भारत बंद करने के लायक हो गए है. गद्दारों को फुंक मारेंगे तो वह उड़ जाएंगे. मै उनकी औकात कितनी है जानता हूं. 


कार्यकर्ता कह रहे है कि गद्दारों को सबक सिखाएंगे. मगर मै उनको ऐसी कोई अनुमति देने वाला नहीं हूं. इतने बड़े संगठन का तोडफोड करने की वजह से उन्हें गद्दार घोषित किया गया. भांजी राठौर के लोगों ने लिखकर दिया कि वह तुम्हारे घर के सामने आकर हम 200 लोग मूत्र विसर्जन करेंगे. यानी लोगों की भावनाएं कितनी आहत हो गई है इसका आप अंदाजा लगा सकते हो.


वामन मेश्राम ने कहा कि मैं सारे देश भर में एक अभियान शुरू कर रहा हूं. उसका नाम है ‘‘गद्दारों को जानो गद्दारों को पहचानो’’ राष्ट्रीय अभियान. आज से हम देशभर में ऐसा कार्यक्रम शुरू करने जा रहे है. और प्रथम प्रायरिटी में गद्दारों के घर के पास कार्यक्रम होगा. कानून और संविधान के दायरे में होगा. जो लोग संगठन को पैसा लेकर भागे है उनका पंचपक्वान के साथ स्वागत करना चाहिए ऐसा संगठन का निर्णय है. आपने देखा होगा की मुंबई में शिवसेना के बागी विधायकों के कार्यालयों पर शिवसैनिकों ने तोड़फोड़ की है. वहा केंद्र की फोर्स लगानी पड़ी. गद्दारों का देशभर में सबूत के साथ डॉक्यूमेंट पब्लिश करूंगा.
 

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