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नेहरू और एडविना के प्यार के किस्से दुनिया मे विश्वविख्यात है।

Published On :    12 Jul 2018   By : MN Staff
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नेहरू और एडविना में प्यार था यह बात एडविना की लड़की पामेला माउंटबैटन ने खुद अपनी डायरी प्रकाशित करके जाहिर किया था।



नेहरू और एडविना के बीच जो पत्राचार हुआ उसे राहुल गांधी और सोनिया गांधी सार्वजनिक करे और साथ ही भारत के विभाजन की अंग्रेजो से नेहरू ने क्या डीलिंग की थी उसके गोपनीय दस्तावेजो को सार्वजनिक करे।


नेहरू खानदान देशद्रोही है क्यों कि नेहरू के वे दोशद्रोही दस्तावेज सीक्रेट मानकर लॉकर में रखे है। सुप्रसिद्ध पत्रकार कुलदीप नैयर ने वे दस्तावेज मांगे थे मगर उन्हें वे देने से सोनिया गांधी ने मना किया था ऐसा जिक्र कुलदीप जी ने अपने बायोग्राफी में दर्ज किया है। नेहरू के और एडविना के बीच के संबंध में भारत के विभाजन का भी राज छुपा हुआ है।


नेहरू के दस्तावेज राहुल गांधी और सोनिया गांधी जब तक सार्वजनकि नही करती तब तक उन्हें भारत का नागरिकत्व बहाल ही नही किया जाना चाहिए। नेहरू खानदान के बारे में एक ही लाइन में बताया जाए तो वे सबसे बड़े षड्यन्त्रकारी है।


नेहरू और एडविना में प्यार था यह बात एडविना की लड़की पामेला माउंटबैटन ने खुद अपनी डायरी प्रकाशित करके जाहिर किया था। उसी तरह गांधी के प्रपौत्र ने गांधी के चरित्र में गांधी के लफड़ो का भी जिक्र किया है।


नेहरू खुद को सेकुलर मानते थे मगर सच्चाई कुछ और है। नेहरू ने देश के विभाजन में आरएसएस से डीलिंग किया था। गांधी और गोलवलकर की इसके लिए मीटिंग भी हुई थी। इसके दस्तावेज भी मौजूद है। गांधी हत्या प्लान वे में किया इसकी खुपिया जानकारी नेहरू और पटेल को पहले से ही थी।


गांधी बनिया था उसका यूज करके मारना तय था ताकि विभाजन के मुद्दे पर पर्दा डाला जाए।वही हुआ।आज भी पर्दा है।नेहरू खानदान वे सीक्रेट दस्तावेज छुपाकर रखे हुए है। नेहरू ने ही आरएसएस पर टेम्पररी पाबन्दी इसलिए डाली ताकि ब्राम्हणो के खिलाफ जनमत न भड़के बाद में नेहरू ने गोलवलकर से समझौता करके वह पाबंदी हटाई। 



नेहरू ने गोलवकर को इसलिए फ्री किया क्यों कि हिंदुत्व यह मुद्दा ही कांग्रेस का था। कांग्रेस ही हिंदुत्व के एजेंडे के जनक है। कांग्रेस ही आरएसएस की माँ है।कांग्रेस ने ही आरएसएस की स्थापना 1925 में प्लानिग वे में कई थी।


गोलवलकर को इसलिए फ्री किया ताकि नेहरू का सबसे बड़ा विरोधी डॉ बाबासाहब आंबेडकर को दबाना आसान हो। बाद में नेहरू ने डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी की हत्या भी किया और उनके हत्या के जांच आयोग डीआइजी सक्सेना आयोग की रिपोर्ट को आज तक कांग्रेस,बीजेपी ने दबाए रखा।


नेहरू सेकुलर नही सबसे बड़ा कम्युनल था। नेहरू ने ही बाबरी मस्जिद के अंदर 23 दिसंबर 1949 के रात एक बजे राम की मूर्ति रखवाई। इसलिए वह सेकुलर है? नेहरू और गोलवलकर ने यह प्लान करके किया ताकि संविधान लागू होते ही 3 %विदेशी ब्राम्हण भिक मांगनेवाले थे।


तो उन्होंए संविधान के बजाय ब्राम्हणी व्यवस्था लागू करने के लिए हिन्दू-मुस्लिम ऐसा ईशु खड़ा कर दिया बाबरी मस्जिद में राम की मूर्ति रखवाकर। नेहरू की चाल कामयाब हुई और अल्पसंख्य ब्राम्हण बहुसंख्याक लोगो पर राज करने में कामयाब हुए।आरएसएस का मोहन भागवत राम मंदिर बनाना चाहता है मगर उसका फाउंडेशन या उस मुद्दे को जन्म किसने दिया ?पंडत जवाहरलाल नेहरू ने!!!


इतिहास को सही पढ़ना होगा, सही ढंग से समझना होगा। और लोगो को सही ढंग से समझाना भी होगा। नेहरू इतना बदमाश थे कि वे अपने बीफक्रेस में  गीता को रखते थे। गीता क्या है वर्णव्यवस्था को पुनर्स्थापित करने का षड्यन्त्र की किताब।


नेहरू का पीए जॉन मथाई ने नेहरू के निजी बातों की पोलखोल कर दी थी।नेहरू ऐय्याश था।उसे अपने आप को शुंग की अवलाद मानने का गर्व होता था। जॉन केनेडी की मिसेस ने अपनी बायोग्राफी लिखी है जिसमे नेहरू विदेश जब भी जाता था तो वह कितना अय्याश था इसके बारे में सबूतों के आधार पर लिखा है। 


नेहरू शराबी भी थे।नेहरू ने आधुनिक भारत मे ब्राम्हणराज को स्थापित करने के लिए हर तरह के षड्यन्त्र किये है। सबसे बड़ा षड्यन्त्र नेहरू ने ही डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी की हत्या की है।


नेहरू जब मरने के कगार पर था तब उसने कुछ ब्राम्हणो को सलाह पूछी की और ज्यादा जीने के लिए क्या करना चाहिए? नेहरू को ब्राम्हणो ने सलाह दी कि हफ्ते भर लंबा चलनेवाला मृत्युनजय जप यज्ञ करना होगा जिसके श्लोक चार लाख 25 हज़ार थे जो नेहरू को बेड पर लेटे लेटे बोलना था।नेहरू के घर मे पूरा यज्ञ इंतजाम किया।


ब्राम्हणो का जमावड़ा इकट्ठा हुआ ।फिर क्या? पूरा धुंआ निकलता था।नेहरू सेकेलर कितना था?चार लाख पच्चीस हजार श्लोक उसने बोले।सरकारी पैसा पंडितों को बांटा!!!


डॉ बाबासाहब आंबेडकर सही कहते कि मैं अगर मंत्री होता तो नेहरू को सूली पर चढ़ाकर मार डालता!!! नेहरू और मोदी सरकारी पैसा नंगे साधुओ को कुंभमेले में बांट देते है। मोहन भागवत भी नेहरू की परंपरा चला रहा है,सरकारी धन पंडो पर खर्च कर रहा है।


नेहरू सेकुलर नही कम्युनल था यह बात सभी मूलनिवासी बहुजनो को जल्द से जल्द स्वीकार करनी होगी।बीजेपी का विकल्प कांग्रेस नही हो सकता। कांग्रेस आएगी, बीजेपी जाएगी, फिर कांग्रेस आएगी यह नाटक अब बंद करना होगा। दोनों को आउट करना होगा। वह काम देशव्यापी ताकद, देशव्यापी संगठन से ही सम्भव है।

_प्रो. विलास खरात

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