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अदानी ग्रुप को जमीन देने से करोड़ों का नुकसान, पीएसी ने की पैसा वसूली की सिफारिश

Published On :    24 Sep 2022   By : MN Staff
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केंद्र की मोदी सरकार पर अक्सर विपक्ष आरोप लगाता आ रहा है कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट के हित में काम कर रही है. कुछ हद तक अब इस आरोप में दम नजर आ रहा है.



नई दिल्ली : केंद्र की मोदी सरकार पर अक्सर विपक्ष आरोप लगाता आ रहा है कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट के हित में काम कर रही है. कुछ हद तक अब इस आरोप में दम नजर आ रहा है. अब पीएम मोदी कैसे अपने दोस्त अडानी को फायदा पहुंचा रहे है इसकी पोल खुल गई. केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अदानी की कंपनी को जमीन देने से गुजरात सरकार को 58.64 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.


दरअसल बीते बुधवार को लोक लेखा समिति (पीएसी) ने गुजरात विधानसभा में अपनी पांचवीं रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट कहा गया है कि वन और पर्यावरण विभाग ने मुंद्रा पोर्ट और एसईजेड के लिए कच्छ में अदानी ग्रुप की कंपनी ‘अदानी केमिकल्स’ को जमीन दी है. जिसका सही से वर्गीकरण नहीं किए जाने से गुजरात सरकार को 58.64 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. इसको लेकर पीएसी ने तीन महीने के अंदर अदानी केमिकल्स से पूरा पैसा वसूल करने की सिफारिश की है. साथ ही भूमि आबंटन में अदानी ग्रुप को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी सिफारिश की है.


पीएसी की रिपोर्ट के अनुसार अडानी केमिकल्स लिमिटेड के जमीन आबंटन के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने 2004 में मंजूरी दी थी. इसमें कच्छ जिले के मुंद्रा में 1,840 हेक्टेयर और ध्राब गांव में 168.42 हेक्टेयर जमीन की मंजूरी दी गई थी. इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी 2009 में राज्य सरकार ने अडानी की एक नई प्रस्तावित योजना को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा था, जिसे केंद्र सरकार ने फरवरी 2009 में सैद्धांतिक मंजूरी दी थी.


पीएसी ने रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2008 में वन संरक्षक भुज ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में पाया कि आदानी ग्रुप को दी गई जमीन क्रीक मैंग्रोव से भरी हुई थी. इसके बाद भी कच्छ के पूर्व उप वन संरक्षक ने इस जमीन को ईको क्लास 5 के तहत माना और कुल 2008.42 हेक्टेयर वन भूमि के लिए 87.97 करोड़ रुपए दाम निर्धारित किया. इसको लेकर पीएसी ने कहा आदानी ग्रुप को इको क्लास 2 के बजाय इको क्लास 5 के अनुसार जमीन दी गई, जिससे राज्य सरकार को कंपनी ने 58.67 करोड़ रुपए कम दिए हैं.


बता दें कि बीते साल केंद्र सरकार कैग की उस रिपोर्ट में संशोधन कराने की कोशिश कर रही थी, जिसमें कैग ले एफसीआई को फटकार लगाते हुए कहा था कि हरियाणा के कैथल स्थित अडानी साइलो में स्वीकृत मात्रा में अनाज न रखने के चलते करदाताओं का 6.49 करोड़ रुपये का बेजा खर्च हुआ है. उपभोक्ता मामले, मंत्रालय, ने कैग को पत्र लिखकर मांग की थी कि इस पैराग्राफ को रिपोर्ट से हटाया जाना चाहिए. मंत्रालय ने दावा किया था कि जिस आधार पर इस अतिरिक्त खर्च का आकलन किया गया है, वो सही नहीं है. हालांकि कैग ने इन दलीलों को खारिज कर ऐसा करने से इनकार कर दिया था. यह बात भी दर्शाती है कि केंद्र सरकार अड़ानी को फायदा पहुंचा रही है.
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