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साहित्यिक सम्मान प्राप्त कवि को स्थानीय मुद्दे उठाना पड़ा महंगा, नगर पालिका ने भेजा घर गिराने का नोटिस

Published On :    10 Aug 2022   By : MN Staff
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एमपी के जाने-माने कवि महेश कटारे को स्थानिय मुद्दे उठाना महंगा पड़ गया है. बीना नगर पालिका ने उनके एक दशक से पुराने घर को तोड़ने का नोटिस भेजा है. नगर पालिका का दावा है कि यह अवैध रूप से बनाया गया है और उनके पास इससे संबंधित जरूरी कागज़ात नहीं हैं.



भोपाल : एमपी के जाने-माने कवि महेश कटारे को स्थानिय मुद्दे उठाना महंगा पड़ गया है. बीना नगर पालिका ने उनके एक दशक से पुराने घर को तोड़ने का नोटिस भेजा है. नगर पालिका का दावा है कि यह अवैध रूप से बनाया गया है और उनके पास इससे संबंधित जरूरी कागज़ात नहीं हैं.  


वायर की रिपोर्ट के अनुसार, सागर जिले के चंद्रशेखर वॉर्ड-7 की माथुर कॉलोनी के इस घर में कटारे ने 2011 में रहना शुरू किया. घर उनकी पत्नी मीरा कटारे के नाम पर है. नगर पालिका ने नोटिस उनके बेटे प्रभात के नाम पर भेजा है. नोटिस में दावा किया गया है कि यह घर अवैध तरीके से बिना अनुमति के बनाया गया है जो नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 (8) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है. नोटिस में कटारे को घर से संबंधित दस्तावेजों के साथ पेश होने को भी कहा गया है.


वायर के अनुसार, महेश कटारे का कहना है कि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज हैं. उन्होंने कहा, ‘जबकि घर प्रभात की मां के नाम पर पंजीकृत है, नोटिस मेरे बेटे प्रभात के नाम पर ही दिया गया है. 2011 में इमारत का नक्शा नगर पालिका ने ही पास किया था और मैंने सभी जरूरी अनुमतियां ली थीं. उनका कहना है कि ‘माथुर कॉलोनी में बने ज्यादातर घर अवैध हैं, लेकिन नोटिस केवल मुझे ही मिला है. जबसे मेरा घर बना है तब से मैं सड़क, पानी, बिजली और नाली आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर आवाज उठाता रहा हूं.’


कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित महेश कटारे एक जनकवि की पहचान रखते हैं जिन्होंने कई स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को उठाया है. जनता के समर्थन के लिए उन्होंने ‘नगर पालिका सो रही भइया, बीना नगरी रो रही भइया’ जैसी कविता लिखी है और कई सार्वजनिक मंचों से इसका पाठ किया है. उनका कहना है कि शायद यही बात अधिकारियों को नागवार गुजरी हो.


उनका आरोप है कि कुछ हफ्ते पहले नगर पालिका के एक अधिकारी ने उनसे हेल्पलाइन पर दर्ज करवाई गई शिकायत वापस लेने का आग्रह किया था. इसके बदले में उन्होंने कॉलोनी की समस्याओं को सुधारने की कोशिश करने की बात कही थी. कटारे ने कहा, ‘मेरे शिकायत वापस लेने के कुछ दिन बाद ही मुझे यह नोटिस मिला.


उधर, बीना नगर पालिका की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेखा जाटव ने मामले की जानकारी न होने की बात कहते हुए इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हालांकि नगर पालिका के सब-इंजीनियर सत्यम देवलिया ने कहा, ‘बीना शहर में पिछले दो सप्ताह में ऐसे दर्जनों लोगों को नोटिस दिए गए हैं, जिन्होंने अवैध तरीके से घर बना रखे हैं. कटारे भी उनमें से एक हैं. वह एक अवैध कॉलोनी है.’


यह पूछे जाने पर कि उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज होने पर भी ऐसा क्यों किया गया, देवलिया ने कहा, ‘अगर उनके पास सभी जरूरी कागज हैं तो उन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी.’ उन्होंने कटारे को निशाना बनाए जाने के आरोप का खंडन करते हुए कहा कि यह नियमित कार्रवाई है और इसके पीछे कोई साजिश नहीं है.


इस नोटिस को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने एक बयान में कहा, ‘महेश कटारे सुगम जनभाषा के कवि हैं. बुंदेली को उन्होंने देशव्यापी लोकप्रियता दिलाई है. कविता को उन्होंने जन भावनाओं की अभिव्यक्ति का जरिया और प्रतिरोध का औजार बनाया है. यह कवि साहित्यकार महेश कटारे के साहित्य और सृजन पर हमला है. उन्होंने कहा, ‘वर्तमान सरकार उन्हें चुप कराना चाहती है इसलिए उन्हें यह नोटिस भेजा गया है. लेकिन वो किसी से नहीं डरते हैं.


बता दें कि बीते कुछ समय में मध्य प्रदेश में सांप्रदायिक झड़पों के आरोपियों के घर गिराए जाने के कई वाकये सामने आए हैं. कई अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी प्रदर्शनकारियों और प्रतिरोध करने वालों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई का पैटर्न देखा गया है.

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